बुजुर्गों के लिए वरदान बना मथुरा डे - केयर सेंटर
News By :
मफतलाल अग्रवाल
आज जब हर तरफ से बच्चों द्वारा बुर्जुगों के तिरस्कार,अपमान, उन्हें वृद्धाश्रम ,अनाथालय भेजे जाने की घटनाएं सामान्य होती जा रही हैं और उनका भविष्य अंधकार में नजर आता है वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद में आपको वृद्ध दंपत्ति-
जिंदगी एक सफर है सुहाना, मुस्कराते हुए जीवन है बिताना.. की पंक्तियों के साथ गुनगुनाते हुए मुस्कराते, झूमते, नाचते खेलते कूदते नजर आएंगे जिन्हें देखकर हर कोई हैरान नजर आता है।
आज जब देशभर में हर तरफ वृद्ध आश्रम ,अनाथालयों की संख्या की लगातार बढ़ती जा रही है वहीं दूसरी तरफ मथुरा में वरिष्ठ सामाजिक लोगों बुजुर्गों की जिंदगी को नया जीवन जीने के लिए वरिष्ठ नागरिक भवन बनाकर एक नई मिशाल कायम की है जहां बुर्जुग एवं वरिष्ठ लोग अपनी पत्नियों। के साथ भरपूर मस्ती का जीवन जीते हैं । जहां उन्हें ना अकेले पन का अहसास होता है और ना किसी वस्तु के संकट का अहसास होता है, यहां बुर्जुगों के लिए टीवी, कैरम बोर्ड लाइब्रेरी,सहित अन्य आधुनिक सुख सुविधाएं भी मुहैया कराई गई है बल्कि यहां हर शनिवार को सांस्कृतिक,धार्मिक सामाजिक कार्यकमों के साथ बुजुर्गों का जन्मदिन मनाया जाता है।
अपवादों को छोड़ कर, पश्चात संस्क्रति के प्रादुर्भाव से विशेषतः हमारे मध्यवर्गीय समाज में एकल परिवार तथा वरिष्ठ नागरिकों की परिवारों में बढ़ती उपेक्षा एवम समाज की आधुनिकता के प्रभाव के सच से इनकार नहीं किया जा सकता। आज के कामकाजी भागमभाग और आपाधापी से भरी जिंदगी अपने ही घर मे बुजुर्ग एकांकी और उपेक्षित जीवन जीने को अभिशप्त हैं।
कृष्ण की नगरी में वरिष्ठ नागरिकों से जुड़ी ' उपेक्षाओं और एकाकीपन से जुड़े दर्द का समाधान खोजते हुए उनके चेहरों पर मुस्कान देने के संकल्प को जमीन पर उतारने का काम तीन विभूतियों ने किया। गौलोकबासी सर्व श्री विद्या सागर भार्गव, जगदीश प्रसाद अस्थाना और महावीर प्रसाद मित्तल बुजुर्गों के लिये यह त्रिदेव से कम नहीं थे। इन तीनों महापुरुषों ने सन 2000 में वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति मथुरा (वनाकस) की स्थापना की और सोसाइटी अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत कराने के साथ ही फोरम ऑफ सीनियर सिटीजन उत्तरप्रदेश व आल इंडिया सीनियर सिटीजन कंफ्डरेशन से सम्बद्ध कर लिया। वर्ष 2010 में वृन्दावन अक्षय पात्र परिसर में राष्ट्रीय अधिवेशन का सफल आयोजन किया जिसका शुभारंभ उत्तरप्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल माननीय बी.एल.जोशी के कर कमलों सम्पन्न हुआ एवम समापन हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री हुड्डा जी द्वारा हुआ। समिति ने देखा कि समाज व परिवार में उपेक्षित अधिकांश वृद्धजनों का जीवन यापन दूभर है। उनका एकांकीपन स्वास्थ्य और मानसिकता पर दुष्प्रभाव डाल रहा है। किसके पास बैठें किस से अपना दुख सुख साझा करें | वरिष्ठ नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक गोयल बताते है कि समिति ने पाया कि उत्तर प्रदेश वरिष्ठ नागरिक नीति 2016 के बिंदु संख्या 2.6. एवं 2.6.2 के अनुसार इसका समाधान डे केयर सेंटर निर्माण करा कर हो सकता है जिसके लिए स्थानीय निकाय अधीकृत है,अतः समिति के प्रयास के परिणाम स्वरूप, तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्षा श्रीमतीमनीषा गुप्ता से वार्ता हुई,जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया और सभी औपचरिकताएं पूर्ण करते हुए, 03 सितम्बर 2015 को माननीया सांसद हेमामालिनी जी द्वारा भूमिपूजन कराकर भूतल पर वरिष्ठ नागरिक भवन का निर्माण कराकर वर्ष 2016 में वनाकस को संचालन हेतु हस्तगत कराया गया। वनाकस के सचिव एस.एस. जौहरी ने बताया कि सदस्यों की संख्या ज्यादा होने और स्थान कम था,इस समाधान हेतु एक बैठक का आयोजन हुआ जिसके सम्मानीय अतिथि श्री जगन्नाथ प्रसाद गणेशी लाल बजाज ट्रस्ट वृंदावन के अध्यक्ष नारायण दास अग्रवाल जी आमन्त्रित थे। प्रश्नगत समस्या पटलपर आते ही श्री अग्रवाल जी ने कहा प्रथम तल पर एक हॉल का निर्माण आरम्भ करें जिसका व्ययभार वर्णित ट्रस्ट वहन करेगा।इसप्रकार वरिष्ठजन सेवार्थ प्रथम तल पर सभागार निर्मित कर वनकास को 2018 को सौंप दिया और अब प्रथम और द्वितीय तल के लिए लिफ्ट भी स्थापित करा रहे हैं जिसका श्रीगणेश शीघ्र ही उनके करकमलों से सम्पन्न होगा।
डे केयर सेंटर में होने वाली,गतिविधियां:
साप्ताहिक कार्यक्रम
प्रथम शनिवार--
एकता में अनेकता (चाय पर चर्चा) के अंतर्गत पूर्व घोषित विषय पर गोष्ठी चर्चा होती है।
द्वतीय शनिवार--
स्वास्थ्य चर्चा के अंतर्गत डे-केयर सेंटर में वृद्धजानों की सेहत की देखभाल के लिए,स्वास्थ्य वार्ता के अंतर्गत विभिन्न स्थानीय एवं दिल्ली, फरीदाबाद नोएडा गुड़गांव आदि शहरों के हॉस्पिटल से सुयोग्य चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य विषयक जागरूकता रोग से बचाव व निदान के साथ साथ विभन्न परीक्षण और सेमिनार का आयोजन निःशुल्क वरिष्ठजन सेवार्थ किया जाता है।
तृतीय शनिवार---
धर्म चर्चा के अंतर्गत, रामचरित्रमानस के सुन्दरकाण्ड का पाठ व अन्य धार्मिक प्रसंगों पर चर्चा रहती है।
चतुर्थ शनिवार--
आप बीती जग बीती नामक चर्चा में वरिष्ठजन अपने अपने खट्टे मीठे अनुभवों को साझा करते हैं, इसके अतिरिक्त समयानुकूल प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसे-नोटबन्दी के समय कैशलैस ट्रांजिक्शन, सँस्कृत सँभाषणं,कंप्यूटर संचालन आदि आदि हुये। राष्ट्रीय उत्सव जैसे स्वतन्त्रता दिवस, गणतंत्र दिवस आदि प्रतिवर्ष हर्षोल्लास से आयोजित होता है। धार्मिक आयोजन के अंतर्गत, मकर सक्रांति, होली मिलन, दीपोत्सव,व धार्मिक स्थलों का भृमण सामाजिक समरसता हेतु विभिन्न सामाजिक व ऐतिहासिक यात्राओं का आयोजन समय समय पर होता रहता है। वनाकस द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों में नगर महापौर श्री विनोद कुमार अग्रवाल जी, बृज तीर्थ विकास ट्रस्ट के अध्यक्ष श्री शेलेन्द्र मिश्रा जी सेवा निवर्त IPS अपरनगर आयुक्त आदि आदि नगर के गणमान्य व्यक्तित्वों द्वारा अतिथि के रूप में उपस्थिति रह कर वनाकस संचालन का उत्साहवर्धन किया जाता रहा है। कार्यक्रमों को सुव्यवस्थित रूप से आयोजन व संचालन हेतु कार्यस्वरूप के अनुकूल विभिन्न प्रकल्पों का गठन कर सदस्यों को दायित्व दिए गए है जिससे कि वह अपनी दैनिक जीवन को व्यस्त व मस्त रख सकें।
वर्तमान में रचित 9 प्रकल्प क्रियाशील हैं, जो इस प्रकार हैं-
1-डे केयर संचालन प्रकल्प,
2-धार्मिक आयोजन प्रकल्प,
3-सामाजिक आयोजन प्रकल्प,
4-वित्त एवं सदस्यता प्रकल्प,
5-सांस्कृतिक व संस्कार प्रकल्प,
6-तकनीकी प्रकल्प,
7-कला एवं शिक्षा प्रकल्प
8- प्रचार प्रसार प्रकल्प
9- स्वास्थ्य एवं पुस्कालय प्रकल्प ।
उपरोक्त के अतिरिक्त समय समय पर बेसिक व जूनियर विद्यालय के क्षात्रों को संस्कारित एवं कला प्रशिक्षण हेतु विशेष आयोजन समयानुकूल किये जाते हैं।
उत्तरप्रदेश में यही एक मात्र डे-केयर सेंटर है जो निकाय द्वारा निर्मित कर किसी सामाजिक संगठन को संचालन हेतु उपलब्ध कराया है।
वरिष्ठ नागरिक कल्याण आयोग का गठन होः वनाकस के अध्यक्ष दीपक गोयल का कहना है कि सरकार को चाहिए कि मथुरा मॉडल को प्रदेश के हर जिले में लागू कर वृद्धजनों के चेहरों पर मुस्कान लाने का पुनीत कार्य कर सके। सचिव एस.एस.जौहरी जो प्रदेश व केंद्रीय वरिष्ठ संगठन से जुड़े हैं का कहना है कि आरम्भ से ही केंद्रीय व राज्य- वरिष्ठ नागरिक आयोग की मांग की जाती रही है, परन्तु सफलता नहीं मिल पा रही है। कहना है कि जब-बाल अधिकार आयोग,महिला आयोग, पिछड़ा वर्गआयोग, अल्पसंख्यक आयोग, सूचना आयोग आदि आदि क्रियाशील हैं, तो वरिष्ठ नागरिक आयोग क्यों नहीं? जिसके माध्यम से गरीव किसान मजदूर व निम्न वर्ग के बुजुर्गों की मूलभूत समस्याओं के समाधान सहज हो सकें जैसे समाजिक आर्थिक व स्वास्थ्य आदि आदि। केंद्र व राज्य सरकारों को इसको साकार करना चाहिए जिससे वरिष्ठ नागरिक उपकृत रहेंगें।
बुजुर्गों की मस्ती का अद्भुत केंद्र बना भवन ...
जिसकी मस्ती जिंदा है, उसकी हस्ती जिंदा है..का नजारा देखना हो तो वरिष्ट नागरिक भवन में देखा जा सकता हैं जहां बुजुर्गों की मस्ती को देखकर हर कोई चौंक उठता है ,जन्म दिन पार्टी पर दावत, गिफ्ट का आदान प्रदान , नाच गानों को देख कर ऐसा लगता है कि यहां वृद्ध नही बल्कि युवाओं की जन्म दिन पार्टी मन रही हो। हास्य कवि सम्मेलन हो या सांस्कृतिक कार्यक्रम हो या फिर हर महीने टूर पर जाना, महंगे होटलों में ठहराना, भोजन, नाश्ता आदि की बेहतरीन व्यवस्थाओं को देखकर आपको अहसास होगा कि असली तनाव मुक्त जिंदगी का आनंद तो आज भी बुजुर्ग ही ले रहे हैं।



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