Breaking:


ब्रज की रासलीला और नृत्य आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक: स्वामी महेन्द्र 


वृंदावन। ब्रज की रासलीला और नृत्य वास्तव में आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। जब गोप-गोपियां भगवान श्रीकृष्ण के साथ रास करती थीं, तो वह केवल एक नृत्य नहीं था, बल्कि वह परम आनंद और भक्ति की सर्वोच्च अवस्था का प्रतीक था। ये उद्गार स्थानीय दिल्ली श्रीधाम में अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा द्वारा आयोजित ब्रज रसामृत एवं होली महोत्सव के दौरान श्री रामकृष्ण इंटरनेशनल के अध्यक्ष स्वामी गुरू पूज्य महेन्द्र दास जी महाराज ने हरियाणा से पधारे वैश्यजनों को आशीर्वचन देते हुए कहें। अग्रवाल वैश्य समाज हरियाणा के प्रांतीय अधिवेशन के उपरांत देर रात्रि आयोजित इस समारोह की शुभारंभ स्वामी महेन्द्र दास जी महाराज द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान श्रीकृष्ण की वंदना एवं मंगलाचरण से हुई। समारोह में पहुंचने के दौरान समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने हरियाणा प्रदेश के कोने-कोने से आएं वैश्यजनों की ओर से महाराज महेन्द्र दास जी का भव्य स्वागत कर उनका मान-सम्मान किया। इस दौरान उन्होंने ब्रज में नृत्य एवं होली के महत्व पर प्रकाश डालते हुए महाराज जी ने कहा कि ब्रजभूमि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं की भूमि है, जहां हर कण में प्रेम और भक्ति का भाव समाहित है। यहां की होली केवल परंपरा नहीं बल्कि एक दिव्य अनुभव है, जिसमें भक्त अपने सभी भेदभाव और अहंकार को त्यागकर प्रेम और समरसता के रंग में रंग जाता है। अपने ओजस्वी प्रवचनों से उपस्थित जनसमूह को आध्यात्मिकता और भक्ति के महत्व से अवगत करवाते हुए उन्होंने कहा कि ब्रज की होली, रासलीला और नृत्य की परंपरा का विस्तृत वर्णन करते हुए कहा कि ब्रज की होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि यह प्रेम, भक्ति और आनंद की अनूठी अभिव्यक्ति है। ब्रज में मनाई जाने वाली होली में जो उल्लास, स्नेह और आध्यात्मिकता देखने को मिलती है, वह विश्व में कहीं और देखने को नहीं मिलती। भगवान कृष्ण की लीलाएं हमें यह संदेश देती है कि भगवान हर भक्त के हृदय में समान रूप से विराजमान हैं और सच्ची भक्ति से उन्हें प्राप्त किया जा सकता है। महाराज ने कहा कि ब्रज की परंपराओं में संगीत, नृत्य और उत्सव का विशेष महत्व है। ये केवल सांस्कृतिक गतिविधियां नहीं बल्कि आध्यात्मिक साधना के माध्यम हैं। जब भक्त भजन, कीर्तन और नृत्य के माध्यम से भगवान का स्मरण करता है, तो उसका मन निर्मल और पवित्र हो जाता है। उन्होंने कहा कि आज के तनावपूर्ण जीवन में यदि मनुष्य ब्रज की भक्ति और प्रेम की भावना को अपनाए, तो उसके जीवन में शांति और संतुलन स्थापित हो सकता है।


इस दौरान अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने कहा कि ब्रज की इस पावन भूमि पर पधारकर अग्रवाल वैश्य समाज के सदस्यों को जो आध्यात्मिक और भावनात्मक रूप से जोड़ा है वो आजीवन अविस्मरणीय रहेगा। इस अवसर पर प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुभाष तायल रोहतक, पवन अग्रवाल अम्बाला, विनोद सिंगला कैथल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्रीनिवास गुप्ता बहादुरगढ़, उपाध्यक्ष अमरनाथ गुप्ता पानीपत, उपाध्यक्ष एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. विकास गुप्ता कैथल, महासचिव राजेश सिंगला कुरूक्षेत्र, बलराम गुप्ता चरखी दादरी, कोषाध्यक्ष कमल मित्तल, पंजाब प्रदेश अध्यक्ष अमित जैन, कृष्ण गर्ग जीरकपुर, राजेश अग्रवाल पंजाब, महिला प्रदेश अध्यक्ष सुशीला सर्राफ, युवा प्रदेश अध्यक्ष हिमांशु गोयल ने सहित प्रदेशभर के वैश्यजन उपस्थित थे।


इस अवसर पर भजन-कीर्तन, रास और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से ब्रज की पावन परंपराओं को जीवंत किया गया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत राधा-कृष्ण की लीलाओं और ब्रज की होली पर आधारित नृत्य ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे-जैसे कार्यक्रम आगे बढ़ता गया, भक्तजन भक्ति और आनंद के रंगों में डूबते चले गए।

मिलती जुलती खबरें

Leave A Comment

Recent Comments

Don't worry ! Your Phone will not be published. Required fields are marked (*).