मथुरा में फर्जी शिक्षकों को बचाने में जुटे शिक्षा अधिकारी

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– वर्ष 2004-2005 बीएड डिग्री धारक शिक्षकों की सूची की सीडी खोलने से बच रहा विभाग

मथुरा। बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में वर्ष 2004-2005 बीएड डिग्री धारक शिक्षक कार्यरत हैं। इनमें से काफी संख्या में ऐसे शिक्षक भी हैं जिनके बीएड के प्रमाण पत्र एसआईटी की जांच में फर्जी पाए गए हैं। ऐसे शिक्षकों की सूची एक बार फिर एसआईटी ने बीएसए को सौंपी है। सचिव बेसिक शिक्षा द्वारा 15 जनवरी तक ऐसे फर्जी शिक्षकों की सूची मांगी गई थी। जबकि 16 जनवरी तक सीडी को खोला ही नहीं गया है। इससे प्रतीत हो रहा है कि शिक्षा अधिकारी इस घोटाले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं।
एसआईटी ने गत वर्ष मथुरा जनपद में फर्जी बीएड अंकतालिका/डिग्री के आधार पर नौकरी कर रहे शिक्षकों की एक सूची तत्कालीन बीएसए को सौंपी थी। उस समय विभाग ने 54 शिक्षकों की एक सूची जारी की थी। इसमें फर्जी प्रमाणपत्रों पर नौकरी कर रहे शिक्षक-शिक्षिकाओं के नाम शामिल थे। विभाग ने कार्यवाही शुरु करते हुए शिक्षकों का वेतन रोकने के आदेश जारी किए लेकिन उक्त शिक्षकों को हाईकोर्ट से राहत मिल गई और शिक्षकों का वेतन जारी कर दिया गया। हालांकि कोर्ट ने यह आदेश भी दिया था कि विभाग अपनी कार्यवाही जारी रख सकता है। लेकिन सेटिंग-गेटिंग के चलते मामले को दबा दिया गया। अब एक बार फिर एसआईटी ने ऐसे शिक्षकों की सूची एक सीडी में दर्ज कर मथुरा बीएसए को उपलब्ध कराई है। सचिव बेसिक शिक्षा रुबी सिंह के निर्देशानुसार इस सीडी को खोलकर शिक्षकां के नाम से मिलान करना था। साथ ही सूची के
मिलाने के बाद मिलने वाले फर्जी शिक्षकों की संख्या और नाम से 15 जनवरी तक सचिव को उपलब्ध करानी थी। लेकिन 15 जनवरी तो छोड़िए 16 जनवरी बीतने के बाद भी उक्त सीडी को खोला ही नहीं गया है। वरन् बीएसए शनिवार से गुरुवार तक लगातार बीएसए ऑफिस से अनुपस्थित चल रहे हैं। सीडी खोलकर फर्जी शिक्षकों के नामों को न सार्वजनिक न करना और उनकी सूची तैयार कर सचिव बेसिक शिक्षा विभाग को न भेजना एक सोची समझी साजिश का हिस्सा लग रहा है। इस बारे में बीएसए चंद्रशेखर से उनका पक्ष जानने के लिए फोन किया गया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।

सीडी बनी अवैध उगाही का धंधा
अभी तक भले ही सीडी को खोला नहीं गया है लेकिन सीडी में शामिल नामों को लेकर शिक्षक-शिक्षिकाओं को डरा कर उनसे अवैध वसूली का काम बीएसए के इर्द-गिर्द रहने वाले दलाल किस्म के शिक्षक और कर्मचारियों ने शुरु कर दिया है। पहले की सूची में शामिल रहे शिक्षक-शिक्षिकाओं को उनका नाम इस सूची में भी शामिल होने का भय दिखाया जा रहा है। साथ ही इस सूची में से नाम निकलवाने का भरोसा देकर उनसे लाखों की उगाही की जा रही है।

बीएसए ऑफिस रामभरोसे
शनिवार से ही बीएसए चंद्रशेखर अनुपस्थित चल रहे हैं। उनके न आने का प्रभाव कार्यालय के अन्य कर्मचारियों पर भी देखा जा सकता है। कर्मचारी समय के बाद ऑफिस आ रहे हैं और शाम को समय से पहले कार्यालय छोड़ रहे हैं। बीएसए की अनुपस्थिति में उनका चार्ज किसके पास है। इसकी जानकारी भी किसी अधिकारी अथवा कर्मचारी के पास नहीं है। इस संबंध में जब एबीएसए मथुरा जेपी सुमन से विषबाण ने पूछा तो उन्होंने बताया कि शनिवार और रविवार का चार्ज एबीएसए निशेष जार को दिया गया था। लेकिन जब एबीएसए निशेष जार से बात हुई तो उन्होंने चार्ज होने से स्पष्ट इंकार किया।