पराली से पशुओं के लिए पौष्टिक आहार बनाएं, खेतों में न जलाएं

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मथुरा। चौमुहां में पशुपालकों के लिए पराली से संबंधित गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें पशु पालकों को पराली की गुणवत्ता की जानकारी दी गई। साथ ही पराली न जलाने के लिए भी जागरूक किया गया।

गोष्ठी में उपस्थित पशु पालकों को संबोधित करते हुए पशु चिकित्साधिकारी डॉ. संजय मिश्रा ने कहा कि पराली पशुओं के लिए एक बेहतर चारा है। इसे उपचारित करने के बाद उसकी पोषण रूपी गुणवत्ता को काफी हद तक बढ़ाया जा सकता है। बताया कि पशुपालक पराली को सामान्य चारा ही समझे। इसकी कटाई करके सीधे ही पशुओं को खिलाया जा सकता है। साथ ही पराली को कुछ रसायनों के साथ उपचारित करने के पश्चात भी इसे उच्च गुणवत्ता और पोषक तत्वों से युक्त किया जा सकता है। यूरिया से पराली का उपचार करना बेहद सस्ता पड़ता है। यूरिया से उपचार करने के पश्चात पराली में सात से आठ प्रतिशत प्रोटीन मिल जाता है एवं 15 से 20 प्रतिशत पाचन क्रिया बढ़ जाती है।

पराली को यूरिया से उपचारित करने की विधि

पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. संजय मिश्रा ने बताया कि पराली को यूरिया से उपचारित करने के लिए 3 किलोग्राम यूरिया लेकर 35 से 40 लीटर पानी में मिलाना होगा। उसके पश्चात् पराली की कुट्टी बनाकर अथवा साबुत पराली के ऊपर यूरिया और पानी के घोल को छिड़कना होगा। फिर पराली को दबाने के लिए पॉलीथिन शीट का प्रयोग करना होगा। यह मिश्रण 3 से 4 सप्ताह तक दबा के रखना है। इसमें किसी भी प्रकार से हवा नहीं जानी चाहिए। हवा जाने से पराली काली हो सकती है या जल भी सकती है।

डॉ. संजय कुमार मिश्रा ने सभी पशुपालक भाइयों से अनुरोध करते हुए कहा कि वे पराली को खेतों में ना जलाएं बल्कि यूरिया के उपचार द्वारा इसे पौष्टिक बनाकर पशुओं को खिलाएं। जिससे वायु प्रदूषण से बचाव हो सके और पशुओं को बहुत कम कीमत पर पौष्टिक आहार मिल सके।