देश भर में जले पुतले, मथुरा में हुआ रावण का पूजन

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मथुरा। अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य की जीत का विजय दशमी का पर्व रविवार को पूरेदेश के रावण पुतला के साथ मनाया गया वहीं दूसरी तरफ भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में रावण के पुतला दहन का विरोध करते हुए प्राचीन शिव मन्दिर पर लंकेश भक्तमण्डल द्वारा रावण की पूजा-अर्चना के साथ आरती की गई।

लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष ओमवीर सारस्वत के द्वारा विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी दशानन की आरती एवं पूजा अर्चना के कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मथुरा में यमुना किनारे यमुनापार क्षेत्र में पुल के नीचे प्राचीन शिव मंदिर पर विगत वर्षों की भांति महाराज दशानन की पूजा अर्चना की गई पूजा अर्चना के दौरान शिव एवं शक्ति की उपासना करनी वाले कुलदीप अवस्थी ने दशानन का स्वरूप धारण किया और उनके द्वारा पहले भगवान शिव की आराधना और पूजा अर्चना की गई बाद में लंकेश भक्तों के द्वारा जय लंकेश जय शंकर की नारों की जय घोष की गई लंकेश भक्तों के द्वारा महाराज दशानन की आरती उतारी गई इस मौके पर लंकेश भक्त मंडल के अध्यक्ष सोमवीर सारस्वत ने कहा कि जब भगवान राम ने प्रकांड विद्वान रावण का उनकी विद्वता में लोहा माना था और उन्हें लंका पर विजय के लिए पूजा अर्चना करने के लिए स्वयं आमंत्रित किया था रावण की वैधता एवं उनके पराक्रम की शक्ति अपार थी उन्होंने स्वयं अपने आप पर विजय पाने का आशीर्वाद सेतबंध रामेश्वरम की स्थापना की समय भगवान राम को दिया था रावण जैसा प्रकांड विद्वान स्वयं जानकी जी को लंका से साथ लेकर गया और भगवान राम के साथ पूजा कराने के बाद उन्हें लंका लेकर आया इसके अलावा भगवान राम ने जब दशानन अंतिम समय पर विष्णु लोक को अपना शरीर त्याग कर जा रहे थे उसी समय उन्होंने अपने छोटे भाई लक्ष्मण को राजनीति की शिक्षा लेने भेजा था और प्रकांड विद्युत आ को नमन किया था भगवान राम ने कहा था रावण प्रकांड विद्वान एवं ब्राह्मण है उससे हमें सीख लेनी चाहिए। जब भगवान राम ने स्वयं उन्हें अपना आचार्य बनाया तो हमारी समाज के लोग भगवान राम को अपना आराध्य मानते हैं तो भगवान राम के आचार्य का अपमान क्यों करते हैं रावण में कोई बुराई नहीं थी अगर बुराई होती तो वह भगवान राम के आचार्य कैसे बनते। किसी भी हमारे धार्मिक ग्रंथ में पुतला दहन की कोई प्रसंग कथा नहीं है और ना ही हमारे संविधान में एक बार किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद बार-बार उसकी पुतला दहन की कोई अनुमति है। कुछ लोगों के द्वारा प्रतिवर्ष पुतला दहन की जो परंपरा चलाई जा रही है वह एक कुप्रथा है हमें रावण की अच्छाइयों से सीख लेनी चाहिए उनकी तपस्या उनकी शक्ति से हमें प्रेरणा लेनी चाहिए। कार्यक्रम के दौरान यह भी कहा गया कि निकट भविष्य में लंकेश का मंदिर भी मथुरा में भव्य और दिव्य स्वरूप में बनेगा भगवान श्री राम कि आचार्य का पुतला दहन नहीं करना चाहिए कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष जहां उनके पुतला दहन नहीं हो पा रहे हैं उस पर भी लंकेश भक्त मंडल ने हर्ष जताया। दशहरा के अवसर पर दशानन की विष्णु लोक भवन के मौके पर लंकेश भक्तों के द्वारा उनकी विशेष पूजा अर्चना की गई कार्यक्रम के दौरान संतोष सारस्वत बृजेश सारस्वत संजय सारस्वत कुलदीप अवस्थी के पी सारस्वत बीडी शर्मा बाल योगी महाराज देवेंद्र सारस्वत मुकेश सारस्वत अंकुर सारस्वत सत्य स्वरूप सारस्वत धारा जीत सारस्वत अनिल सारस्वत अजय सारस्वत राकेश सारस्वत गजेंद्र सारस्वत देवेंद्र सारस्वत सुधीर शर्मा नरेंद्र शर्मा रमाकांत सारस्वत आदि ने भाग लिया।