हवा-हवाई साबित हुआ मेगा फूड पार्क का सपना, 50 हजार किसानों के टूटे सपने

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मथुरा। जनपद की जनता को लोकसभा चुनाव 2019 से पूर्व दिखाया गया विशाल मेगा फूड पार्क की स्थापना का सपना हवा हवाई साबित हो गया है। समय से काम शुरू न हो पाने के चलते इसका लाइसेंस ही निरस्त हो गया है। जबकि एक ओर केंद्र सरकार किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि बिल से किसानों के हित का राग अलाप रहीं है। वहीं मेगा फूड पार्क के लाइसेंस की अवधि निकल जाने के चलते क्षेत्रीय किसानों और युवाओं की भी उम्मीदें टूट गई हैं। यह मेगा फूड पार्क 57 एकड़ के क्षेत्रफल में लगभग 2 हजार करोड़ की लागत से छाता क्षेत्र में बनाया जाना था। केंद्रीय मंत्रियों, उप्र सरकार के कद्दावर मंत्रियों सहित सांसद हेमामालिनी की उपस्थिति में इसका उद्घाटन हुआ था।

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2019 से पूर्व मथुरा सांसद एवं फिल्म अभिनेत्री हेमामालिनी ने स्थानीय होटल में केन्द्र एवं उ.प्र. सरकार तथा प्रमुख उद्योगपति सुरेश चतुर्वेदी के सहयोग से किसानों के लिये 2 हजार करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले मेगा फूड पार्क के निर्माण का ऐलान किया था। उस समय नन्द वन मेगा फूड पार्क (प्राइवेट लिमिटेड) के निदेशक बनाए गए सुरेश चंद चतुर्वेदी ने बताया था कि 57 एकड़ क्षेत्र में फैले मेगा फूड पार्क से 5000 से अधिक लोगों को सीधे तौर पर रोजगार उपलब्ध होगा। 50 हजार से अधिक किसान भाइयों को उनके द्वारा उत्पादित फसलों को सुरक्षा प्रदान कर उचित मूल्य दिया जायेगा। इस फूड पार्क में विश्व स्तरीय तकनीक का इस्तेमाल होना था। इसमें 60,000 लीटर क्षमता की पानी की टंकी, 10,00,000 लीटर क्षमता का अण्डरग्राउंड जल टैंक के अलावा बोरवेल, पम्प हाउस, जल वितरण की व्यवस्था, प्राथमिक स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण सुविधा, कोल्ड स्टोर, पूर्णतः विकसित कक्ष, मालगोदाम की सुविधा, किसानों के लिये हाॅस्टल सुविधा, बिचैलिये तथा कमीशन एजेंटों के बगैर खरीद फरोख्त की सुविधा होनी थी।

प्रस्ताव के अनुसार, इस मेगा फूड पार्क में खाद्य एकत्रितकरण केन्द्र, गुणवत्ता नियंत्रक प्रयोगशाला, व्यापारिक सुविधा केन्द्र, प्रोसेसिंग सेण्टर के अन्तर्गत स्थापित मल्टी चैम्बर कोल्ड स्टोरेज की क्षमता 2000 मीट्रिक टन तथा तुरन्त फ्रीजिंग की क्षमता 2 मीट्रिक टन प्रति घंटा से 4000 मीट्रिक टन तथा ड्राई वेयर हाऊस की क्षमता 10,000 मीट्रिक टन दाल, अन्न आदि के भंडारण की व्यवस्था होनी थी। अन्न परीक्षण की सुविधा तथा रिटेल दूध के पैकेजिंग की सुविधा उपलब्ध भी होनी थी। इसमें 8 करोड़ लीटर दूध की खपत होनी थी। जिसके लिये कासगंज, भरतपुर, एटा, नौहझील सहित 5 स्थानों पर दुग्ध सहित अन्य खाद्य सामग्री एकत्रित करने के लिए केन्द्रों की स्थापना भी होनी थी। यदि इस फूड पार्क का निर्माण और स्थापना हो जाती तो उत्तर प्रदेश में पतंजलि के मेगा फूड पार्क के बाद उत्तर प्रदेश में यह दूसरा फूड पार्क होता, लेकिन ऐसा नहीं हो सका।

इस विशाल मेगा फूड पार्क का भूमि पूजन भी 9 फरवरी 2019 को आगरा-दिल्ली स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-2 से सटे छाता-बरसाना रोड़ पर नन्दनवन में हुआ था। जिसमें तत्कालीन केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री हरसिमरत कौर बादल, सांसद हेमामालिनी सहित अन्य स्थानीय विधायक उपस्थित रहे थे। लेकिन मेगा फूड पार्क की स्थापना का सपना अब सिर्फ सपना ही रह गया है। फूड पार्क का काम समय से शुरू न हो पाने के चलते लाइसेंस की अवधि ही समाप्त हो गई। यह निदेशक और सरकार की लापरवाही के चलते हुआ है। मेगा फूड पार्क की स्थापना न होने के कारण स्थानीय किसानों को किए गए वादे धराशायी हो गए। वहीं युवाओं को रोजगार दिए जाने का वायदा भी सिर्फ फेल साबित हुआ। इससे स्थानीय युवाओं और किसानों में मायूसी है। देखना होगा कि नंदवन मेगा फूड पार्क की स्थापना का सांसद हेमा मालिनी का सपना पूरा हो पाता है अथवा नहीं। हालांकि सांसद हेमा मालिनी आगामी लोकसभा चुनाव में न लड़ने का मन बना चुकी हैं।

इस संबंध में सांसद प्रतिनिधि जनार्दन शर्मा ने विषबाण को बताया कि समय से काम आरंभ न होने के चलते लाइसेंस की अवधि समाप्त हो गई थी। इसके चलते कार्य आगे नहीं बढ़ सका। लाइसेंस रिन्युअल की प्रक्रिया फिर से आरंभ किए जाने के लिए मेगा फूड पार्क के निदेशक सुरेश चतुर्वेदी से कहा गया है।

इस संबंध में उद्योगपति एवं नंदवन मेगा फूड पार्क के निदेशक सुरेश चतुर्वेदी से विषबाण ने फोन पर संपर्क किया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

सोशल मीडिया एकाउंट भी हुए बंद

नंदवन मेगा फूड पार्क की स्थापना की घोषणा कर लोकसभा चुनावों में आम जनता को लुभाने का प्रयास किया गया था। इसके चलते ही इसका प्रचार प्रसार सोशल मीडिया पर भी खूब जोर शोर से किया गया। फेसबुक पेज बनाया गया। ट्विटर एकाउंट भी बनाया गया। फेसबुक पेज पर लगाए गए शिलान्यास के फोटो पर सिर्फ 5 ही लाइक्स शो हो रहे हैं। इसके बाद फेसबुक पेज पर कोई एक्टिविटी नहीं है। साथ ही ट्विटर पर भी सिर्फ शिलान्यास के ही फोटो अपलोड हैं। इसके बाद में कोई फोटो अथवा ट्वीट नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को लुभाने के लिए ही मेगा फूड पार्क के स्थापना की घोषणा की गई थी।