आईटीआई संस्थानों के बाद अब बीएड-बीटीसी संस्थानों पर कसा शिकंजा, होगी जांच

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मथुरा। निजी आईटीआई संस्थानों में बड़े पैमाने पर धांधली उजागर होने के बाद अब यूपी सरकार ने बीएड एवं बीटीसी कालेजों की जांच के निर्देश दिए हैं। इसके लिए कमेटी भी गठित कर दी गई है। इससे कालेज संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
जनपद में पूर्व में बड़े पैमाने पर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाला सामने आया था। इसके बाद हाल ही में जनपद के निजी आईटीआई संस्थानों के खिलाफ भाजपा विधायक पूरन प्रकाश की शिकायत के बाद जांच की गई थी। जांच के बाद उद्यमिता एवं कौशल विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जनपद के 100 आईटीआई संस्थानों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था कि क्यों न आपकी मान्यता निरस्त कर दी जाए। आईटीआई संस्थानों के बाद अब बड़े पैमाने पर बीएड और बीटीसी संस्थानों पर भी सरकार की निगाह टेढ़ी हो गई है। इसमें शासन तक पहुंची तमाम शिकायतों को देखते हुए उप्र सरकार द्वारा वित्त मंत्री की अध्यक्षता में 30 सितंबर को आयोजित बैठक में प्रारंभिक रूप से प्रदेश के प्रत्येक मंडल के किसी एक जनपद में बीएड एवं बीटीसी संस्थानों की गहन जांच व सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया।
इसमें उक्त शिक्षण संस्थानों में मानकों के विपरीत शुल्क प्रतिपूर्ति की जांच सत्यापन के लिए उप्र वित्त विभाग द्वारा विभिन्न मंडलों में टीम गठित की गई है। इसमें लखनऊ, कानपुर नगर, अंबेडकर नगर, गोंडा, बस्ती, संत कबीर नगर की प्रभारी अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक सी. इंदुमती, प्रयागराज, गाजीपुर, मिर्जापुर, झांसी, बांदा एवं ओरैया की जिम्मेदारी पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के उप निदेशक अजीत प्रताप सिंह, मेरठ, मुजफफरनगर, मुरादाबाद, एटा, बरेली एवं मथुरा का प्रभारी समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक सिद्धार्थ मिश्र को बनाया गया है। 2019-20 एवं 2020-21 सत्र की उक्त जांच टीमें बीएड एवं बीटीसी पाठ्यक्रम प्रवेश के लिए निर्धारित न्यूनतम कट आॅफ अंक का पालन हुआ हैं अथवा नहीं, अनुसूचित जाति के छात्रों का दाखिला एवं छात्रवृत्ति, संस्थानों की मान्यता, पाठ्यक्रम की मान्यता, कालेज में स्वीकृत सीटें, निर्धारित शुल्क, मानकानुसार शिक्षकों की तैनाती, अर्हता एवं उनके शैक्षिक प्रमाण पत्र, कक्षों की संख्या एवं फर्नीचर आदि की जांच की जाएगी। इसके साथ ही एक बिल्डिंग में एक ही कालेज संचालित है अथवा कई, इसकी भी जांच होगी।
जांच का यह आदेश प्रमुख सचिव बीएल मीणा द्वारा 8 अक्टूबर शुक्रवार को जारी किया गया है। जांच के लिए चयनित जनपदों के एक-एक अपर जिलाधिकारी भी जांच टीम के सहयोग करेंगे। आदेश जारी होने के साथ ही जनपद के शिक्षा माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। अभी शिक्षा माफिया निजी आईटीआई संस्थानों पर होने वाली कार्यवाही की प्रक्रिया से ही नहीं उबर पाए हैं कि बीएड एवं बीटीसी शिक्षण संस्थानों की जांच के आदेश ने उनके होश उड़ा दिए हैं। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्हें क्या करना चाहिए। हालांकि उन्होंने अपने राजनैतिक आकाओं का दामन थामने के प्रयास आरंभ कर दिए हैं ताकि किसी तरह जांच से बचा जा सके। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह संभव होता नहीं दिख रहा है।