आईटीआई संचालकों ने जंतर-मंतर पर किया प्रदर्शन, कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग

0
53

मथुरा। आईटीआई संस्थानों की मान्यता निरस्तीकरण की कार्रवाई से आका्रेशित निजी आईटीआई संचालकों ने शनिवार को दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर नारेबाजी करते हुए संस्थानों के खिलाफ हुई कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की।
बलदेव विधानसभा से भाजपा विधायक पूरन प्रकाश ने विधानसभा में मथुरा के चार ब्लाॅक मथुरा, राया, बलदेव एवं फरह में संचालित निजी आईटीआई संस्थानों में बरती जा रही अनियमितताओं की शिकायत की गई थी। शिकायत के बाद शासन स्तर से जनपद के विभिन्न आईटीआई संस्थानों की जांच कराई गई। यह जांच मंडलीय संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण/शिक्षुता आगरा द्वारा कराई गई थी। इसके लिए मथुरा में तीन टीमें गठित की गई थीं। जिन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट ज्वाइंट डायरेक्टर आगरा को सौंपी। जेडी प्रशि./शिक्षुता आगरा द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा मथुरा के ही 100 आईटीआई संस्थानों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था कि क्यों न आपकी मान्यता निरस्त कर दी जाए। इसमें 1 अक्टूबर तक जवाब मांगा गया था।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एकत्रित हुए निजी आईटीआई संचालक।

इस कार्रवाई से जनपद के आईटीआई संचालकों में खलबली मची हुई है। वह इस कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे हैं। संचालकों द्वारा भाजपा विधायक पूरन प्रकाश का पुतला फूंका गया। उनके खिलाफ 5-5 लाख रूपए की चैथ मांगने का आरोप लगाया। प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया। संस्थानों पर हुई कार्रवाई के विरोध में शनिवार को आईटीआई संचालकों द्वारा दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया गया। साथ ही राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री एवं गृह मंत्री के नाम ज्ञापन देते हुए संस्थानों पर हुई कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की। धरना प्रदर्शन में मथुरा से आर्य अशोक शर्मा, लोकेंद्र गौतम, अमर सिंह, उदय सिंह, राजकुमार शर्मा, अनिल चौधरी, अनिल शर्मा, केके चौधरी, चेतन शर्मा, मुकेश चौधरी, रईस अहमद, कमल चौधरी, राकेश चौधरी, राजबहादुर, निरंजन सिंह सोलंकी, राजेश कौशिक आदि शामिल रहे।
इस संबंध में विषबाण ने मंडलीय संयुक्त निदेशक प्रशिक्षण/शिक्षुता से बात करने का प्रयास किया लेकिन उनकी तबियत खराब होने के कारण उनसे संपर्क नहीं हो सका। कार्यालय सूत्रों की मानें तो आईटीआई के नोडल अधिकारी द्वारा आईटीआई संस्थानों की जांच की गई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर मथुरा के 27 आईटीआई संस्थानों की मान्यता निरस्तीकरण की संस्तुति की गई थी। इसके बाद संस्थान संचालक न्यायालय की शरण में चले गए। न्यायालय द्वारा यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए गए थे। सरकार द्वारा अब उक्त 27 आईटीआई संस्थानों में प्रवेश के लिए विद्यार्थियों को विकल्प नहीं दिया जा रहा है। उक्त संस्थानों में प्रवेश के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को दूसरे संस्थान का विकल्प चुनने के लिए निर्देश दिए गए थे। शेष अन्य 100 आईटीआई संस्थानों को 1 अक्टूबर तक अपना जवाब दाखिल करना था। इस संबंध में कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय केंद्र सरकार को कार्रवाई करनी है।