28 सालों में मिटा बाबरी मस्जिद का कलंक, संतों में खुशी

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मथुरा। धर्म रक्षा संघ की एक बैठक अखंड दया धाम कालीदह परिक्रमा मार्ग वृंदावन में आयोजित की गई। महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में बाबरी विध्वंस में सभी आरोपियों को बाइज्जत बरी करने पर हर्ष व्यक्त किया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ.मनोज मोहन शास्त्री ने कहा कि 28 वर्षों में सीबीआई पूरी ताकत लगाने के बाद भी 32 राम भक्त महापुरुषों के खिलाफ कोई सबूत नहीं जुटा सकी। अंततः अदालत को सभी को ससम्मान बरी करना पड़ा। इसके लिए सीबीआई कोर्ट धन्यवाद की पात्र है।
महामंडलेश्वर स्वामी भास्करानंद महाराज ने कहा कि अदालत ने जो भी निर्णय दिया है वह ऐतिहासिक एवं महत्वपूर्ण है। सभी राम भक्तों के लिए यह प्रसन्नता का विषय है। इस निर्णय ने यह सिद्ध कर दिया है कि जिन लोगों को बाबरी विध्वंस के मामले में फंसाने की योजना सीबीआई ने बनाई थी, वह गलत थी।
धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ ने कहा कि वास्तव में बाबरी ढांचा तोड़ना सामान्य इंसानों के वश की बात नहीं थी। बल्कि यह तो राम जी की इच्छा से स्वतः स्फूर्त ऊर्जावान कारसेवकों ने कलंक मिटाया। मगर इस षड्यंत्र में इन 32 लोगों में से कोई शामिल नहीं था। यह अब सिद्ध हो चुका है।
धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीदास प्रजापति ने कहा कि सीबीआई को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे सिद्ध होता हो कि इन आरोपियों ने ढांचा गिराने की योजना बनाई थी। अंततः सत्य की विजय हुई।
धर्म रक्षा संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी सुधीर शुक्ला ने कहा कि सीबीआई कोर्ट में बाबरी विध्वंस का जो केस 32 लोगों पर चल रहा था। यह एक कलंक जैसा था। कोर्ट के निर्णय के बाद यह कलंक समाप्त हो गया इस आरोप के चलते इन सभी लोगों ने बहुत मानसिक यंत्रणा झेली थी।
धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय संगठन मंत्री करुणेश महाराज ने कहा कि धर्म रक्षा संघ सीबीआई कोर्ट से बरी हुए सभी 32 लोगों का अभिनंदन करता है और संभव हो सका तो व्यक्तिगत रूप से भी सभी से मिलकर उनका सम्मान किया जाएगा।
धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय मंत्री ब्रजकिशोर पचैरी ने पधारे हुए सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया कार्यक्रम का संचालन रविकांत गौतम ने किया।
बैठक में रविकांत गौतम, स्वामी जगदीश्वरानंद, महामंडलेश्वर स्वामी रूद्रदेवानंद,स्वामी, चंदन मुनि महाराज, महंत डॉ. आदित्यानंद महाराज, स्वामी देवानंद, देवेंद्र गोस्वामी, गोपेश गोस्वामी, भगवानदास चैधरी, समीर शुक्ला आदि उपस्थित रहे।