पीडब्लूडी के जिस अफसर पर भ्रष्टाचार के आरोप, उसको ही दे दी जांच

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चंद्रशेखर गौड़
मथुरा। सरकारी राज काज की अपनी गति है। उसे बदलना बड़ा ही मुश्किल है। यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भ्रष्टाचार जीरो टाॅलरेंस का लाख दावा करें लेकिन जमीनी धरातल पर भ्रष्टाचार की जांचों का यूपी में अजब ही खेल हो रहा है। इसमें मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा उसी अधिकारी को जांच अधिकारी बना दिया। जिसके खिलाफ भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए गोपनीय शिकायत की गई। इसका खुलासा उस समय हुआ जब कथित शिकायतकर्ता के पास अधिकारी ने नोटिस भेजा।
उप्र की योगी सरकार में भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों का किस तरह निस्तारण हो रहा है। इसका खुलासा लोक निर्माण विभाग में सामने आया है। जहां किसी विभागीय कर्मचारी अथवा ठेकेदार ने लोक निर्माण विभाग खंड एक के अधिशासी अभियंता ब्रिजेश कुमार दीपक के भ्रष्टाचार की शिकायत वरिष्ठ पत्रकार मफतलाल अग्रवाल के नाम से मुख्यमंत्री, लोक निर्माण मंत्री, प्रमुख सचिव पीडब्लूडी, मुख्य अभियंता पीडब्लूडी आगरा क्षेत्र सहित अन्य अधिकारियों के नाम गोपनीय पत्र के माध्यम से की। शिकायत में एक्सईएन ब्रिजेश कुमार दीपक को बसपा के अनुषांगिक संगठन वामसेफ से जुड़ा हुआ बताया गया है। इनकी मानसिकता पूरी तरह बसपाई है। यह वामसेफ के सदस्य हैं। इनकी ससुराल मथुरा में ही है और इनके ससुर मथुरा बसपा के जिलाध्यक्ष रहे हैं। ठेकेदारों को काम का भुगतान नहीं किया है। इससे मजदूरों को काफी परेशानी हो रही है। यदि कोई तिलक लगाकर उनके पास जाता है तो उसका उपहास उड़ाते हैं। धर्म एवं श्रीराम के प्रति इनकी सोच काफी गलत है। यदि कोई इनके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता है तो उसके घर पर वामसेफ के गुंडे भेजकर उसे एवं उसके परिवार को धमकाया जाता है। जान से मारने की धमकी देते हैं। यह अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर को कार्यालय में लेकर आते हैं। कर्मचारियों एवं ठेकेदारों को धमकाते हैं। भाजपा, मुख्यमंत्री एवं पीडब्लूडी मंत्री की बातें आने पर गालियां दी जाती हैं। उल्टी सीधी बातें कहते हैं। आपकी भाजपा पार्टी की छवि को धूमिल करने का काम कर रहे हैं। भाजपा पदाधिकारी किसी कार्य के लिए कहते हैं तो उसका काम कभी नहीं किया जाता है।
पत्र में मुख्य अभियंता के कई बार मौखिक तौर पर कहने एवं लिखित आदेश के बाद मनरेगा के आगणन नहीं भेजे गए हैं। ठेकेदारों को उनका भुगतान समय से नहीं किया जा रहा है क्योंकि इनके द्वारा कमीशन का प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। पहले 2 प्रतिशत कमीशन लिया जाता था जबकि यह 3 प्रतिशत कमीशन मांग रहे हैं। इससे कई कार्यों के बिल लंबित हैं। टेंडरों में हेराफेरी, लाॅग बुक एई से भरवा कर अपने निजी आवास नोएडा रिश्तेदारियों में डामर, बिटुमिन के टैंकर बेचना, टीआई-पीआई के नाम से लखनऊ खर्चा, अधिकारियों के नाम पर एक्स्ट्रा आईटम्स, वेरिएशन आदि से फर्जी तरीके से अपनी जेब भरना आदि शिकायतें हैं।
शिकायतकर्ता ने पत्र में स्वयं की खतरा बताते हुए अपने नाम-पते को गोपनीय रखने का अनुरोध किया है। इस शिकायत को आधार बनाते हुए सीएम कार्यालय से जांच के निर्देश जारी किए गए। निर्देशों का पालन करते हुए मुख्य अभियंता आगरा ने गोलमाल करते हुए आरोपी अधिकारी एक्सईएन ब्रिजेश कुमार दीपक को ही भ्रष्टाचार के इस मामले में जांच अधिकारी बना दिया है। इसका खुलासा उस समय हुआ जब आरोपी अधिकारी ने कथित शिकायकर्ता मफतलाल अग्रवाल को नोटिस भेजकर साक्ष्य मांगते हुए कार्यालय में तलब किया।
नोटिस प्राप्त होने और पत्र की सत्यता जानने के लिए मफतलाल अग्रवाल द्वारा एक्सईएन ब्रिजेश कुमार दीपक से फोन पर बात की तो एक्सईएन ने नोटिस भेजना स्वीकार करते हुए यह भी कहा कि मैं तुम्हारे खिलाफ झूठी शिकायत करने पर एफआईआर दर्ज कराने वाला था। जब उनसे पूछा गया कि आपको खुद की जांच करने के लिए जांच अधिकारी कैसे बना दिया गया है तो उन्होंने स्वयं को इससे अनभिज्ञ बताया। उच्च अधिकारियों की इस मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं कि जब शिकायतकर्ता ने स्वयं की जान को खतरा बताते हुए अपना नाम पता गोपनीय रखने की गुहार लगाई थी। इसके बाद भी आला अधिकारियों ने न सिर्फ आरोपी अधिकारी को ही जांच अधिकारी बनाया बल्कि शिकायती पत्र की काॅपी भी शिकायतकर्ता के नाम पते के साथ अधिकारी के पास भेज दी।
इस संबंध में विषबाण द्वारा मुख्य अभियंता आगरा योगेश पवार को 7599380121 पर फोन किया गया लेकिन उनसे वार्ता नहीं हो सकी। एक बार उन्होंने घंटी जाने के बाद भी फोन अटेंड नहीं किया। इसके बाद उनका फोन व्यस्त बताता रहा।