मंदिर मुखारबिंद घोटालाः कटघरे में मथुरा न्यायपालिका, हाईकोर्ट में हुई शिकायत

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मुकुट मुखारबिंद मंदिर

मथुरा। गोवर्धन के मुकुट मुखारबिंद मंदिर एवं हरगोविंद मंदिर के रिसीवर करोड़ों रूपए के घोटाले में फंस चुके हैं। उन पर मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। इसके बाद भी उन्हें अभी तक रिसीवर के पद से नहीं हटाया गया है। साथ ही रिसीवर के खिलाफ बीते कई वर्षों से घोटालों की जांच चलने और यह मामला न्यायालय में विचाराधीन होने के बाद भी उनका लगातार रिसीवर बने रहने की शिकायत भी शिकायतकर्ता संस्था द्वारा माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों से की गई है।
द इंपीरियल पब्लिक फाउंडेशन संस्था के अध्यक्ष रजत नारायण ने उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति, रजिस्ट्रार जनरल एवं जिला जज मथुरा को पत्र लिखकर शिकायत की है। शिकायत के अनुसार, गोवर्धन के मुकुट मुखारबिंद मंदिर एवं हर गोविंद मंदिर के रिसीवर रमाकांत गोस्वामी पर करोड़ों के घोटाले के आरोप सिद्ध हो चुके हैं। उनके खिलाफ एसआईटी द्वारा लखनऊ में 11 सितंबर 2020 को मुकदमा भी दर्ज कराया जा चुका है लेकिन अभी तक संबंधित न्यायालय द्वारा घोटालेबाज रमाकांत गोस्वामी को रिसीवर पद से नहीं हटाया गया है।

रिसीवर रमाकांत गोस्वामी

पत्र में कहा है कि जिला न्यायालय में ठा. गिर्राजजी एवं रामबाबू आदि मुकदमा संख्या 191/1985 में विचाराधीन है। इसमें रमाकांत गोस्वामी को वर्ष 2010 में 2 माह के लिए अस्थायी रूप से गोवर्धन के मुकुट मुखारबिंद मंदिर एवं हरगोविंद मंदिर का रिसीवर नियुक्त किया गया था। इन पर लगे आरोप के बाद न्यायालय द्वारा रिसीवर को मंदिर से संबंधित आय-व्यय का हिसाब एवं बिल बाउचर प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे लेकिन अभी तक यह आदेश पूरा नहीं हो सका है। गंभीर आरोप लगने के बाद भी मात्र 2 माह के लिए नियुक्त किए गए रिसीवर लगातार 10 वर्ष से रिसीवर हैं। इसे लेकर संस्था ने न्यायापालिका की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
आपको बता दें कि 5 जून 2018 को द इंपीरियल पब्लिक फाउंडेशन संस्था ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष रजत नारायण का कहना है कि उस वक्त डीएम ने कार्रवाई करने से हाथ खडे़ करते हुए कहा था कि वह सिर्फ जांच करा सकते हैं। इसमें कार्रवाई सिर्फ न्यायालय ही कर सकता है। उच्चस्तरीय अधिकारियों से शिकायतें होने के बाद डीएम द्वारा एसडीएम गोवर्धन से जांच कराई गई और 24 जुलाई 2019 को डीएम ने एसडीएम की जांच रिपोर्ट संबंधित कोर्ट में पेश कर दी। इसके बाद भी रिसीवर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
रिसीवर के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने पर संस्था द्वारा एनजीटी में शिकायत दर्ज की। एनजीटी के आदेश पर 25 जुलाई को एसआईटी को जांच करने के आदेश दिए। एसआईटी की जांच में करोड़ों के घोटाले के आरोप सही साबित होने के बाद भी आगे की कार्रवाई दबा दी गई। आरोप है कि जांच दबाने के नाम पर लाखों का लेनदेन हुआ था। लेकिन संस्था द्वारा अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी से 14 जुलाई 2020 को शिकायत की। इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए शासन से मिले निर्देश के बाद एसआईटी हरकत में आई और रिसीवर रमाकांत गोस्वामी सहित अन्य 12 लोगों के खिलाफ 11 सितंबर 2020 को लखनऊ में धारा 420, 408, 409, 423 एवं 120बी में मुकदमा दर्ज करा दिया है। एफआईआर दर्ज होने के 13 दिन बाद भी रिसीवर रमाकांत गोस्वामी आज भी रिसीवर पद पर कायम हैं। न्यायालय द्वारा घोटालेबाज रमाकांत गोस्वामी को अभी तक रिसीवर पद से नहीं हटाया गया है।
संस्था द इंपीरियल पब्लिक फाउंडेशन ने हाईकोर्ट के जज की निगरानी में इस मामले से जुडे़ हुए लोगों की जांच कराने की मांग की है। संस्था ने सवाल उठाए हैं कि आखिर 10 वर्षों से न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने के बाद भी रमाकांत गोस्वामी लगातार रिसीवर कैसे बने हुए हैं। उन्हें क्यों नहीं हटाया गया है।

संस्था के अध्यक्ष रजत नारायण ने “विषबाण” से बातचीत में कहा कि मात्र 2 माह के लिए बनाए गए रिसीवर रमाकांत गोस्वामी लगातार 10 वर्ष तक आखिर कैसे रिसीवर बने रह सकते हैं। जबकि उन पर करोड़ों रूपए के घोटाले के आरोप साबित हो चुके हैं। एसआईटी द्वारा मुकदमा भी दर्ज कराया जा चुका है। इसके बाद भी उन्हें न हटाया जाना दर्शाता है कि उन्हें बड़े प्रशासनिक अधिकारियों एवं राजनेताओं का वरद हस्त प्राप्त है लेकिन संस्था इस मामले में पीछे नहीं हटेगी। इस मामले में जो भी आरोपी हैं संस्था उनके खिलाफ लड़ती रहेगी। चाहे वह प्रशासनिक अधिकारी हों, राजनेता हों अथवा न्यायपालिका से जुड़े लोग हों। सरकार और हाईकोर्ट को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए।