घोटालों और विवादों का केंद्र बने ब्रज के प्रमुख मंदिर

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मथुरा। आस्था एवं धर्म की नगरी में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के चढ़ावे में मंदिर प्रबंधनों द्वारा किए जा रहे घोटालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंदिर मुकुट मुखारबिंद घोटाला सामने आने से पहले गोवर्धन के प्रमुख दानघाटी मंदिर में भी करोड़ों के घोटाले के आरोप में मंदिर के सहायक प्रबंधक जहां बीते करीब डेढ़ वर्ष से जेल की सींखचों में हैं। वहीं दूसरे अन्य मंदिरों में भी जांच की तलवार लटक रही है।
मथुरा धर्म नगरी की पहचान श्री बांके बिहारी मंदिर, श्रीकृष्ण जन्मभूमि, ठा. द्वारिकाधीश मंदिर, बरसाना स्थित राधारानी मंदिर, कोकिलावन शनिदेव मंदिर, बलदेव स्थित दाऊजी मंदिर के साथ ही गोवर्धन दानघाटी मंदिर, मुकुट मुखारबिंद मंदिर सहित अन्य धार्मिक मंदिरों की ख्याति देश विदेश में फैली हुई है। इसके चलते प्रतिवर्ष यहां करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और अरबों रूपए का चढ़ावा चढ़ाते हैं। इसके चलते सेवायतों के मध्य चढ़ावे की रकम को लेकर कानूनी जंग सड़क से लेकर न्यायालय तक छिड़ी हुई है। इसमें प्रमुख मंदिरों का विवाद निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट में चल रहे हैं। वहीं कई बार सेवायतों के मध्य खून खराबा भी होने के मामले सामने आते रहे हैं। इसके चलते न्यायालय और प्रशासन को मंदिर संचालन के लिए रिसीवरों की नियुक्ति भी करनी पड़ी है लेकिन करोड़ों-अरबों के चढ़ावे की रकम ने रिसीवरों की नीयत में भी खोट उत्पन्न कर दिया है और बड़े पैमाने पर घोटाले सामने आ रहे हैं।
इसमें गोवर्धन के प्रमुख दानघाटी मंदिर के चढ़ावे में वर्ष 2017-18 में ही लगभग 7 करोड़ की ठेके की रकम में हेराफेरी कर गबन किया गया। मंदिर के सेवायत रमाकांत कौशिक ने शासन से शिकायत कर आरोप घोटाले का आरोप लगाया। इसके बाद हुई जांच में मुकदमा दर्ज हुआ और मंदिर के सहायक प्रबंधक डालचंद चैधरी को मई 2019 में जेल भेज दिया गया। इसके बाद वह आज तक जेल में हैं।
सूत्र बताते हैं कि इसी तरह की शिकायतें जतीपुरा मुखारबिंद मंदिर में घोटाले के आरोप लगते रहे हैं। यहां समय-समय पर रिसीवर बदलते रहे हैं। दानघाटी और जतीपुरा का मामला अभी शांत भी नहीं हो पाया था तब तक मुकुट मुखारबिंद और हरगोविंद मंदिर के करोड़ों के चढ़ावे में हेराफेरी को लेकर मंदिर के रिसीवर रमाकांत गोस्वामी सहित एक दर्जन लोगों के खिलाफ धारा 408, 409, 420, 423, 120बी में एसआईटी ने लखनऊ में मुकदमा दर्ज कराया है।
रिसीवर रमाकांत गोस्वामी सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज होने के बाद अन्य मंदिरों के प्रबंध तंत्रों में हड़कंप मचा हुआ है। मंदिर एवं कुंडों का जीर्णोद्धार कराने एवं उनके विकास के नाम पर देश-विदेश से मिलने वाले निजी चंदे एवं सरकारी धन की बंदरबांट करने वाले तथाकथित एनजीओ संचालकों और गौशाला संचालकों में भी हड़कंप मचा हुआ है। तथा अपने को फंसता देखकर उनके निकटवर्ती लोग अन्य संचालकों के खिलाफ जांच कराने में जुट गए हैं।
इसी तरह कोकिलावन शनि देव मंदिर और बरसाना स्थित राधारानी मंदिर में भी भक्तों द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे की रकम को लेकर काफी विवाद रहा है। यहां तक कि बरसाना राधारानी मंदिर में तो सेवायतों ने ताला ही डाल दिया था। इससे दर्शन करने के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। स्थानीय नागरिकों की मानें तो मंदिर विवाद चरम सीमा पर है। अव्यवस्थाएं चरम पर हैं। न्यायालय द्वारा नियुक्त रिसीवर भी अव्यवस्थाओं को लेकर खामोश नजर आते हैं। भक्तों का कहना है कि यहां सेवा को लेकर भी सेवायतों में आपस में ही बीते करीब एक दशक से प्रत्येक वर्ष विवाद होते आ रहे हैं।