मंदिर घोटालाः बड़े नकाबपोशों पर भी कसेगा कानून का शिकंजा, डीआईजी एसआईटी को सौंपे अभिलेख

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मुकुट मुखारबिंद मंदिर

मथुरा। गोवर्धन स्थित मुकुट मुखारबिंद मंदिर के रिसीवर द्वारा किए गए करोड़ों के घोटाले में शिकायतकर्ता फाउंडेशन ने सोमवार को एसआईटी के डीआईजी से मुलाकात की। फाउंडेशन ने डीआईजी को घोटाले में शामिल अन्य बड़े नकाबपोशों के शामिल होने से संबंधित दस्तावेज भी सौंपे। डीआईजी ने फाउंडेशन को घोटालेबाजों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने का आश्वासन दिया है।
द इम्पीरियल पब्लिक फाउंडेशन ने गोवर्धन के मुकुट मुखारबिंद एवं हरगोविंद मंदिर के रिसीवर रमाकांत गोस्वामी सहित अन्य पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायतें दर्ज कराई थी। आरोपों के अनुसार, रमाकांत गोस्वामी ने फर्जी कंपनी बना कर मंदिर की धनराशि से विवादित जमीनें खरीदीं। जमीनों की खरीद फरोख्त में भारी गड़बड़ियां की गईं। इन गड़बड़ि़यों की शिकायत के आधार पर तत्कालीन एसडीएम गोवर्धन नागेंद्र सिंह ने जांच की और डीएम को सौंपी जांच रिपोर्ट में उक्त आरोपों को सही बताया। हालांकि राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासन इस रिपोर्ट को दबाए रहा। शिकायत कर्ता फाउंडेशन ने उच्चस्तरीय अधिकारियों से शिकायत की। उच्चस्तरीय दबाव के चलते शासन ने इस मामले की जांच एसआईटी को सौंप दी। एसआईटी की जांच में भी आरोप एकदम सही पाए गए। इसके बाद भी भाजपा नेताओं के दबाव में करीब डेढ़ वर्ष तक मामला लटका रहा। उधर दूसरी तरफ द इंपीरियल फाउंडेशन भी लगातार शासन में शिकायतें करती रही। इसके चलते एक बार फिर एसआईटी हरकत में आई और गत दिनों रिसीवर रमाकांत गोस्वामी सहित 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया।
द इंपीरियल पब्लिक फाउंडेशन के अध्यक्ष रजत नारायण ने विषबाण से वार्ता करने के दौरान बताया कि वह सोमवार को लखनऊ में एसआईटी के डीआईजी जे रविंद्र गौड़ से मिले और रिसीवर रमाकांत गोस्वामी के घोटालों के सम्बंधित सभी कागजात सौंपे। बताया कि 2010 से लेकर 2020 तक न्यायालय द्वारा कई बार आदेश देने के बाद भी आॅडिट रिपोर्ट दाखिल कर दी गई लेकिन खर्चे के बिल बाउचर आज तक प्रस्तुत नहीं किए गए। इससे न्याय से जुड़े लोगों की कार्यशैली से अवगत कराया गया। साथ ही अस्पताल के नाम पर खरीदी गई कृषि की जमीन में भी हेराफेरी की प्रमुख भूमिका निभाने वाले अधिकारियों तथा अन्य कई ठेकेदारों की भी इस घोटाले में महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में विस्तार से डीआईजी को अवगत कराते हुए कड़ी कार्यवाही की मांग की।
डीआईजी ने रजत नारायण को आश्वस्त किया कि रमाकांत गोस्वामी सहित अन्य आरोपी किसी भी तरह से नहीं बच सकेंगे, क्योंकि एसआईटी अब स्वयं इस केस में वादी है और एसआईटी का अभी तक की सभी एफआईआर में 100 प्रतिशत परिणाम आया है और दोषियों को सजा अवश्य हुई है। रमाकांत गोस्वामी सहित कोई भी आरोपी अब किसी भी तरह जेल जाने से नहीं बच सकते। रजत नारायण ने उन्हें ठेकेदारो के साथ मिलकर किये गए घोटालों के पूरे प्रकिया से अवगत कराया जिस पर डीआईजी गौड़ ने कहा कि सभी घोटाले करने के नाम भी शामिल किए जाएंगे।