मथुराः कान्हा की नगरी में सर्वाधिक कलुषित है कल-कल बहती कालिंदी

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मथुरा। ज्यों ज्यों दवा की, त्यों त्यों मर्ज बढ़ता गया। यह कहावत यमुना नदी में बढ़ते प्रदूषण पर सटीक साबित हो रही है। जहां एनजीटी एवं हाईकोर्ट के तमाम आदेशों के बाद भी यमुना में प्रदूषण के स्तर में कोई सुधार नहीं है। उत्तर प्रदेश की सीमा में दिल्ली बदरपुर बाॅर्डर से प्रयागराज तक कल-कल बह रही कालिंदी मथुरा में ही सबसे कलुषित है। उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की जनवरी से जुलाई तक की 20 सैंपलिंग प्वॉइंट की रिपोर्ट से यह स्थिति सामने आई है। यमुना में प्रदूषण के मामले में आगरा दूसरे नंबर पर है। यहां यमुना में सीधे गिरते नालों की वजह से टोटल कॉलिफार्म (मानव व जीव अवशिष्ट) की मात्रा बढ़ी हुई है।

मथुरा में सात स्थानों पर पानी की सैंपलिंग की जाती है। इसमें अपस्ट्रीम वृंदावन, केसी घाट वृंदावन, डाउनस्ट्रीम वृंदावन, अपस्ट्रीम मथुरा, शाहपुर मथुरा, विश्राम घाट मथुरा और डाउनस्ट्रीम मथुरा शामिल हैं। यूपीपीसीबी की वेबसाइट पर नोएडा से प्रयागराज तक 20 सैंपलिंग प्वॉइंट की जनवरी से जुलाई तक की माहवार और औसत के आधार पर रिपोर्ट जारी की गई है। औसत के आधार पर देखें तो मथुरा की डाउन स्ट्रीम में टोटल कॉलिफार्म की मात्रा 107287 मोस्ट प्रोबेबल नंबर प्रति 100 मिलीलिटर दर्ज की गई। वहीं आगरा में ताजमहल के डाउन स्ट्रीम में टोटल कॉलिफार्म की अधिकतम मात्रा 92286 मोस्ट प्रोबेबल नंबर प्रति 100 मिलीलिटर दर्ज की गई। नोएडा से लेकर प्रयागराज तक नदी के डाउन स्ट्रीम में टोटल कॉलिफार्म की मात्रा मथुरा में सर्वाधिक और उसके बाद आगरा में रही। मानक के अनुसार यह किसी भी दशा में पांच हजार मोस्ट प्रोबेबल नंबर प्रति 100 मिलीलिटर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

सर्वाधिक प्रदूषण के बाद भी पीठ थपथपा रहा है प्रदूषण नियंत्रण विभाग
सबसे बड़ी बात यह है कि जहां एक ओर यूपी पीसीबी की वेबसाइट पर मथुरा के आंकड़े यमुना को सबसे अधिक प्रदूषित दिखा रहे हैं, तो वहीं मथुरा में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कमान संभाल रहे क्षेत्रीय अधिकारी अरविंद कुमार अपना अलग ही राग अलाप रहे हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मथुरा के क्षेत्रीय अधिकारी अरविंद कुमार का कहना है कि लॉकडाउन में कोई फैक्ट्री या ऐसी इंडस्ट्री संचालित नहीं हुई, जिससे कि यमुना दूषित होने का सवाल हो। अरविंद कुमार ने कहा कि इस समय एयर क्वालिटी और वॉटर क्वालिटी अच्छी है और बारिश के कारण यमुना में पानी का फ्लो अधिक है। अरविंद कुमार ने कहा कि हम अपने प्वाइंटों पर वाटर सैंपलिंग करते हैं और इस समय वाटर सेंपलिंग में स्थिति अच्छी है। सबसे बड़ा सवाल ये उठता है जहां पर यूपीपीसीबी की वेबसाइट मथुरा में यमुना की स्थिति प्रदेश में सर्वाधिक प्रदूषित बताते हैं। वहीं उसी विभाग के अधिकारी सब कुछ बेहतर बता कर अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं।

वर्षों से जस के तस हैं हालात
अगर धरातल की बात करें तो यमुना किनारे आचमन के लिए आने वाले लोग भी यमुना की स्थिति को देखकर अब किनारा करने लगे हैं। यमुना का जल अब पहले जैसा नहीं रहा, अब श्रद्धालु भी आचमन नहीं कर पा रहे हैं। आज भी यमुना में फैक्ट्री इंडस्ट्री के गंदे पानी और शहर का गंदा पानी नालों के माध्यम से यमुना में गिर रहा है। लेकिन न्यायालय और एनजीटी में शपथ पत्र लगाने के बाद भी प्रशासन और संबंधित विभागों ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं की। कई बार इस मामले पर एनजीटी भी अपना सख्त रुख दिखा चुकी है लेकिन फिर भी मामले जस के तस बने हुए हैं।

एनजीटी तक में दाखिल किए गए गलत शपथ पत्र
यमुना प्रदूषण को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे मथुरा के ही गोपेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने विषबाण मीडिया को बताया कि कई बार गलत शपथ पत्र एनजीटी में लगाकर कहा गया है कि उन्होंने फैक्ट्रियां बंद कर दी, लेकिन अभी भी इनकी गंदगी यमुना में जा रही है। स्थानीय लोग भी यमुना की स्थिति से बेहतर वाकिफ हैं, लेकिन प्रशासन सब कुछ जान कर भी अंजान है और कोई भी इस पर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। आपको बता दें कि मैया यमुना को भगवान श्री कृष्ण की पटरानी कहा जाता है और यमुना महारानी का प्राकट्य भी मथुरा से है। इसके बाद भी कान्हा की ही नगरी में यमुना सबसे अधिक दूषित है और इसी यमुना पर राजनीति में बड़े-बड़े चुनाव लड़े जाते हैं लेकिन चुनाव जीतने के बाद यमुना की सुध लेने वाला कोई नहीं होता है।