मंदिर घोटालाः रमाकांत गोस्वामी पहुंचना चाहते थे संसद-विधानसभा, अब जाएंगे जेल

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मथुरा। काम, क्रोध, मद, लोभ से अपने भक्तों को दूर रहने का उपदेश देने वाले भागवताचार्य रमाकांत गोस्वामी धर्म की राह से लालच के दलदल में ऐसे फिसले कि पहले तो उन्होंने भाजपा दामन थामकर सांसद-विधायक बनने के लिए नेताओं की जय-जयकार की, लेकिन यहां सफलता नही मिली तो उन्होंने मंदिर के चढावे में ऐसा गोलमाल किया कि अब उनके कदम धर्म के मार्ग की जगह कानून की काल कोठरी की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।
वृंदावन से लेकर पूरे ब्रज में कथा, भागवताचार्य, संत, महंत, मठ, आश्रमों की संख्या हजारों में है। इनमें साध्वी ऋतंभरा, विजय कौशल महाराज, शंकराचार्य स्वरूपानंदनन्द सरस्वती, रमेश बाबा, गुरु शरणानंद आदि के विशाल आश्रम हैं। साथ ही श्रीजी बाबा भी ब्रज के प्रमुख संतों एवं भागवताचार्य में गिने जाते रहे हैं। इनकी ख्याति देश- विदेश तक फैली है। इन्होंने जनपद में अनेक विद्यालयों आदि के लिए जमीनें भी दान दी। कुछ समय पूर्व इनका निधन हो गया था। इनके दो पुत्र हैं जिनमें बडे पुत्र राधाकांत एवं छोटे रमाकांत गोस्वामी हैं। छोटे पुत्र रमाकांत गोस्वामी को श्रीजी बाबा के भाई राजा बाबा ने दत्तक पुत्र के रूप में गोद ले लिया।


दोनों ही भाईयों ने भागवत कथा के साथ-साथ धर्म का प्रचार-प्रसार कर पिता की विरासत को संभालना शुरू कर दिया। वर्ष 2010 में मुकुट मुखारबिंद मंदिर में हुए विवाद के चलते मथुरा न्यायालय ने रमाकांत गोस्वामी को रिसीवर नियुक्त करते हुए मंदिर की देखरेख की व्यवस्था सौंप दी। व्यवस्था मिलते ही मंदिर में आने वाले करोड़ों के चढ़ावे को देखकर गोस्वामी का मन विचलित हो उठा। मंदिर के चढ़ावे में गोलमाल के लिए एक फर्जी कंपनी बनाकर उसके माध्यम से मंदिर के नाम पर न सिर्फ लाखों की जमीन को करोड़ों खरीद लिया। वरन खास महल की जिस जमीन की बिक्री पर विवाद के चलते न्यायालय भरतपुर की तरफ से रोक लगी हुई है। उसका गैरकानूनी तरीके से बैनामा कराकर करोड़ों की रकम को ठिकाने लगा दिया। इसी तरह ठाकुरजी के फूल बंगला जो कि अधिकांश भक्तों द्वारा ही बनवाये जाते हैं। उन फूल बंगलों के नाम पर ही 5 करोड़ से अधिक का घोटाला किया गया। इसमें जिस फूल बंगले की कीमत 3500 रुपये फिक्स है। उसी फूल बंगले की लागत 70 हजार से लेकर 2.50 लाख का दर्शायी गई।
इसी तरह अन्य तरीकों से जब धर्म गुरू रमाकांत गोस्वामी पर नोटों की वर्षा होने लगी तो उन्होंने धर्म के साथ-साथ राजनीति में भी गोता लगाने का प्रयास करते हुए भाजपा का दामन थाम लिया। साथ ही वर्ष 2014 में मोदी के रथ पर सवार होकर मथुरा लोकसभा सीट से सांसद बनकर संसद भवन पहुंचने का प्रयास किया, लेकिन फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी के सामने उनकी दाल नहीं गली और उनके सांसद बनने के सपने साकार नही हो सके। रमाकांत गोस्वामी को काफी प्रयास के बाद भी टिकट नहीं मिल सकी। इसके बाद भी ‘हारिये ना हिम्मत बिसारिये ना राम‘ की पंक्तियों पर अमल करते हुए वर्ष 2017 में मथुरा-वृंदावन विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में मजबूत दावेदारी पेश की, लेकिन विरोधियों ने गोस्वामी के यूपी विधानसभा पहुंचने के सपनों को साकार नहीं होने दिया। इस बार श्रीकांत शर्मा की दावेदारी उनकी दावेदारी पर भारी पड़ी।


भक्तों को ‘ईश्वर के यहां देर है, अंधेर नही‘ का उपदेश देने वाले रमाकांत गोस्वामी ने एक बार फिर वर्ष 2019 में मथुरा लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में दमदारी के साथ अपनी दावेदारी प्रस्तुत की। चुनाव से पूर्व जहां आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी को अपने मंच पर बुलाकर जहां अपनी ताकत का प्रदर्शन किया। सूत्रों के अनुसार उस दौरान बरसाना आए भाजपा के एक वरिष्ठ केंद्रीय नेता को टिकट के लिए 1 करोड़ की अटैची भी देना का भी प्रयास किया गया। हालांकि वरिष्ठ नेता ने इस आॅफर को ठुकराते हुए धनराशि को पार्टी फंड में जमा करने की सलाह दे डाली। लेकिन लोकसभा की टिकट की गारंटी न मिलने पर धनराशि पार्टी फंड में नहीं दी गई। इसके बाद भी धर्म गुरू ने काफी प्रयास किए लेकिन इस बार भी ड्रीम गर्ल हेमामालिनी की दावेदारी के आगे इनकी एक न चली।
एक तरफ भागवताचार्य रमाकांत गोस्वामी संसद-विधानसभा पहुंचने के प्रयास में लगे हुए थे। दूसरी तरफ उनके प्रतिद्वंद्वी मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों की हेराफेरी के खेल में फंसाने में जुटे हुए थे। इसमें द इंपीरियल पब्लिक फाउंडेशन के अध्यक्ष रजतनारायण ने गंभीर आरोप लगाते हुए जिला प्रशासन मथुरा से जांच की मांग का पत्र प्रस्तुत कर दिया। इसमें एसडीएम गोवर्धन नागेंद्र कुमार सिंह ने जांच में आरोपों को सही मानते हुए अपनी जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी मथुरा को सौंप दी। काफी दिन तक यह पत्रावली धूल फांकती रही। इसके बाद दबाव के चलते यूपी सरकार द्वारा एसआईटी जांच बैठा दी गई। इसमें करीब डेढ़ साल की लंबी प्रक्रिया के बाद लखनऊ में एसआईटी द्वारा रमाकांत गोस्वामी सहित एक दर्जन लोगों के खिलाफ करोड़ों की धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज करा दी गयी। रमाकांत गोस्वामी संसद-विधानसभा भले ही न पहुंच सके, लेकिन अब गोस्वामी के लिए जेल के दरवाजे बेसब्री के साथ इंतजार कर रहे हैं। इससे बचने के लिए वह भाजपा-संघ हाई कमान से जुड़े नजदीकी लोगों से अपने बचाव के लिए संपर्क में लगे हुए हैं। अब देखना होगा कि सत्ता की नजदीकी का लाभ कितना मिलता है या फिर वह आने वाले दिनों मे जेल के अंदर अपने दिन गुजारने पर मजबूर होते हैं।