ट्रांसफर निरस्त होने के 8 माह बाद भी नहीं हट सका लिपिक, वेतन आहरण जारी

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मथुरा। जनपद के शिक्षा विभाग में अंधेर नगरी चैपट राजा वाली कहावत बिलकुल सटीक बैठती है। फिर चाहे वो बेसिक शिक्षा विभाग हो अथवा माध्यमिक शिक्षा विभाग। बेसिक शिक्षा विभाग में अधिकारी फर्जी शिक्षकों को बचाने के लिए हर जतन करते हैं। जबकि माध्यमिक शिक्षा विभाग में भी भ्रष्टाचार का बोलबाला है। ऐसा ही एक अन्य मामला सामने आया है। यहां पहले तो निवर्तमान डीआईओएस ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर एक लिपिक का स्थानांतरण कर दिया। फिर उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला आने के बाद ट्रांसफर निरस्त कर दिया। इस आदेश को करीब 8 माह बीत चुके हैं लेकिन अभी तक लिपिक स्थानांतरित हुए विद्यालय में ही कार्यरत है और उसी विद्यालय से वेतन भी प्राप्त कर रहा है। इस संबंध में कई शिकायतों के बाद भी अधिकारी संज्ञान नहीं ले रहे हैं।
जनपद के चैधरी चरण सिंह ब्रजखंड इंटर कालेज में कार्यरत लिपिक विष्णु कनौरिया का स्थानांतरण निवर्तमान डीआईओएस केपी सिंह यादव द्वारा महावन स्थित एचकेएस इंटर कालेज में अगस्त 2018 में कर दिया गया था। जबकि यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर था। इसकी शिकायत जब संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा से की गई तो अधिकारी ने इस संबंध में तत्कालीन डीआईओएस से आख्या मांगी। आख्या मांगने पर सकते में आए केपी सिंह यादव ने जनवरी 2020 में स्थानांतरण निरस्त करते हुए रिपोर्ट जेडी को सौंपी। जनवरी माह में ट्रांसफर को निरस्त तो कर दिया लेकिन विष्णु कनोरिया ने अपने पुराने विद्यालय में अब तक ज्वाइन नहीं किया है और फिलहाल महावन स्थानांतरित विद्यालय में ही काम कर रहे हैं। वहीं से वेतन भी आहरित हो रहा है। जबकि ट्रांसफर निरस्त होने के चलते यह नियमानुसार गलत है।
इस संबंध में डीआईओएस डाॅ. राजेंद्र सिंह से लेकर वित्त एवं लेखाधिकारी से भी शिकायत की जा चुकी है लेकिन अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हो सकी है। सूत्रों की मानें तो विभाग से जारी हुए स्थानांतरण निरस्तीकरण के पत्र भी मूल और स्थानांतरित विद्यालय में नहीं पहुंच सके हैं। उन्हें भी लिपिक द्वारा ही प्राप्त कर लिया गया। ताकि यह आदेश कालेज में न पहुंच सके और उसके वेतन आहरण में किसी भी प्रकार की दिक्कत न आए। निरस्तीकरण आदेश जारी होने के 8 माह बाद भी आदेश का पालन न होना और लगातार वेतन आहरित होना एक बड़े भ्रष्टाचार और अधिकारियों की सांठगांठ को दर्शा रहा है। प्रभारी डीआईओएस डाॅ. रनवीर सिंह ने बताया कि इस संबंध में शिकायत प्राप्त हो चुकी है। लिपिक का नए विद्यालय से वेतन रोकने और पुराने मूल विद्यालय में ही ज्वाइन करने संबंधी आदेश जारी किया जा रहा है। आगामी माह से उनका वेतन पुराने विद्यालय से ही जारी किया जाएगा।