आखिर ‘मीडिया गैंग‘ पर क्यों मेहरबान है मथुरा प्रशासन!

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मथुरा। जनपद में जहां अपराधी बेखौफ नजर आ रहे हैं। वहीं यमुना एक्सप्रेस वे एवं हाईवे पर मीडिया गैंग की सक्रियता राशन व्यापारी एवं अन्य बडे़ व्यापारियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। यह मीडिया गैंग हाईवे एवं एक्सप्रेस वे पर माल से लदे हुए वाहनों को रोक कर अवैध धन वसूली करता है। इनके पकड़े जाने के बाद भी जिला प्रशासन इन पर मेहरबान बना हुआ है। एफआईआर दर्ज होने के बाद भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। ऐसे में जिला प्रशासन की यह मेहरबानी आम जनता के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

मथुरा में मीडिया गैंग की वसूली की चर्चाएं बीते कुछ सालों में तेजी से बढ़ रही हैं। यह मीडिया गैंग राशन गल्ला संचालक, सट्टा किंग, जुआ किंग, नशे का व्यापार करने वालों से वसूली करता है। बड़े व्यापारियों से भी वसूली करने से बाज नहीं आता है। गैंग द्वारा हनी टैªप में फंसाकर ब्लैकमेलिंग के मामले भी सामने आए हैं। इस तरह के मामलों में लाखों रूपए के लेनदेन के मामले चर्चा का विषय बने रहे हैं। इसकी जानकारी जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों को होने के बाद भी ऐसे कथित पत्रकारों पर कोई कार्यवाही न होने मीडिया गैंग के हौसलों को बुलंद कर रहा है। जानकारी तो छोड़िए वसूली करने वाले पत्रकारों के खिलाफ मुकदमे तक दर्ज हुए हैं लेकिन फिर भी आज तक एक भी अवैध वसूली करने वाले पत्रकार पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

हाल ही में यमुना एक्सपे्रस वे पर मीडिया गैंग द्वारा एक राशन से लदे ट्रक को रोका गया। मामले को रफा-दफा करने के लिए लाखों रूपए की मांग की गई। सौदा नहीं पटा तो मामला पुलिस एवं प्रशासन के बड़े अधिकारियों तक पहुंचा। यहां तक कि मीडिया गैंग के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की नौबत आई। लेकिन इसी दौरान मीडिया गैंग का सरगना अपने पक्ष के पत्रकारों को बचाने के लिए सक्रिय हो गया और दूसरे पक्ष के पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का दबाव बनाने लगा। इसके चलते दूसरे पक्ष के पत्रकार सक्रिय हुए और उन्होंने भी ताल ठोंक दी कि यदि एफआईआर होगी तो सभी पत्रकारों के खिलाफ होगी अन्यथा किसी के खिलाफ नहीं होगी। दोनों पक्षों के मैदान में होने के चलते अधिकारियों को अपने कदम पीछे खींचने पड़े। जबकि अधिकारी भली भांति जानते थे कि मीडिया गैंग व्यापारियों से अवैध वसूली कर रहा है। इसके बाद भी अधिकारी किसी दबाव के चलते कार्यवाही करने में असफल रहे। साथ ही दबाव के चलते व्यापारी के खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर मामले को दबा दिया गया।

यह कोई पहला मामला नहीं है कि पुलिस-प्रशासनिक अधिकारी मीडिया गैंग के आगे बेबस नजर आए हों। इससे पहले भी ऐसे कारनामे होते रहे हैं। जिनमें मीडिया गैंग के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज हुई हैं लेकिन कड़ी कार्यवाही किसी भी कथित पत्रकार के खिलाफ नहीं हो सकी है। फिर चाहे वह डाॅ. मनीष बंसल को ब्लैकमेल करने का मामला हो अथवा थाना हाईवे में दुकानदार से चैथ वसूली के मामले में दर्ज मुकदमा हो, थाना महावन में चैथ वसूली का दर्ज मुकदमा हो, कई अन्य थानों में भी मीडिया गैंग के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई हैं।

सूत्रों के अनुसार लाॅकडाउन के दौरान चैक बाजार में एक पान मसाला व्यापारी के गुटखा बेचने पर पुलिस कार्यवाही से बचाने के लिए पत्रकारों के कथित मुखिया द्वारा करीब पांच लाख रूपए वसूली की गई। साथ ही चैक बाजार के ही एक सट्टा कारोबारी के परिवार के कोरोना पाॅजिटिव निकलने पर अन्य नजदीकी पांच प्रमुख व्यावसायियों को होम क्वारंटाइन कराने के नाम पर दस लाख रूपए की वसूली की गई। चर्चा यह भी है कि मीडिया गैंग के मुखिया द्वारा मीडिया के नाम अन्य व्यापारियों से भी करीब 50 लाख रूपए की वसूली की गई। सूत्र यह भी बताते हैं कि लाॅकडाउन के दौरान यह मीडिया गैंग हाईवे स्थित अलवर पुल पर एक माल से लदे ट्रक से करीब 8 लाख रूपए की वसूली करने में सफल रहे थे।

मीडिया गैंग के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने अथवा ब्लैकमेलिंग की जानकारी मिलने के बाद भी पुलिस अथवा प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कार्यवाही न करना आम लोगों में चर्चा का सबब बना हुआ है। एक मजे की बात यह भी है कि वसूली करने वाले मीडिया गैंग को ही सूचना विभाग ने असली पत्रकारों की सूची में शामिल किया है। जबकि धरातल पर काम कर रहे असल पत्रकारों को इस सूची से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इसकी भी शिकायत कुछ पत्रकारों द्वारा शासन के उच्चाधिकारियों से की गई थी लेकिन अभी तक शिकायत का निस्तारण नहीं हो सका है।