सूचना विभाग का खेलः बाबा-अपराधी, सरकारी कर्मचारी बना दिये पत्रकार

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कथा वाचक डाॅ. अनुरूद्ध शुक्ला उर्फ महाराज जी

मथुरा। ‘‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’’ वाली कहावत इस समय जिला सूचना कार्यालय एवं कथित मीडिया गैंग के गठजोड़ पर सटीक साबित हो रही है। जहां फर्जी, कुख्यात पत्रकारों के नाम पर असली पत्रकारों को फर्जी साबित करने की कोशिश की जा रही है। बलिक चौथवसूली, ब्लैकमेल, रंगदारी वसूलने वाले कथित पत्रकारों को असली पत्रकार घोषित किये जाने को लेकर मीडिया जगत में हड़कम्प मचा हुआ है। इसकी शिकायत उच्च स्तर पर किये जाने पर शासन ने जांच के आदेश दिये हैं।

गांव से लेकर शहर के गली मोहल्लों में कुकरमुत्तों की तरह घूमने वाले कथित पत्रकारों के आतंक चौथवसूली, ब्लैक मेलिंग, दलाली को लेकर पिछले दिनों बृजप्रेस क्लब अध्यक्ष कमलकान्त उपमन्यु द्वारा जिलाधिकारी, एसएसपी आदि को ज्ञापन दिया गया था जिसमें दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की गई थी। इस पत्र के बाद जिला सूचना कार्यालय द्वारा देहात से लेकर शहर के पत्रकारों की सूची तैयार की गई जिसमें करीब डेढ़ सौ पत्रकारों को शामिल किया गया। इस सूची को अधिकारिक रूप से तो जारी नहीं यिका गया लेकिन ये सोशल मीडिया पर जिलाधिकारी एवं जिला सूचना अधिकारी के पत्रों के साथ 6 प्रष्ट की सूची वायरल कर दी गई।

अगर इस सूची पर विश्वास किया जाये तो 6 पेज की इस सूची में मात्र एक पेज पर जिला सूचना अधिकारी की मौहर एवं हस्थाक्षर है। जबकि अन्य 5 पेज पर अस्थाई कर्मचारी जो कम्प्यूटर ऑपरेटर बताया जाता है के हस्थाक्षर दर्शाये गये हैं। इस सूची में खास बात तो यह है कि गैर मान्यता प्राप्त 21 पत्रकारों की सूची को जिला सूचना अधिकारी द्वारा प्रमाणित किया गया है। लेकिन 27 मान्यता प्राप्त पत्रकारों सहित 130 अन्य पत्रकारों की सूची पर अस्थाई कम्रचारी के हस्थाक्षर हैं। इस सूची के समबन्ध में ‘‘विषबाण’’ द्वारा जिला सूचना अधिकारी विनोद कुमार शर्मा से जानकारी की गई तो उन्होंने सूची को सही मानते हएु कहा कि ये सूची कोविड-19 के लिये बनाई गई थी। अब एक और सूची तेयार की जा रही है। इस सम्बन्ध में नगर मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने सूची के बारे में कोई जानकारी होने से इंकार कर दिया। जब इस सूची की जांच पड़ताल की गई तो इसमें चौकाने वाले खुलासे सामये आये जिसमे एक दर्जन से अधिक ऐसे कथित पत्रकारों के नाम शामिल कर दिये गये हैं। जिनके खिलाफ जनपद के थाना हाइवे, सदर बाजार, फरह, मथुरा कोतवाली, थाना महावन, नौहझील आदि थानों में बलात्कार, चौथ वसूली, ब्लैक मेलिंग, रंगदारी, शराब आदि से जुड़े संगीन अपराधों के मुकद्मे दर्ज हैं।

इस सूची में वृन्दावन निवासी कथावाचक अनिरूद्ध शुक्ला को मान्यता प्राप्त पत्रकार दर्शाया गया है। जबकि एक सरकारी कर्मचारी को भी पत्रकार की सूची में स्थान दिया गया है। इस सूची में सबसे खास बात तो ये है कि इसमें अंगूठा छाप हाॅकरों को पत्रकार दर्शा दिया गया है। जब कि शहर-देहात में 20 से 30 साल से लगातार पत्रकारिता कर वरिष्ठ पत्रकारों का नाम ही सूची से गायब है। बल्कि सूचना विभाग के खिलाफ शिकायत करने वाले श्रमजीवी पत्रकार यूनियन (आईजेयू) के जिलाध्यक्ष नरेन्द्र भारद्वाज का नाम भी सूची से गायब है। बल्कि दो दर्जन से अधिक उनके समर्थकों के नाम भी उड़ा दिये गये हैं। इस सूची को देखकर पाठक भी चौंक जायेंगे। इसमें ऐसे लोगों को भी शामिल कर दिया गया है जो पत्रकार की एबीसीडी भी लिखना नहीं जानते हैं। उन्हें मान्यता प्राप्त एवं गैर मान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में शालिम कर लिया गया है। जबकि शहर के जाने-माने पत्रकारों को सूची में स्थान ही नहीं दिया गया है।

इस सम्बन्ध में श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष नरेन्द्र भारद्वाज का कहना है कि जिला सूचना अधिकारी एवं अस्थाई कम्प्यूटर ऑपरेटर की मनमानी की शिकायत मुख्यमंत्री, सूचना जिलाधिकारी मथुरा को जांच के आदेश दिये हैं। वरिष्ठ पत्रकार योगेश खत्री का कहना है कि सूचना विभाग को जब ये ही जानकारी नहीं है कि कौन पत्रकारिता कर रहा है ओर कौन नहीं कर रहा तब वह सही सूचना केसे जारी कर सकता है। इस संबंध में मीडिया कानूनों के पत्रकारों एवं वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप राजपूत का कहान है कि सूचना विभाग को ये तय करने का अधिकार ही नही है। कि वह किसी पत्रकार को असली या फर्जी घोषित कर दे। अगर जारी करता है तो वह पूर्ण रूप से अवैद्य मानी जायेगी और उसे न्यायलय में चुनौती दी जा सकती है। खैर इस लड़ाई में जीत हार चाहे किसी की भी हो लेकिन सैकड़ों पत्रकारों एवं अनेक संगठन जिला प्रशासन एवं सूचना कार्यालय के खिलाफ मोर्चा खोलने की तैयारी में जुटे हैं जिससे अफसरों के लिये कभी भी सिर दर्द खड़ा हो सकता है।

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