असली पत्रकारों का कारनामा, ट्रक चालकों से मांगी 4 लाख की चौथ

0
1069

एक तरफ बृज प्रेस क्लब पत्रकारिता के नकाब में छिपे कुख्यात अपराधियों एवं फर्जी पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहा है वहीं दूसरी तरफ जिला सूचना कार्यालय द्वारा जारी की गई असली पत्रकारों की सूची में दर्शाये गये पत्रकारों का काला कारनामा एक बार फिर सोमवार की शाम नोएडा-आगरा यमुना एकसप्रेस-वे के राया कट पर सामने आया जब दो कारों में सवार आधा दर्जन करीब पत्रकारों आगरा से दिल्ली की तरफ जा रहे कैंटर एचआर 38 एकस 5407 एवं यूपी 85 बीटी 1945 का पीछा कर रोक जिसमें राशन का चावल बताते हुए कैंटर चालक से 4 लाख की मांग की गई। जिसमें काफी देर तक तड़क-भड़क होने के बाद कैंटर चालकों ने एक लाख की राशि देने पर अपनी सहमति दी लेकिन ये पत्रकार 4 लाख की चौथ पर अड़ गये। काफी हंगामे के बाद पत्रकारों ने पुलिस को फोन कर मौके पर बुला लिया ओर पुलिस दोनों कैंटरों को पुलिस चौकी ले गई। जहां आपूर्ति विभाग एवं मण्डी समिति अधिकारियों ने जांच पड़ताल के बाद कैंटरों को छोड़ दिया गया। जानकारी सूत्र बताते हें कि दोनेां कैंटरों में 740 बोरे थे। इस संबंध में आपूर्ति विभाग के एआरओ बहादुर सिंह ने बताया कि मांट पुलिस द्वारा पकड़े गये दोनों कैंटरों में चावल था जिनके कागजात द्वारिका प्रसाद दाल मील आगरा के नाम से थे। जांच पड़ताल में चावल के बोरे सरकारी नहीं पाये गये हैं। इस लिये उनके स्तर से कोई कार्यवाही नहीं की गई हैं।

सूचना विभाग का खेल: बाबा-अपराधी बना दिये पत्रकार

यमुना एक्सप्रेस वे मांट टोल चौकी प्रभारी ज्ञानेन्द्र सिंह ‘‘विषबाण’’ को बातया कि आपूर्ति विभाग की जांच के बाद दोनों कैंटरों को छोड़ दिया गया है। सूत्रों का कहना है माफिया और अपराधिक किस्म एवं चौथ वसूली में लिप्त पत्रकारों का जमघट जहां सूचना विभाग में लगा रहता है बल्कि उच्च अधिकारियों के साथ आये दिन फोटो खिंचाते नजर आते हैं। सबसे दिलचस्प बात तो ये राशन विक्रेताओं, दुकानदारों, चिकित्सक शिक्षक आदि से चौथ वसूली में विभिन्न थानों में नामजद पत्रकारों को जहां सूची में प्राथमिकता दी गई है वहीं पुराने एवं साफ छवि के वरिष्ठ पत्रकारों को जिला सूचना कार्यालय द्वसारा सूची से बाहर कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन एवं सूचना विभाग एलआईयू से कौन से पत्रकारों की ाजंच करा रहा है और वह किस प्राथमिकता दे रहे हैं। पत्रकारों के काले कारनामों पर कथित संगठन एवं प्रशासन क्यों खामोश है ये मीडिया जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।