कोरोना संकट: लॉक डाउन में आबादी के विस्फ़ोट को रोकने में जुटी हैं महिला कार्यकत्री

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मथुरा एक तरफ जहां कोरोना बीमारी का प्रकोप थमता नजर नही आ रहा है वहीं दूसरी तरफ लॉक डाउन के चलते अनचाहे गर्भ ठहरने और आबादी बढ़ने के नए विस्फोट की आशंका ने सरकार की नींद उड़ा रख दी है,जिसे रोकने के लिए महिला आशा कार्यकत्री गाँव- गाँव घर- घर जाकर महिला- पुरुषों को जाग्रत करने में लगी हैं।
एक तरफ जहां आज कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरा विश्व भयभीत है। वहीं दूसरी तरफ आंगनवाड़ी की हजारों कार्यकत्री कोरोना योद्धाओं के रूप में कोरोना बचाव के साथ- साथ गाँव- गाँव घर- घर कोरोना लॉक डाउन के चलते महिला- पुरुषों को अनचाहे गर्भ से बचने के लिए भी जन जागरण अभियान चला रही हैं।

कोरोना संकट से बचाव के लिए आशाएं लोगों को मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंस बनाए रखने के लिए तो जागरूक कर ही रही हैं, साथ ही लॉक डाउन के दौरान 24 घंटे घर में रह रहे पति-पत्नी के कारण अनचाहे गर्भ ठहरने की आशंका से स्वंय चिंतित हैं और महिलाओं को चुपके से सजग भी कर रही हैं। लॉक डाउन में बाजार बंद रहने से गर्भ निरोधक साधन कंडोम, अंतरा आदि की आ रही कमी को भी दूर कर रही हैं।

मथुरा जनपद में ग्रामीण क्षेत्र में 1530 और शहरी क्षेत्र में 114 आशा कार्य कर रही हैं। लगभग हर 20 आशाओं पर निगरानी के लिए कुल 74 आशा संगनी भी हमारे स्वास्थ्य के लिए दिन रात जुटी हैं। कोरोना से परे सामान्य दिनों में नसबंदी के लिए महिला व पुरुषों को प्रोत्साहित करने, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को टीका लगवाने, पोलियो ड्राप पिलाने, मिशन इंद्र धुनष, टीबी मुक्त भारत जैसे स्वास्थ विभाग के तमाम अभियानों में वे जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं। अपने क्षेत्र की हर गर्भवती महिला के बारे में जानकारी रखने, समय पर उन्हे आयरन की टेबटेल खिलाने, स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर प्रसव कराने, उनके बच्चों का टीकाकरण कराने का काम ये सभी आशा अपना धर्म समझती हैं। सत्यता तो यही है कि भारत सरकार के स्वास्थ्य मिशन को सफल बनाने में ये आशा पहली और सशक्त कड़ी साबित हो रही हैं।

मथुरा शहर से सटे गोविंदपुर गांव में कार्यरत आशा भारती पासवान पर मथुरा का स्वास्थ्य विभाग गर्व महसूस करता है। इस आशा ने अपने आसपास के मजदूर वर्ग में पुरुषों के बीच जाकर नसबंदी के लिए एक मुहिम चलायी। इस मुहिम का परिणाम यह रहा कि विगत वर्ष आशा भारती ने 35 पुरुषों की नसबंदी करवायी।

शा भारती के कारण ही पुरुष नसबंदी के मामले में मथुरा जनपद यूपी में टाप फाइव में आया। अब कोरोना के दौर में भी ये आशा संक्रमण रोकने के साथ-साथ नसंबदी के लिए महिला व पुरुषों को जागरूक करने में पीछे नहीं है। भरे बाजार में और पुरुषों के कार्यस्थल पर जाकर नसबंदी के पत्रक बांटने में भारती को जरा भी संकोच नहीं होता।

भारती पासवान ने टीसीआईएचसी- पीएसआई का मथुरा में काम देख रहे धमेन्द्र त्रिपाठी की प्रेरणा से उनके द्वारा उपलब्ध करायी परिवार नियोजन बास्केट आॅफ चॉइस किट भी अब तक सैकड़ों युवा दंपत्ति को बांटी है। इस किट के उपयोग से अनचाहा गर्भ ठहरने से रोकने में न जाने कितनी महिलाओं को मदद मिली है।

प्रशासन द्वारा कुछ लोगों को गोविंदपुर, सराय आजमाबाद के अलावा बाईपास एरिया में कुछ लोगों को घरों में कोरोन्टाइन किया हुआ है, वहां भी समय पर भारती पहुंच रही हैं। इस बीच महिलाओं से मिलतीं हैं और उन्हे अनचाहे गर्भ से सचेत भी कर रही हैं।

बातचीत में भारती पासवान कहती हैं कि मुझे स्वास्थ्य विभाग में मेहनत से काम करने की प्रेरणा राष्टÑीय स्वास्थ मिशन के जिला कार्यक्रम प्रबंधक संजय सिहोरिया, जिला कम्यूनिटी प्रोसेसिंग मैनेजर पारुल शर्मा, सुश्री फौजिया के साथ- साथ टीसीआईएचसी- पीएसआई के धर्मेद्र त्रिपाठी ने दी है।

मथुरा में कई सफल आशाओं की कहानी

आशाओं में राजश्री परिहार आजकल शंकरपुरी और शिवजी का नगला में कोरोना के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं व परिवार नियोजन बास्केट आॅफ चॉइस किट बांट रही हैं वहीं बाल्मीकि बस्ती एरिया में आशा श्रीमती माया देवी अच्छा काम कर रही हैं। झींगुरपुरा में श्रीमती दिव्या सैनी, सुखदेव नगर में आशा श्रीमती मंजू सैनी, महेन्द्र नगर में आशा श्रीमती अफसाना भी युवा दंपत्ति को बास्केट आॅफ चॉइस किट देकर सीमित परिवार का महत्व समझा चुकी हैं। इन सभी ने भी कोरोना के साथ नसंबदी, टीकाकरण में अग्रणी भूमिका निभाई है।

हर आशा के लिए अप्रवासी मजदूर बने चुनौती..

कोरोना संक्रमण के दौर में बड़ी संख्या में मजदूर घर वापस आ रहे हैं। इनसे कोराना संक्रमण के प्रसार को रोकने की भी चुनौती सरकार के सामने है। ऐसे में मथुरा में कार्यरत कुल 1644 आशाा व 74 आशा संगनी संक्रमण रोकने को जुटायी गयी हैं। इस तरह जिले भर की आशा दीदी अपने मूल कार्यों के साथ कोविड-19 से बचाव के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं।