पत्रकारों के चक्रव्यूह में प्रशासन, ’’मीडिया गैंग’’ में हड़कम्प

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मथुरा। कोरोना लाॅकडाउन के बीच जहां आम जन जीवन अस्त-व्यस्त है वहीं दूसरी तरफ कथित पत्रकारों एवं मीडिया गैंगों का आतंक बुलन्दियों पर है, जबकि मीडिया संगठनों में भी वर्चस्व को लेकर जबरदस्त जंग छिड़ी हुई है। जिसे लेकर अलग-अलग गुटों ने डीएम-एसएसपी सहित मुख्यमंत्री से सूचना विभाग की कार्य शैली एवं कथित पत्रकारों की जांच करा कर सख्त कार्यवाही की मांग की गई है। इस मामले में एक गुट ने कैबिनेट मंत्री से शिकायत कर सूचना विभाग की कार्य शैली पर भी प्रश्न चिन्ह लगाते हुए दोषियों को तत्काल हटाने की भी मांग की गई है। जब कि एक अन्य भृस्टाचार विरोधी संग़ठन ने मीडिया गैंग और उच्च अधिकारियों के गठजोड़ से काले कारनामों को अंजाम दिये जाने की शिकायत मुख्यमंत्री सहित उच्च अधिकारियों से की गई है ,जिससे सूचना विभाग सहित प्रशासन में हडकम्प मचा हुआ है।

जनपद में कोरोना लाॅकडाउन के बीच कथित पत्रकारों के दर्जनों मामले चौथ वसूली, ब्लैक मेलिंग के सामने आये हैं जिनके आॅडियो-वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। एक तरफ कथित पत्रकारों के कारनामे सामने आ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ पत्रकारों के संगठनों में जबरदस्त वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है। कहने को तो जनपद में पत्रकारों और उनके संगठनों के बीच वर्चस्व की जंग काफी वर्षों से चली आ रही है लेकिन पिछले कुछ महीनों से इसकी चपेट में जिला सूचना कार्यालय के साथ वरिष्ठ अधिकारी एवं पत्रकार भी आ गये हैं।

एक वर्ष पूर्व शुरू हुए विवाद में तत्कालीन जिला सूचना अधिकारी सुरजीत सिंह से पत्रकारों की मान्यता को लेकर बृज प्रेस क्लब के अध्यक्ष का विवाद होने पर थाना सदर बाजार में अध्यक्ष के खिलाफ सरकारी कार्य में मुकदमा दर्ज होने के बाद जिला सूचना अधिकारी का तबादला बुलन्दशहर कर दिया गया था।

नवागत जिला सूचना अधिकारी के आने के बाद फिर पत्रकारों के बीच मतभेद उत्पन्न होना शुरू हो हुए जिसमें रिफायनरी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में एक गुट के खास पत्रकारों को आमंन्त्रित करते हुए सूचना विभाग ने दूसरे गुट के पत्रकारेां को दर किनार कर दिया था,जिससे पत्रकारों असन्तोष उत्पन्न हो गया। इसी तरह वर्तमान जिलाधिकारी द्वारा कुछ माह पूर्व खास पत्रकारों को एक होटल में सहभोज के लिये आमन्त्रित किया गया। जिसमें 30 पत्रकारों की लिस्ट बनाई गई थी। लेकिन इसमें भी पत्रकारों की सूची को लेकर हंगामा होने पर जिलाधिकारी को सहभोज के कार्यक्रम को निरस्त करना पड़ा था। पिछले महीने लाॅकडाउन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की आॅनलाइन प्रेस काम्फ्रेंस को लेकर भी विवाद गहरा गया था। जिसमें 10 पत्रकारों की सूची शासन को भेजी गई थी। लेकिन प्रेस काॅम्फ्रेंस में 15 पत्रकारों को शामिल कर लिया गया था। इस सूची में कुछ प्रमुख समाचार पत्रों के साथ इलैक्ट्रोनिक मीडिया के पत्रकारों को तो बुलाया ही गया था बल्कि कुछ नये पत्रकारों को भी इसमें स्थान दिया गया था। लेकिन देश की प्रमुख समाचार एजेंसियों एवं मान्यता प्राप्त सबसे वरिष्ठ पत्रकारों को आमंत्रित ना किये जाने पर पत्रकारों के बीच असन्तोष व्याप्त हो गया। इसकी गूंज मथुरा से लेकर लखनऊ तक हुई।लेकिन अफसरों ने इसकी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते हुए पल्ला झाड़ लिया।

पत्रकारों की कार्यशैली से आम आदमी, व्यापारी, राशन विक्रेता, चिकित्सक आदि ही त्रस्त हों ऐसा नहीं है बल्कि अनेक बार पुलिस-प्रशासन सूचना विभाग भी इनसे बुरी तरह आहत हुआ है। सूत्र बताते हैं कि पत्रकारों के लिये तत्कालीन एसएसपी द्वारा सूचना उपलब्ध कराने के लिये व्हाटसअप ग्रुप बनाया गया था जिसे पत्रकारों की हरकतों को देखते हुए ब्लाॅक करना पड़ा, इसी तरह जिला सूचना कार्यालय द्वारा बनाये गये ग्रुप को पहले तो बन्द किया गया बाद में उसे पुनः चालू कर पत्रकारों की पोस्ट कमेंट पर ही रोक लगा दी गई। इसके बाद पत्रकारों का एक निजी ग्रुप बनाया गया जिसमें आपत्ति जनक पोस्ट, कमेंट के चलते अनेक पत्रकार बाहर हो गये या कर दिये गए। सूत्र बताते हैं कि पीडब्लूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों के जमावाड़े एवं कार्यशैली को देखते हुए प्रशासन ने प्रवेश पर ही रोक लगा दी है। जिससे पत्रकारेां में हड़कम्प मचा हुआ है।

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पत्रकारों के बीच उठी चिंगारी ने जिला सूचना कार्यालय को भी अपनी चपेट में ले लिया है। जिसमें पिछले दिनों उ.प्र. श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष नरेन्द्र भारद्वाज के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पत्रकारों ने प्रदेश सरकार के केबिनेट मंत्री चै. लक्ष्मी नारायण से मुलाकात कर अपर जिला सूचना अधिकारी एवं सविंदा कर्मी पर मनमानी एवं पत्रकारों के साथ अभद्रता कर आरोप लगाते हुए कार्यवाही की मांग की गई। जिसमें केबिनेट मंत्री ने पत्रकारों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी से वार्ता कर उचित कार्यवाही के लिये कहा गया। इसी तरह कुछ पत्रकारों द्वारा एक भृष्टाचार विरोधी संग़ठन के माध्यम से मीडिया गैंग और उच्च अधिकारियों के गठजोड़ से काले कारनामों को अंजाम देने की शिकायत मुख्यमंत्री सहित उच्च अधिकारियों से की गई है इस शिकायत और मीडिया गैंग के कारनामों का ’विषबाण’ द्वारा खुलासा किये जाने के बाद मचे हड़कम्प के चलते डीएम-एसएसपी को ज्ञापन देकर कथित फर्जी पत्रकारों के खिलाफ कार्यवाही की मांग को भी 15 लाख की चौथ वसूली के मामले के खुलासे एवं कोरोना लॉक डाउन नाम पर मीडिया गैंगों द्वारा की गई चौथवसूली पर पर्दा डालने से जोड़कर देखा जा रहा है। अब देखना होगा कि मीडिया गैंग, फर्जी पत्रकारों पर उचित कार्यवाही होती है या फिर मीडिया गैंग के सरगनाओं को बचाने की साजिश रची जा रही है।

वहीं दूसरी तरफ ताजा मामला कोरोना संकट के कारण मथुरा में जागरण के पूर्व जिला प्रभारी एवं वर्तमान में आगरा में तैनात वरिष्ठ पत्रकार पंकज कुलश्रेष्ठ की मौत के मामले में भी पत्रकार संगठनों के बीच लाशों पर राजनीति होती नजर आ रही है। एक तरफ उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष कमलकान्त उपमन्यु द्वारा सोशल मीडिया पर 10 लाख रुपये का अनुदान देने की पोस्ट वायरल की गई है। जबकि दूसरी तरफ जिला सूचना अधिकारी आगरा के हवाले से श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष नरेन्द्र भारद्वाज ने बताया कि अभी तक कोई राहत राशि यूपी सरकार द्वारा अभी तक जारी नहीं की गई है। इस मामले में उनके संगठन द्वारा भी मृतक पंकज कुलश्रैष्ठ के परिवार को राहत राशि के लिये मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री सहित उच्च अधिकारियों को पत्र लिखे गये थे।

सूत्रों का कहना है कि अगर सरकार उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराये तो कई नकाबपोस पत्रकारों के काले कारनामे सामने आकर जेल के सीखचों के अन्दर जा सकते हैं। जो कि पत्रकारिता का नकाब पहनकर काले कारनामों को अंजाम दे रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय सहित उच्च अधिकारियों से की गई शिकायतों की जांच कोरोना के लॉक डाउन में फंसकर रह गई हैं,वह जांच कब होंगी कौन करेगा,उनका अंजाम क्या होगा ये तो वक्त तय करेगा,लेकिन इस वक्त पत्रकारों की जंग सूचना विभाग,एवं वरिष्ठ अफसरों के लिए जी का जंजाल बनती जा रही है वहीं दूसरी तरफ पत्रकार जगत में ’उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत भी सटीक चरितार्थ हो रही है।

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