मोहब्बत हो तो हीर-रांझा जैसी, जिसने लिखी अमर कहानी

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‘‘प्यार किया तो डरना क्या’’ आज के युवाओं की जुबान पर छाया हुआ है लेकिन क्या आज कल युवक-युवतियों सच्चा प्यार होता है या फिर जवानी के जोश में वह रास्ता भटक जाते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप परिवार के विरोध के चलते या तो वह घर से भागने पर मजबूर होते हैं या फिर वह आत्महत्या-हत्या के शिकार हो जाते हैं। जिससे उनका प्यार सदैव के लिए खामोश हो जाता है बल्कि दो परिवारों के मध्य खूनी जंग का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। लेकिन कहते हैं कि सच्चा प्यार, प्यार ही होता जो प्यार को शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता और ना ही इसकी कोई परिभाषा है। इसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है। ये तो एक ऐसा खूबसूरत एहसास है जो दो लोगो को बहुत गहराई से आपस में जोड़ता है। ये एक ऐसा बंधन है जो दो लोगों को रूह की गहराई से बांध देता है। प्यार आसानी से किसी से हो तो सकता है पर आसानी से ख़त्म नहीं हो सकता। प्यार को सिर्फ वो महसूस कर सकता है जो सच में किसी से सच्चा प्यार करता है। ऐसे दुनिया मे कई प्यार के किससे और कहानी जो हमे प्रमाणित करते हैं की सच्चा प्यार ना कभी हारता हैं ना कभी झुकता हैं वो हमेशा अमर रहता हैं चाहे दुनिया कितनो जालिम हो जाए. आख़िर मे जीत प्यार की ही होती हैं।

ऐसे ही एक प्यार की सच्ची कहानी हीर-रांझा की हैं जिसने प्यार की ऐसी अमिट छाप छोड़ी जिसे दुनिया आज भी याद करता हैं। उनका प्यार अमर हैं। आइए जाने हीर-रांझा की सच्ची प्रेम कहानी ..

चेनाब नदी के किनारे एक खूबसूरत जगह है- तख़्त हजारा। यहाँ बहने वाले दरिया की लहरें और बगीचे की खुशबू की वजह से इसे पूरब का स्वर्ग कहा जाता है। यही रांझाओं की धरती है जो मस्ती से यहाँ रहते हैं। इस बस्ती के नौजवान खूबसूरत और बेपरवाह किस्म के हैं। वे कानों में बालियाँ पहनते हैं और कंधे पर नए शॉल रखते हैं। उनको अपनी खूबसूरती पर गर्व है और सभी इसमें एक-दूसरे को मात देते दिखते हैं। इसी बस्ती का मुखिया था जमींदार मौजू चौधरी। वह आठ बेटे और दो बेटियों का बाप था। वह बहुत धनी और खुशहाल था और कुनबे में सभी उसका सम्मान करते थे। सभी बेटों में वह रांझा को सबसे ज़्यादा प्यार करता था। इस कारण रांझा के बाकी भाई उससे बहुत जलते थे।उनके पिता के मरने के बाद ही उन्होंने राँझा को बात बात पर ताने मारने शुरू कर दिए और धोखे से ज़मीन की हिस्सेदारी में सारी अच्छी ज़मीन अपने पास रख ली और रांझे के हिस्से में बंजर ज़मीन दे दी. इसी  बात से दुखी होकर राँझा ने अपना घर छोड़ दिया और इधर उधर भटकने लगा.

रांझा को बचपन में ही खूबसूरती से इश्क था। उसने अपने लिए सपनों में ही एक हसीना की तस्वीर गढ़ ली थी।  और अपने सपनों की शहजादी के बारे में सोचा करता था। एक दिन वह किसी पेड़ के नीच विश्राम कर रहा था। तभी एक पीर वहां से गुज़रा और उस पीर ने उससे पूछा-तुम इतने दुःखी क्यों हो? तब रांझा ने पीर को अपने द्वारा रचित प्रेम गीत सुनाए, जिसमें सपनों की शहजादी का उल्लेख था। पीर ने बताया कि तुम्हारे सपनों की शहजादी हीर के अलावा और कोई नहीं हो सकती। यह सुन रांझा अपनी हीर की तलाश में निकल पड़ा।

हीर के पिता एक बहुत बड़े सौदागर थे और हीर एक बाग़ में  रोजाना अपनी सखियों के साथ खेलने जाती थी। हीर बहुत सख्त दिमाग वाली लड़की थी। एक रात रांझा गलती से हीर की नाव में सो गया। राँझा को अपनी नांव में सोते हुए देखकर हीर आगबबूला हो उठीऔर उसे जगाने की कोशिश करने लगी,राँझा बहुत ही गहरी नींद में सो रहा था। अचानक से हीर  की आवाज़ सुनकर राँझा उठा और हीर से अपनी गलती की माफ़ी मांगी लेकिन जैसे ही हीर ने जवाँ मर्द रांझे को देखा, वह अपना गुस्सा भूल गई और रांझा को देखती ही रह गई। राँझा ने जब हीर का परिचय पूछा और हीर ने अपना नाम बताया तब रांझा ने उसे अपने सपनों की बात कही। रांझे पर फिदा हीर उसे अपने घर ले गई और अपने यहाँ नौकरी पर रखवा दिया। अब राँझा रोजाना हीर के पिता के यहाँ पर उसकी भैंस चराता था

धीरे धीरे हीर-रांझा की मुलाकातें मोहब्बत में बदल गई,लेकिन एक दिन हीर के चाचा को इसकी भनक लग गई और हीर की शादी दूसरे गाँव कर दी गई। और हीर के प्यार में राँझा दुनिया की सब मोहमाया छोड़ कर एक फ़कीर  बन गया
रांझा फकीर बनकर गाँव-गाँव घूमने लगा। जब वह हीर के गाँव में पहुँचा तो उसकी आवाज सुनकर हीर बाहर आई और उसे भिक्षा देने लगी। दोनों एक-दूसरे को फिर से देखते रह गए। अब रांझा रोजाना फकीर बनकर आता और हीर उसे भिक्षा देने। दोनों रोजाना मिलने लगे। एक दिन यह सब हीर की भाभी ने देख लिया। उसने हीर को टोका तो रांझा गाँव के बाहर चला गया। इसी बीच वह उसी वेश में एक पेड़ के नीचे विश्राम करने लगा और कुछ दिन तक उसने कुछ भी नही खाया पीया। गांव के सारे लोग उसे फकीर मानकर पूजने लगे। और धीरे धीरे उसकी जुदाई में हीर बीमार हो गई। जब वैद्य हकीमों से उसका इलाज न हुआ तो कुछ लोगों ने उन्हें उस फ़कीर के पास जाने की सलाह दी। हीर के ससुर ने फकीर के पास जाकर उसकी मदद माँगी। फकीर हीर के घर चला आया। जैसे ही उसने हीर के सिर पर हाथ रखा तो हीर की चेतना लौट आई। कुछ दिनों बाद जब लोगों को पता चला कि वह फकीर रांझा है तो उन्होंने रांझा को पीटकर गाँव से बाहर धकेल दिया। एक दिन उस राज्य का राजा किसी चोर को पकड़ने में लगा हुआ था जिसने पुरे राज्य में उत्पात मचा रखा था और जब उसने राँझा को उस वेश में देखा तो उसने उसे ही चोर समझा और राजा ने उसे चोर समझकर पकड़ लिया। राजा के पूछने पर राँझा ने राजा को पूरी सच्चाई बता दी। रांझा ने जब राजा को हकीकत बताई तो उसने हीर के पिता को आदेश दिया कि वह हीर की शादी रांझा से कर दे। राजा की आज्ञा के डर से उसके पिता ने मंजूरी तो दे दी,  शादी के दिन हीर के चाचा कैदो ने उसके खाने में जहर मिला दिया ताकि यह शादी रुक जाये। यह सूचना जैसे ही राँझा को मिली, वह दौड़ता हुआ हीर के पास पहुंचा लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। हीर ने वह खाना खा लिया था जिसमें जहर मिला था और उसकी मृत्यु हो गयी। रांझा अपने प्यार की मौत के दुःख को झेल नहीं पाया और उसने भी वही जहर वाला खाना खा लिया और हीर के समीप उसकी मृत्यु हो गई। हीर और राँझा को उनके पैतृक गाँव झंग में दफना दिया गया, लेकिन उनकी मोहब्बत आज भी जिंदा है।
ऐसा माना जाता है कि हीर राँझा Heer Ranjha की कहानी का सुखद अंत था लेकिन वारिस शाह ने अपनी कहानी में दुखद अंत बताया था | वारिस शाह ने स्थानीय लोकगीतों और पंजाब के लोगो से हीर रांझा की प्रेम कहानी के बारे में पता कर कविता लिखी थी जिसे ही सभी लोग अनुसरण करते है | उसके अनुसार ये घटना आज से 200 साल पहले वास्तविकता में घटित हुयी थी जब पंजाब पर लोदी बश का शाषन था |
इस कहानी से प्रेरित होकर भारत और पाकिस्तान में कई फिल्मे बनी क्योंकि इस घटना के वक़्त भारत-पाकिस्तान विभाजन नही हुआ था | विभाजन से पहले “हीर रांझा” Heer Ranjha नाम से 1928 , 1929 , 1931 और 1948 में कुल चार फिल्मे बनी हालांकि ये चारो फिल्मे उतनी सफल नही रही | विभाजन के बाद पहली बार 1971 में “हीर रांझा ”  Heer Ranjha फिल्म भारत में बनी जिसमे राजकुमार और प्रिया राजवंश मुख्य कलाकार थे और ये फिल्म काफी सफल रही | इसके बाद 2009 में “हीर रांझा ” फिल्म पंजाबी में बनी जिसमे गुरदास मान मुख्य अभिनेता थे | पाकिस्तान में 1970 में हीर रांझा Heer Ranjha फिल्म बनी थी और 2013 में हीर रांझा Heer Ranjhaधारावाहिक पाकिस्तानी चैनल PTV पर प्रसारित होता था |