कोरोना का खेल: सराफा एवं गुटखा कारोबारियों से “मीडिया किंग” ने वसूले 15 लाख

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मथुरा। कोरोना वायरस का आतंक अफसरों और दलालों के लिये किस तरह वरदान साबित हो रहा है इसके दो मामले शहर में जबरदस्त चर्चा का विषय बने हुए हैं। जिसमें कोरोना पाॅजिटिव पाये गये प्रमुख व्यवसाई एवं सट्टा कारोबारी से नजदीकी रखने वाले 5 प्रमुख सर्राफा व्यवसाईयों से क्वांरटाइन सेंटर भेजे जाने से बचाने के नाम पर 10 लाख एवं पान मसाला-गुटखा कारोबारी से 5 लाख की राशि कथित मीडिया किंग द्वारा व्यापारी नेताओं के माध्यम से वसूले जाने का खेल सामने आया है।

जैसे-जैसे लाॅकडाउन बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे पुलिस-प्रशासन-मीडिया गंैग एवं दलालों के गठजोड़ के खेल सामने आते जा रहे हैं। बताते हैं कि पिछले दिनों शहर के प्रमुख सट्टा कारोबारी एवं सर्राफा व्यवसाई सहित उसके 5 परिजनों की कोरोना पाॅजिटिव रिपोर्ट आने के बाद क्वारंटाइन सेन्टर भेज दिया गया था। इसके बाद एक तथाकथित व्यापारी नेता ने पर्दे के पीछे से मीडिया के खास लोगों को आगे करके सट्टा कारोबारी से नजदीकी रखने वाले मण्डी रामदास, चौक बाजार, कच्ची सड़क क्षेत्र के 5 प्रमुख सर्राफा कारोबारियों की रिपोर्ट चौक कराने के नाम पर उठवाकर जिला चिकित्सालय तक ले जाया गया और सैम्पल लेकर क्वारंटाइन सेन्टर भेजने की व्यवस्था की जाने लगी।

सूत्र बताते हैं कि क्वारंटाइन सेन्टर से बचाने के लिये व्यापारी नेता द्वारा ‘‘मीडिया किंग’’ का सहारा लिया गया और फिर पांचों सर्राफा कारोबारियों से दो-दो लाख की राशि वसूल कर उन्हें घर पर क्वारंटाइन होने की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसका खुलासा सत्यमेव जयते नामक फेसबुक आईडी से कमेंट में किया गया कि कुकर्मी-बलात्कारी पत्रकार द्वारा प्रमुख सर्राफा व्यवसाई से कोरोना के नाम पर 10 लाख की राशि एवं रजनीगंधा पान मसाला के कारोबारी से 5 लाख की राशि वसूली गई है। इन दो कमेन्टों का सच ‘‘विषबाण’’ की टीम ने खंगालना शुरू किया तो उसकी पर्तें खुलना शुरू हो गईं। जिसमें 10 लाख की राशि देने वाले पांचों सर्राफा कारोबारी अग्रवाल समाज से जुड़े हुए हैं बल्कि पान मसाला कारोबारी भी अग्रवाल समाज से जुड़ा हुआ है। जबकि एक व्यापारी नेता एवं उसके साले द्वारा दोनों मामलों में बिचौलिये की भूमिका निभाते हुए उच्च अधिकारियों के इर्द-गिर्द मड़राने वाले ‘‘मीडिया किंग’’ को 15 लाख की राशि अफसरों के नाम पर दिलाई गई। जिससे दोनों मामलों पर पर्दा डाला गया।

इस जांच पड़ताल में सामने आया कि जिस सट्टा किंग एवं उसके परिजनों को आइसोलेट किया गया उसके द्वारा कुछ वर्ष पूर्व दो हजार वर्ग गज विवादास्पद जमीन को कैड़ियों के भाव खरीदा गया था जो अब करीब 10 करोड़ की बताई जाती है। जिसके कारण कथित व्यापारी नेता सहित अन्य लोग सट्टा कारोबारी की छवि को धूमिल कर उसके साथ-साथ नजदीकी लोगों की छवि कोरोना के माध्यम से धूमिल करने के साथ-साथ मिलकर चलने का दबाव बनाने में लगे हुए थे। जिसमें सट्टा कारोबारी के नजदीकियों (जिनकी संख्या करीब 80 के आसपास बताई जाती है) में कोरोना/क्वारंटाइन होने की दहशत पैदा कर उन्हें बचाने के नाम पर कथित व्यापारी नेताओं द्वारा पुलिस-प्रशासन के नाम पर 25 हजार से लेकर एक लाख तक की राशि वसूली गई।

‘‘विषबाण’’ की टीम ने अनेक माध्यम से तथ्य जुटाने का प्रयास किया लेकिन कोई भी व्यापारी ना तो अपना मुंह खोलने को तैयार हुआ और न ही आरोपों को निराधार बताया। इस मामले में क्वारंटाइन के नाम पर मोटे लेन-देन की पुष्टि एक भरोसेमन्द सूत्र ने तो की लेकिन राशि एवं लेन-देन का खुलासा करने से हाथ खड़े कर दिये। इसी तरह एक अन्य सर्राफा व्यवसाई के नजदीकी रिस्तेदार से सम्पर्क किया गया तो उसने भी रिस्तेदारों से रकम जाना तो बताया लेकिन कितनी राशि गई उसका खुलासा नहीं किया गया। ‘‘विषबाण’’ द्वारा जिस आईडी से कमेंट आया उसे मैसेज से सम्पर्क किया गया तो उसने व्हाट्सएप पर जिन व्यापारियों से 15 लाख की वसूली की गई उनके नामों का तो खुलासा कर दिया लेकिन अफसरों के नाम पर 15 लाख की राशि लेने वाले पत्रकार के नाम का भी खुलासा नहीं कर सका। हालांकि कथित व्यापारी नेता एवं उसके नजदीकी के नामों का खुलासा कर दिया गया, जो रिस्ते में जीजा-साले बताये जाते हैं, बल्कि व्यापारी नेता अग्रवाल समाज की संस्था से जुड़े रहे हैं तथा अनेक बार तमाम गंभीर आरोप भी लगते रहे हैं।

चौक बाजार से जुड़े एक प्रमुख व्यापारी भाजपा कार्यकर्ता के अनुसार कोरोना के नाम पर सर्राफा कारोबारियों में दहशत पैदा कर करोड़ों की वसूली का खेल खेला जा रहा है जिसमें कुछ व्यापारी नेता तो कुछ राजनैतिक कार्यकर्ता शामिल हैं। जो दलाली, अवैध कार्यों से जुड़कर पुलिस-प्रशासन के लिये वरदान और व्यापारियों के लिये अभिशाप साबित हो रहे हैं। इस पर तत्काल रोक लगानी चाहिए।

कस्बा राया में एक कथित पत्रकार आईडी के साथ गुटखा वितरण में व्यापारी का सहयोग कर रहा है जिसके हाथ में गुटखे का पैकेट लगा हुआ है। जबकि एक अन्य पत्रकार ने गुटखा लेने वालों के साथ पत्रकार का भी स्टिंग कर वीडियो वायरल कर दिया।

इसी तरह रविवार को कस्बा राया में ‘प्रधान’ पान मसाला के वितरक राधेश्याम अग्रवाल फुटकर विक्रेताओं को एक-एक पैकेट दे रहे थे तभी वहां कुछ कथित पत्रकार पहुंच गये और व्यापारी पुत्रों पर ब्लैक में गुटखा बेचने का आरोप लगाते हुए चौथ वसूलने का प्रयास करने लगे। जब व्यापारी पुत्रों ने चौथ देने से इंकार कर दिया तो उसका वीडियो बनाकर पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों पर डाल दिया गया। इस पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर राधेश्याम अग्रवाल के दो पुत्रों विशाल एवं विष्णु को 323 पैकेट प्रधान पान मसाला सहित हिरासत में लेकर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज कर दिया। बताते हैं दोनों व्यापारी पुत्रों को थाने से छुड़वाने के बदले कथित पत्रकारों ने व्यापारी से 5 लाख रूपये की मांग की जो घटते-घटते 2.50 लाख पर पहुंच गई। लेकिन व्यापारी के एक नजदीकी रिस्तेदार के परिचित ने थाना प्रभारी से सम्पर्क कर पत्रकारों के कारनामों से अवगत कराया तो देर शाम दोनों व्यापारी पुत्रों को थाने से जमानत पर छोड़ दिया गया। बाद में कथित पत्रकारों को थाना प्रभारी सूरज प्रकाश ने जमकर खरी-खोटी सुनाई। बताते हैं कि एक कथा-कथित पत्रकार व्यापारी के साथ मिलकर गुटखा वितरण में सहयोग कर रहा है तो दूसरे पत्रकार उसकी वीडियो बनाने में लगे थे जिसे सोशल मीडिया पर भी वायरल किया गया है। उक्त मामला भी पत्रकारों एवं व्यापारियों में चर्चा का विषय बना हुआ है।