अय्याशी के मकड़ जाल में फंसे ‘‘तीन साहब’’, वायरल पत्र ने उड़ाई अफसरों की नींद

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मथुरा। लाॅकडाउन की अफरा-तफरी के बीच इस समय गोवर्धन नगर पंचायत चेयरमैन के वायरल पत्रों ने एक बार फिर प्रशासनिक एवं मीडिया जगत में हड़कम्प मचा रखा है। जिसमें नामचीन शिक्षण संस्थाओं द्वारा अफसरों को लड़कियां सप्लाई किये जाने के आरोप लगाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने की मांग की गई है। आरोप लगाने वालों पर पुलिस-प्रशासन शिकंजा कस पायेगा कि नहीं, ये भविष्य के गर्भ में है लेकिन रंगरेलियां मनाने वाले ‘‘साहब’’ और उनके शागिर्दों के चेहरों पर तनाव साफ देखा जा सकता है।
एक तरफ कोरोना वायरस के लाॅकडाउन का पालन कराने के लिये अफसर दिन रात पसीना बहा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ गोवर्धन नगर पंचायत अध्यक्ष प0 खेमचंद शर्मा द्वारा जिलाधिकारी-वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को लिखे पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिसमें श्री शर्मा द्वारा गोवर्धन तहसील क्षेत्र में समाज विरोधी तत्वों द्वारा कथित पत्रकार बनकर व्यापारियों, संस्थाओं, सरकारी कार्यालय, राशन डीलरों से अवैध वसूली कर अधिकारियों-व्यापारियों की छवि को धूमिल किये जाने एवं उनकी आॅडियो, वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल किये जाने का आरोप लगाये गये हैं।
चेयरमैन के पत्र में सम्मानित शिक्षण संस्थाओं के बारे में कथित पत्रकारों द्वारा अधिकारियों को लड़कियां भेजने जैसे संगीन आरोप लगाकर अधिकारियों की छवि धूमिल की जाने के गंभीर आरोप हैं। जिसमें आरोप लगाने वाले अराजक तत्वों एवं कथित पत्रकारों के प्रकरणों की जांच कर कानूनी कार्यवाही की मांग की गई है। आखिर वह कौन-सी शिक्षण संस्थाऐं हैं जो अधिकारियों को लड़की सप्लाई कर रही हैं। ये तो चेयरमैन और अराजकतत्व या कहें कथित पत्रकार ही भली-भांति जानते हैं। लेकिन ‘‘विषबाण’’ द्वारा जुटाये गये तथ्यों से खुलासा हुआ कि चेयरमैन के ही काॅलेज मेें कार्यरत प्रशासनिक अधिकारी के विरूद्ध करीब एक वर्ष पूर्व ही एक दलित छात्रा द्वारा यौन शोषण का मुकद्मा धारा 376, 511, 354, 504, 506, 3(1)(द), 3(1)(ध) के अन्तर्गत थाना गोवर्धन में दर्ज कराया गया था। जिसके बाद छात्रा के अपहरण का प्रयास किया गया। खास बात है कि काॅलेज के जिस प्रशासनिक अधिकारी पर यौन शोषण का आरोप लगा वह चेयरमेन का पारिवारिक सदस्य था बल्कि वह पत्रकार भी था। पीड़िता ने बाद में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अन्य लड़कियों के साथ उत्पीड़न एवं शोषण का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की गई थी। बाद में उक्त मामले में पीड़िता को मोटी रकम देकर मामले में पर्दा डालने की चर्चाओं ने जोर पकड़ा था। जिससे एक बड़ा मामला जांच से पूर्व ही दौलत और ताकत के सामने दब कर रह गया और सभी आरोपी बच निकलने में कामयाब हो गये।
शिक्षण संस्थाओं की छवि पहली बार धूमिल हो रही हो ऐसा नहीं है इससे पूर्व भी जनपद की एक नामचीन संस्था की तीन छात्राओं के साथ मथुरा शहर के प्रमुख होटल में रंगरेलियां मनाते हुए तीन न्याय रक्षकों को पुलिस द्वारा रंगे हाथ पकड़ने के बाद छोड़ दिया गया था। जिसकी गूंज भी उच्च नयायालय तक पहुंची थी। लेकिन मामला हाई प्रोफाइल होने के बाद कथित ‘‘मीडिया गुरू’’ की सक्रियता के कारण मीडिया की खबरों में ये मामला गायब हो गया। बाद में इसी ‘‘मीडिया गुरू’’ के खिलाफ थाना हाइवे में छात्रा द्वारा यौन शोषण का मुकद्मा दर्ज कराया गया। बल्कि रिपोर्ट में ये भी खुलासा किया गया था कि कथित गुरू ने जब कुछ बड़े लोगों के पास भेजने का प्रयास किया तो छात्रा ने जाने से इंकार कर दिया। ‘‘मीडिया गुरू’’ की जब जेल जाने की नौबत आयी तो उसने पीड़ित पक्ष से समझौता कर मामले पर पर्दा डाल दिया। हालांकि ये मामला अभी उच्च न्यायालय में लंबित है। इसके बाद उक्त ‘‘मीडिया गुरू’’ पर एक महिला पत्रकार ने थाना फरह में न्यायालय के आदेश पर मुकद्मा भी दर्ज कराया।
मीडिया और प्रशासनिक गठजोड़ के बीच अय्याशी का खेल उस समय भी खुलकर सामने आया जब एक तत्कालीन वरिष्ठ प्रशानिक अधिकारी ने कथित युवती पत्रकार से मगोर्रा क्षेत्र के एक शिक्षक एवं प्रोपर्टी कारोबारी से मुलाकात कराई। जिसके बाद युवती पत्रकार ने पलवल में शिक्षक के साथ रंगरेलियां मनाने का वीडियो बनाकर अन्य पत्रकारों के माध्यम से शिक्षक से 30 लाख रुपये के चौथ की मांग की गई थी। जिसमें मीडिया गुरू के माध्यम से 10 लाख में समझौता कराया गया था। लेकिन ‘‘मीडिया गैंग’’ के शिकंजे में फंसे शिक्षक ने 10 लाख की राशि देने की जगह महिला पत्रकार सहित अन्य पत्रकारों का स्टिंग आॅपरेशन कर उनके खिलाफ ही चैथ वसूली का मुकद्मा थाना हाइवे में दर्ज करा दिया गया। जिसके बाद महिला पत्रकार ने भी न्यायाल के आदेश पर ‘‘मीडिया गुरू’’, शिक्षक और उसके सहयोगी के विरूद्ध मुकद्मा दर्ज करा दिया। मीडिया गैंग और प्रशासनिक अफसरों के गठजोड़ में फंसी महिला पत्रकार ने जब अपने बचाव में अधिकारियों के काले कारनामों की वीडियो, आॅडियो, अश्लील चैटिंग की परतें खोलना शुरू किया तो प्रशासन में हड़कम्प मच गया। जिसमें आनन-फानन में कथित महिला पत्रकार को मोटी रकम देकर उसे मथुरा छोड़ने पर मजबूर कर दिया। बल्कि प्रशासनिक अधिकरी भी अपना तबादला कराकर ले गये।
‘‘विषबाण’’ के पास उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार महिला पत्रकार के साथ-साथ मौज मस्ती करने वाले अफसर इस समय पश्चिम उ.प्र. के जनपदों में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत हैं। अफसरों के तबादले के बाद हालांकि कुछ दिन तक अय्याशी का खेल थम गया था। लेकिन शराब, शबाब, कबाब के शौकीन कथित पत्रकारों और अफसरों का खेल फिर से शुरू हो गया। बताते हैं कि कुछ समय पूर्व कोसीकलां-छाता क्षेत्र में लड़कियों के साथ मस्ती करते हुए कुछ पत्रकारों को एक कार्यालय में पुलिस अधिकारियों द्वारा रंगे हाथ पकड़ा गया था। लेकिन ये मामला भी गठजोड़ के चलते दबा दिया गया। सूत्रों का कहना है कि इसी क्षेत्र में एक कथित पत्रकार द्वारा होटलों में अय्याशी का कारोबार अफसरों एवं सफेदपोशों के संरक्षण में काफी समय तक संचालित किया जाता रहा। जिसपर तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी के प्रयासों से रोक लग सकी थी। इसी तरह पिछले दिनों भी दो मामलों की गूंज हुई थी। जिसमें काले कारोबार से जुड़े एक कथित पत्रकार द्वारा दिल्ली स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे थाने में एक लड़की को परोस कर अधिकारी का स्टिंग करने का प्रयास किया गया था जिसकी भनक पुलिस अधिकारी को लगने पर कथित पत्रकार की जमकर ठुकाई कर उसका नग्नावस्था का वीडियो तक बना लिया था। जिसके कारण मामले पर पर्दा डाल दिया गया।

लाॅकडाउन के सन्नाटे के बीच पिछले दिनों शहर के एक होटल में ‘‘बड़े साहब’’ के रंगीन मिजाजों के किस्सों ने जोर पकड़ा तो साहब और कथित पत्रकारों के चेहरों की हवाइयां उड़ने लगीं। कुछ पत्रकारों द्वारा जब गहराइयों में जाने का प्रयास किया गया तो उनके खिलाफ ही साजिशों का खेल शुरू कर दिया गया। और कथित पत्रकारों के बहाने उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर कानूनी कार्यवाही की मांग उठा दी गई जिससे सच का खुलासा करने वालों पर कानून का शिकंजा कसकर उनके मुंह पर ताले लटका दिये जायें। सूत्रों का कहना है कि जनपद के तीन ‘‘साहबों’’ के कारनामों की अगर उच्च स्तरीय जांच कराई जाये तो चैंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। सूत्र बताते हैं कि ‘‘तीन साहबों’’ को कुछ खास लोगों के द्वारा शराब, शबाव, कवाब, परोसे जाने की चर्चायें जोर-शोर से हो रही हैं। हालांकि अफसरों एंव मीडिया गैंग के कारनामों की शिकायतें मुख्यमंत्री-राज्यपाल सहित उच्च अधिकारियों तक पहुंच गई हैं। लेकिन देखना होगा कि ऊँची पहंुच रखने वाले मीडिया गैंगों के सरगनाओं – अफसरों के गठजोड़ का तिलिस्म टूटता है या फिर यह खेल बदस्तूर जारी रहता है। लेकिन जिस तरह अफसरों एवं मीडिया गैंगों के कारनामे सामने आ रहे हैं उससे प्रतीत होता है कि दौलत और जुगाड़ के सामने सब शिकायतें-आरोप बेमानी हैं।

गोवर्धन नगर पंचायत चेयरमैन पंडित खेमचन्द शर्मा द्वारा डीएम/एसएसपी मथुरा को लिखे गये पत्र की प्रति जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

यार ने ही लूट लिया घर यार का…

‘‘हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था, अपनी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था’’ की पंक्तियां इश्क के कारोबार में सटीक साबित हो रही हैं। सूत्र बताते हैं कि एक कथित पत्रकार ने दर्जनों युवतियों को अफसरों से लेकर बड़े लोगों तक परोस डाला। लेकिन दूसरे कथित पत्रकार ने उसकी ही पत्नी को अपने मोह जाल में फंसाकर जमकर मौजमस्ती तो की ही बल्कि अपने अन्य साथियों के साथ कई अधिकारियों एवं बड़े लोगों तक परोस दिया। जिससे कथित पत्रकार अब अपने किये गये कर्मों पर पछता रहा है। लेकिन उस पर ‘‘अब पछताये होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत’’ की कहावत सटीक साबित हो रही है।