शराबी युवक को पकड़ना पुलिस को पड़ा महंगा, धक्का-मुक्की में गई माँ की जान, जनता ने लगाया जाम

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मथुरा/नौहझील। कोरोना लाॅकडाउन के बाद सरकार द्वारा शराब ठेकों से रोक हटाये जाने के बाद शराबी युवक एवं पुलिस के बीच गाली-गलौज मारपीट के दौरान बेटे को बचाने आई मां की पुलिस की धक्का मुक्की से मौत हो गई। जनता के आक्रोश पर उच्च अधिकारियों ने दोषी पुलिस कर्मियों के विरूद्ध मुकद्मा दर्ज के आदेश दिये हैं। लेकिन ग्रामीण मुआवजे की मांग को लेकर अड़े हुए थे।
प्राप्त विवरण के अनुसार कस्बा नौहझील निवासी सोनू पाठक उर्फ चैंटा पुत्र वेदप्रकाश पाठक उर्फ वेद शराब ठेके के सामने शराब पीकर हंगामा कर रहा था इसी दौरान थाना नौहझील पर कार्यरत सब इंस्पेक्टर मनिन्दर सिंह ने युवक को हड़काते हुए चांटा मार दिया जिस पर युवक ने भी दरोगा से गाली-गलौज करते हुए चांटा जड़ दिया। इसी दौरान अन्य जनता एकत्रित हो गई बल्कि युवक की मां गीता देवी भी मौके पर आ गई। जबके दूसरी तरफ दरोगा ने थाने से अन्य पुलिस बल बुलाकर युवक को थाने ले जाने लगे तो जनता के साथ-साथ युवक की मां ने पुलिस से युवक को छुड़ाने का प्रयास किया।
बताते हैं कि पुलिस द्वारा युवक को जीप में डालने पर मां ने जब जीप से लटकने का प्रयास किया तो पुलिस ने धक्का देकर गिरा दिया और युवक को जीप में डालकर थाने ले गई जहां पुलिस पर युवक से मारपीट करने का आरोप है। उधर पुलिस के धक्के से सड़क पर गिर पड़ी गीता को ग्रामीणों ने उठाने का प्रयास किया तो वह अपनी सुध-बुध खो चुकी थी। मां को ठेके से चन्द कदम दूर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र ले जाया गया जहां उसे चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। पुलिस की पिटाई से महिला की खबर कस्बे में आग की तरह फैल गई और बड़ी संख्या में स्वास्थ्य केन्द्र पर जनता एकत्रित हो गई और मृतका की लाश को लेकर बाजना तिराहा पर पुलिस के खिलाफ जाम लगा दिया।

घटना की सूचना पर एसडीएम मांट कृष्णानन्द तिवारी, सीओ विकास पाराशर सहित कई थानों का पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। जनता की मांग पर उच्च अधिकारियों ने कस्बा इंचार्ज सुधीर मलिक, सब इंस्पेक्टर मनिन्दर सिंह के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने एवं महिला का पोस्टमार्टम कराकर पकड़े युवक को छोड़ने का आश्वासन दिये जाने पर ग्रामीणों का आक्रोश शांत नहीं हो सका और वह मुआवजे की मांग पर देर शाम तक लाश को लेकर जाम लगाये हुए थे। कस्बा की जनता एवं व्यापारियों का कहना है कि कस्बा इंचार्ज सहित दोनों दरोगाओं का आतंक व्याप्त था। जिसकी शिकायतें उच्च अधिकारियों से किये जाने के बावजूद भी उन्हें नहीं हटाया गया। बताते हैं कि मृतक गीता के पति की काफी वर्ष पूर्व मृत्यु हो गई थी, तब उसका बेटा बहुत छोटा था जिससे वह विशेष लगाव रखती थी। घटना के बाद कस्बे में पुलिसबल तैनात कर दिया गया है।