कोरोना वायरस: लाखों मजदूर आज भी दौड़ रहे हैं सड़कों पर, सामाजिक संस्थायें उतरी मैदान में

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मथुरा। कोरोना वायरस से लाॅक डाउन का शिकार हुए करोड़ों मजदूरों की घर जाने की अफरा-तफरी का आलम आज भी दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर पूरे दिन दिखाई देता रहा, योगी सरकार द्वारा चलाई गई बसें भारी भीड़ के सामने ऊँट के मुँह में जीरे के समान साबित हुई, देर रात्रि तक लोग प्रमुख चैराहों, बस स्टैण्डों पर वाहनों का इन्तजार में रात्रि गुजारने पर मजबूर थे वहीं दूसरी तरफ सामाजिक संस्थाओं द्वारा गरीब-मजदूरों को भोजन-पानी की व्यवस्था सभालने से उनके चेहरों पर राहत नजर आ रही थी। जबकि प्रशासन व्यवस्थाओं के नाम पर तमाशाबीन बनता नजर आ रहा है।

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिये प्रधानमंत्री द्वारा 24 मार्च से लाॅक डाउन की घोषण के बाद जहां पूरे देश की जनता अपने घरों में कैद होने पर मजबूर हो गई वहीं फैक्ट्री, कारखाने, वाहन, ट्रैन सहित सभी कारोबार ठप्प होने से हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली आदि राज्यों में रोजगार की तलाश में आये मजदूर अपने-अने घरों के लिये वाहन होने से सैकड़ों से लेकर हजारों किलो मीटर दूर पैदल ही मासूम बच्चों एवं परिवार के साथ चल निकले।

नये बस स्टैण्ड मथुरा पर देर रात्रि वाहनों का इंतजार करते मजदूर परिवार

मजदूरों की दयनीय हालत की तस्वीरें मीडिया के माध्यम से सामने आने के बाद उ.प्र. की योगी सरकार द्वारा बाहरी राज्यों में फंसे मजदूरों को घर तक पहुंचाने के लिये एक हजार रोडवेज बसों का संचालन तो शनिवार को कर दिया गया। लेकिन ये घोषणा भी मजदूरों की संख्या को देखते हुए ऊँट के मुँह में जीरे के समान साबित हुई है। मथुरा प्रशासन द्वारा हरियाणा-यूपी स्थित कोटवन बाॅर्डर, गोवर्धन चैराहा, नये एवं पुराने बस स्टैण्ड से मात्र 32 बसों का संचालन किया गया। जिसमें कोटवन बाॅर्डर से सवारी लाकर गोवर्धन चैराहे पर छोड़ दिया गया। जहां से आगरा के लिये बैठाया जा रहा था। जबकि किसी मजदूर परिवार को झांसी, कानपुर, मेरठ, बरेली, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि दूर-दराज स्थानों पर जाना था। जिन्हें कई-कई घण्टे इन्तजाम के बाद जैसे-तैसे कोई वाहन मिलता, फिर वह दूसरे स्थान पर घण्टों वाहन के इन्तजार में खड़े रहते।

सामाजिक कार्यकर्ता शोभाराम शर्मा की फर्म एसआरएससी की तरफ से भोजन-पानी वितरण करते हुए।

सरकार और प्रशासन की व्यवस्थाओं के मजाक का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कोटवन बाॅर्डर से आगरा तक के लिये तीन वाहनों को बदलने पर मजबूर होना पड़ रहा था। झांसी के रामतीर्थ का कहना था कि कई-कई घण्टे इन्तजार के बाद वाहन उपलब्ध होने से 50 किलोमीटर का सफर 10 घण्टे में तय हो पाया है, जबकि 100 किलो मीटर की पैदल यात्रा उन्होंने 20 घण्टे में तय कर ली। सरकार ने मजदूरों के साथ भद्दा मजाक किया है। भिवाड़ी राजस्थान के रविन्द्र सिंह का कहना हे कि वह चलते-चलते हार चुके हैं इसलिये उन्होंने बस का घण्टों इन्तजार किया लेकिन अब वह पैदल ही अपने घर को जा रहे हैं।

इसी तरह के हालत सैकड़ों मजदूरों ने बताये। जिससे हजारों की संख्या का काफिला दिल्ली से आगरा की ओर पैदल ही जाने पर मजबूर था।

गोवर्धन चैराहे पर भोजन वितरण करते समाजिक कार्यकर्ता।

देर रात्रि तक गोवर्धन, चैराहा, मण्डी चैराहा, बजरंग धर्मकांटा चैराहा, नये बस स्टैण्ड, पुराने बस स्टैण्ड, वर्कसाॅप के सामने वाहनों के इन्तजार में खुले आसमान के नीचे रात्रि गुजारने पर मजबूर थे। इस सम्बन्ध में नये बस स्टैण्ड स्टेशन प्रभारी बिजेन्द्र सिंह का कहना था कि रात्रि में बसों की कोई व्यवस्था नहीं है। सुबह ही बसों का संचालन संभव हो पायेगा। उन्होंने बताया कि आज वर्कशाॅप से 32 बसों को बरेली, आगरा, कोटवन बाॅर्डर, बस स्टैण्ड आदि से भेजा गया है। जबकि दिल्ली-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग पर हजारेां की संख्या में मजदूरों का अवागमन हो रहा है। सरकार एवं प्रशासनिक व्यवस्थाऐं उनके लिये ऊँट के मुँह में जीरे के समान साबित हो रही है। वहीं दूसरी तरफ शनिवार की तमाम सामाजिक नागरिक एवं संस्थाऐं मजदूर परिवारों को भोजन, चाय, नाश्ते के लिये मैदान में आ गई। जिन्होंने गोवर्धन, चैराहे सहित अन्य प्रमुख स्थानों के साथ गली-मौहल्ले में भोजन-पानी का वितरण कर भूख से तड़पते लोगों को राहत प्रदान की। जबकि नगर निगम एवं प्रशासन द्वारा प्रमुख स्थानों पर पानी के टैंकरों की व्यवस्था भी की गई थी।