कोरोना से भी बड़ी महामारी है कैंसर और शराब, हर साल होती हैं 1.30 करोड़ मौतें

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मफतलाल अग्रवाल
आज जब नोबल कोरोना वायरस (कोविड-19) को लेकर भारत सहित पूरे विश्व में अफरा-तफरी का माहौल नजर आ रहा है। जिसमें पूरे भारत में 21 दिन के लिये लाॅकडाउन घोषित कर 135 करोड़ से अधिक जनता को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर दिया। वहीं दूसरी तरफ सरकारों की राजस्व कमाई के नाम पर शराब, तम्बाकू एवं कैंसर से मरने वाले नागरिकों की संख्या भी चैंकाने वाली है जिसमें पूरी दुनिया में 30 लाख लोगों की शराब पीने तथा 1 करोड़ लोगों की मौत कैंसर से प्रतिवर्ष हो रही है। हर दसवें व्यक्ति को कैंसर जिसमें हर 15वें व्यक्ति की मौत हो रही है। जिसमें वर्ष 2018 में 7 लाख 85 हजार करीब लोगों की मौत हो गई। जबकि इस लेख को लिखे जाने तक कोरोना वायरस से पूरे विश्व में करीब 4 लाख 70 हजार लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं जिनमें से 1.14 लाख ठीक हो गये हैं तथा 21,270 पीड़ितों की मौत हो चुकी है। जिसमें भारत में अबतक 606 संक्रमण के मामले दर्ज हुए हैं जिनमें से 10 लोगों की मौत की पुष्टि भारत में हुई है।

चीन के वुहान शहर से शुरू हुए कोरोना वायरस से अब तक विश्व के 197 देशों में से 176 देश इसकी चपेट में आ चुके हैं। कोरोना वायरस से कितनी जनहानि और होगी ये तो अभी कुछ नहीं कहा जा सकता है लेकिन अधिक जनहानि रोकने के लिये केन्द्र की मोदी सरकार ने 22 मार्च को जनता कफ्र्यू एवं 24-25 मार्च की रात्रि को पूरे देश में 21 दिन का लाॅक डाउन घोषित कर दिया जिससे पूरा देश का आवागमन ही नहीं कारोबार भी ठप्प हो गया है।

सत्येन्द्र जैन शौली

बड़ी जनहानि रोकने के लिये भारत सरकार सहित पूरे विश्व को आवश्यक कदम उठाना भी जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ भारत सहित विश्व के बड़े देश अधिक राजस्व की चाहत में जनता को मौत के दल-दल में धकेल रहे हैं। अगर वल्र्ड हैल्थ आॅर्गनाइजेशन (विश्व स्वास्थ्य संगठन) की रिपोर्ट को मानें तो प्रतिवर्ष 30 लाख से अधिक मौतें शराब पीने के कारण पूरे विश्व में होती हैं जबकि अकेले भारत में 2.60 लाख मौतें प्रतिवर्ष होती हैं। रिपोर्ट की मानें तो पूरी दूनियां में प्रतिदिन शराब पीने के कारण 6 हजार लोगों की मौत होती है। दूसरी तरफ शराब के खिलाफ गुजरात के साबरमती आश्रम से राजघाट दिल्ली तक नशा मुक्त भारत यात्रा करने वाले डा0 सुनीलम का दावा है कि भारत में शराब पीने से प्रतिवर्ष 10 लाख लोगों की मौतें होती हैं जिनकी संख्या प्रतिमाह 80 हजार से अधिक है। लोक नागरिक कल्याण समिति उ.प्र. के सचिव सत्येन्द्र जैन शौली कहते हैं कि उनकी संस्था द्वारा पिछले एक वर्ष से नशा मुक्ति मूवमेन्ट चलाया जा रहा है जिसमें 60 किलोमीटर लम्बी मानव श्रंखला, मदिरा मुक्ति यात्रा सहित अनेक प्रकार के जन जागरण अभियान चलाये जा रहे हैं। वल्र्ड हैल्थ आॅर्गनाइजेशन की 2016 में आई एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए वह कहते हैं कि अकेले उ.प्र. में 23.70 प्रतिशत लोग शराब पीने के शिकार हो गये हैं। जिनकी संख्या 4.20 करोड़ है बल्कि देश के सबसे पहले पायदान पर है।


श्री जैन कहते हैं कि केन्द्र एवं उ.प्र. सरकार से अनेक बार शराब से होने वाली मौत एवं राजस्व के आंकड़े मांगे गये लेकिन उपलब्ध नहीं कराये गये। श्री जैन कहते हैं कि राजस्व जुटाने के नाम पर सरकारें जनता की जिन्दगी छीन रही हैं। सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए श्री जैन कहते हैं कि एक तरफ सरकार आबकारी विभाग के माध्यम से शराब बिकवाती है वहीं दूसरी तरफ उसी विभाग में मद्य निषेध विभाग की स्थापना कर शराब विरोधी अभियान चलाने का दावा करती है। जो बेहद ही हास्यास्पद है। शराब के कारण सड़क, दुर्घटनाऐं, झगड़े-फसाद के साथ बीमारियों का ग्राफ जहां लगातार बढ़ता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ सरकार गांव के गली-मौहल्ले में भी ठेके खोलकर जनता के साथ ही नहीं बच्चों की जिन्दगी से भी खिलवाड़ कर रही है जिससे बच्चों का भी भविष्य बर्बाद हो रहा है। सरकार कोरोना के नाम पर तो पूरे देश में कफ्र्यू लगा रही है जबकि गांव-गांव में शराब के नाम पर मौत बांटकर महामारी फैला रही है। जिसपर तत्काल सख्त कदम उठाकर शराब की बिक्री पर रोक लगानी चाहिए।


शराब से होने वाली भयावह मौतों के आंकड़े के बाद अब कैंसर की ओर चलते हैं जिसमें पिछले महीने 4 फरवरी 2020 को वल्र्ड कैंसर डे पर जारी ताजा रिपोर्ट में खुलासा किया कि भारत में कैंसर तेजी से फैल रहा है आने वाले वक्त जिसमें हर 10 में से एक आदमी को कैंसर की बीमारी होगी और हर 15 कैंसर मरीज में से एक की मौत हो जाएगी. रिपोर्ट के अनुसार 11 लाख से ज्यादा कैंसर के नए मामले सामने आए हैं. इस दौरान 7 लाख 84 हजार 800 लोगों की मौत कैंसर से हुई है. 22 लाख से ज्यादा लोग पिछले 5 साल से कैंसर से जूझ रहे हैं. भारत की 135 करोड़ की आबादी के लिए कैंसर जानलेवा साबित होती जा रही है. हर साल मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.

भारत में किस तरह के कैंसर के हैं सबसे ज्यादा मरीज

कैंसर की रोकथाम के लिए विश्व स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन भारत में कैंसर के मामले कम नहीं हो पा रहे हैं. एक आंकड़े के मुताबिक भारत में सबसे ज्यादा ब्रेस्ट कैंसर (1 लाख 62 हजार 500) के मामले सामने आए हैं. इसके बाद ओरल कैंसर (1 लाख 20 हजार मामले), सर्वाइकल कैंसर (97 हजार मामले), लंग कैंसर (68 हजार मामले), पेट का कैंसर (57 हजार मामले) और कोलोरेक्टर कैंसर (57 हजार मामले) का नंबर आता है. कैंसर के ये सारे मामले कुल कैंसर के मामलों का 49 फीसदी हैं.

पुरुषों से ज्यादा महिलाओं में कैंसर के नए मामले

पुरुषों में कैंसर के 5.70 लाख नए मामले सामने आए हैं. इनमें ओरल कैंसर के 92 हजार, लंग कैंसर के 49 हजार, पेट के कैंसर के 39 हजार और कोलेरेक्टर कैंसर के 37 हजार मरीज सामने आए हैं. इसी तरह से महिलाओं में कैंसर के 5.87 लाख नए मामले सामने आए हैं. पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में कैंसर के 17 हजार नए मामले दर्ज किए गए हैं.

तंबाकू की वजह से सबसे ज्यादा हो रहा है कैंसर

पुरुषों में होने वाले कैंसर के मामलों में 34 से लेकर 69 फीसदी मामले तंबाकू को लेकर हैं. वहीं 10 से लेकर 27 फीसदी महिलाओं को तंबाकू की वजह से कैंसर होता है. तंबाकू की वजह से सबसे ज्यादा कैंसर फैल रहा है. खासकर पुरुषों में इसकी वजह से कैंसर के मामलों में काफी इजाफा देखा गया है. एक आंकड़े के मुताबिक करीब 22 फीसदी कैंसर में मौत के मामले तंबाकू के सेवन की वजह से हो रहे हैं.

हर 20 साल में दोगुने हो जाते हैं कैंसर के मामले

कैंसर को लेकर 2019 में एक रिपोर्ट सामने आई थी. इस रिपोर्ट के मुताबिक हर 20 साल में भारत में कैंसर के मामले दोगुने हो जाते हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक अगले 10 से 20 वर्षो में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशी में कैंसर भयावह रूप ले सकता है. इन राज्यों में कैंसर का इलाज करने वाले अस्पताल भी कम हैं.

भारत में कैंसर मरीजों की 324 प्रतिशत की वृद्धि

नेशनल हेल्थ प्रोफाइल 2019 के डेटा के अनुसार भारत में कैंसर के मामलों में करीब 324 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इन मामलों में कॉमन कैंसर, ओरल कैंसर, सर्वाइकल और ब्रेस्घ्ट कैंसर जैसे मरीज शामिल हैं। 2018 में 6.5 करोड़ लोग छब्क् (छवद-बवउउनदपबंइसम कपेमंेमे) क्लीनिक में स्क्रीनिंग के लिए पहुंचे थे। इनमें से 1.6 लाख लोगों को कॉमन कैंसर समेत ओरल कैंसर, सर्वाइकल और ब्रेस्घ्ट कैंसर की बीमारी थी। जबकि 2017 में यह आंकड़ा 39,635 मरीजों का था। 2018 में मरीजों की स्घ्क्रीनिंग 01 जनवरी 2018 से 31 दिसंबर 2018 तक हुई थी।

हेल्थ प्रोफाइल के मुताबिक, 2018 में कैंसर के सबसे ज्घ्यादा मामले गुजरात से आए हैं, इनकी संख्घ्या 72,169 है। इसके बाद कर्नाटक में 20,084 मरीज और महाराष्घ्ट्र में 14,103 मरीज सामने आए हैं। इन प्रदेशों के अलावा तेलंगाना और पश्घ्चिम बंगाल में भी कैंसर के मरीज बढ़े हैं। बात करें 2017 की तो इस साल गुजरात में 3,939 कैंसर के मरीज पाए गए थे। वहीं कर्नाटक में 3,523 कैंसर के मरीज थे।

पिछले साल आई डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में भी भारत में कैंसर के मरीजों की बढ़ने की बात कही गई थी। 2018 में कैंसर से दुनिया में 9.6 मिलियन लोगों की मौत हुई थी। इसमें से भारत की हिस्सेदारी 8.17ः की रही। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 2018 में कैंसर के 1.16 मिलियन मामले सामने आए। वहीं, 1990 और 2016 के बीच स्तन कैंसर की घटनाओं में 39.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह भारत में महिलाओं को होने वाला सबसे आम कैंसर है।

शराब-कैंसर के अलावा अन्य बीमारियों की बात करें तो हर साल पूरी दुनिया में मलेरिया 20 करोड़ लोगों को संक्रमित करता है और इसमें 4 लाख लोगों की मौत हो जाती है। जबकि क्षय रोग यानी टीवी से हर साल 1 करोड़ लोग शिकार होते हैं। जिसमें से लगभग 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। जबकि दूषित पानी और दूषित पानी से होने वाले अतिसार मरने वालों की संख्या मलेरिया, टीवी, एड्स से मरने वालों की संख्या के योग से कहीं अधिक हैं।

मफतलाल अग्रवाल
संपादक
विषबाण मीडिया ग्रुप
एवं सचिव समाजाकि संस्था
‘ सारथी’

नोबल कोरोना (कोविड-19) वायरस से अभी भारत में भले ही कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई है लेकिन विश्व में मची अफरा-तफरी के बीच केन्द्रीय मोदी सरकार ने आनन-फानन में पूरे देश को लाॅकडाउन कर 135 करोड़ लोगों को घरों में कैद कर पूरे अवागमन एवं अर्थव्यवस्था को ठप्प कर दिया गया है जबकि आप भारतीय शराब-कैंसर जैसे महामारी से जूझ रहा है और सरकारें नागरिकों को मौत परोसकर अपना खजाना भरने में लगी हुई है।