500 करोड़ की गौशाला सम्पत्ति कब्जाने का खेल, लगा दिया भाजपा कार्यालय का बोर्ड

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गौशाला की दुकानों पर कब्जे के बाद धरना देते संत।

मथुरा। ‘‘ ना गुण्डाराज, ना भ्रष्टाचार’’ योगी सरकार के इस लोक लुभावन नारे की भाजपाई ही कैसे धज्जिया उड़ा रहे हैं इसका नजारा मथुरा में देखा जा सकता है जहां भाजपाईयों ने सत्ता की लाठी के सहारे भाजपा कार्यालय के नाम पर गौशाला की दुकानों पर कब्जा कर लिया बल्कि 500 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति पर कब्जा करने के लिये विरोध करने वालों के खिलाफ पार्टी कार्यालय की दीवार तोड़कर फर्नीचर चोरी का मामला भी दर्ज करा दिया गया। लेकिन पुलिस-प्रशासन सत्ता के दबाव में मौन साधे हुए है तो भाजपा नेताओं के साथ विपक्षी नेताओं-भूमाफियाओं के बीच टकराव के हालात नजर आ रहे हैं। जिसमें घटना स्थल पर पुलिस तैनात कर दी गई है।

सपा सरकार में पार्टी कार्यालय के नाम पर मथुरा शहर में दुकान कब्जाने को लेकर भाजपाइयों एवं व्यापारी नेताओं ने भले ही जमकर लाठियां खाई हों। लेकिन अब योगी सरकार में भाजपाई नेता और समर्थक सत्ता की लाठी के बल पर पार्टी कार्यालय के नाम पर गौशाला की दुकानों के साथ-साथ 500 करोड़ की जमीन को हथियाने का खेल खेल रहे हैं। जिसके विरोध में सन्त-महन्त, सपा-बसपाई, सामाजिक संगठन विरोध में उतरे तो उनके खिलाफ ही भाजपा मण्डल अध्यक्ष ने चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराकर “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” वाली कहावत चरितार्थ कर दिया है।

गौशाला की दुकानों पर भाजपा कार्यालय के कब्जे के बाद जनता एवं संतों द्वारा उखाड़े गये बोर्ड की खाली जगह एवं तोड़ी गई दीवार के बाद कब्जा मुक्त गौशाला की दुकानें।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा मण्डल मांट के तत्कालीन अध्यक्ष हुकम सिंह ने अपने सहपाठी एवं मण्डल उपाध्यक्ष जगदीश त्रिपाठी के सहयोग से मांट तिराहा स्थित गोशाला संचालक नागा बाबा से कार्यालय हेतु एक दुकान 2016 में निःशुल्क ली थी। जिसमें कार्यालय का संचालन हो रहा था। बताते हैं कि नागा बाबा की मौत 7 फरवरी 2019 को हो गई। जिसके बाद  जिसके बाद करीब 500 करोड़  की सम्पत्ति जिसमें गौशाला एवं उसमें निर्मित 40 दुकानों पर कब्जा करने एवं उत्तराधिकार को लेकर गोविन्दगिरी, शराणगिरी एंव रूद्रगिरी के मध्य कानूनी जंग शुरू हो गई। इसी मध्य तत्कालीन मण्डल अध्यक्ष हुकम सिंह को हटाकर नये मण्डल अध्यक्ष के रूप में भगवान सिंह उर्फ मूला फौजी को कमान दे दी गई। जिसके बाद नये मण्डल अध्यक्ष ने हुकम सिंह से कार्यालय की चाबी मांगी तो देने से इंकार करते हुए गौशाला के संचालक गोविन्दगिरी को देना बताया। जिसपर गोविन्दगिरी से नये मण्डल अध्यक्ष ने दुकान की चाबी मांगी तो ना देने पर दुकान का ताला तोड़कर उसपर कब्जा कर लिया गया। इसके बाद 26 जनवरी 2020 को भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं समाजसेवी एस.के. शर्मा ने कार्यालय का उद्घाटन कर पार्टी कार्यालय के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष मधु शर्मा के नाम का बोर्ड लगवा दिया।

बताया जाता है कि भाजपा नेताओं ने गौशाला विवाद का फायदा उठाते हुए एक-एक कर अन्दर की दीवारें तोड़कर चार दुकानों पर कब्जा कर लिया। जिनकी कीमत 2 करोड़ के लगभग बताई जाती है। इसकी जानकारी होते ही गौशाला के महन्त एवं स्थानीय लोग मौदान में आ गये और कथित भाजपा कार्यालय की दीवार तोड़कर और उसमें रखे फर्नीचर आदि को हटाकर दुकानों को गौशाला में मिला लिया। इसकी जानकारी मिलने पर भाजपा नेता एस.के. शर्मा पहलवानों एवं पुलिस प्रशासन के साथ मौके पर पहुंचे तो सैकड़ों ग्रामीण भी मौके पर पहुंच गये, जिसपर गौशाला पर कब्जे का आरोप लगाते हुए महन्त गोविन्द गिरी निर्वस्त्र होकर भाजपा नेता और पुलिस-प्रशासन पर बरस पड़े। लेकिन पुलिस-प्रशासन ने सत्ता की धमक एवं जनता-बाबाजी के आक्रोश को देख खामोशी ओढ़ते हुए भाजपा मण्डल अध्यक्ष भगवान सिंह उर्फ मूला फौजी की शिकायत पर गौशाला के संचालक गोविन्दगिरी महाराज, नन्द किशोर, कोमल, रिंकू चैधरी, सुल्लो शर्मा, रमेश चन्द सारस्वत, लोकेश सारस्वत, नेतो ठाुकर, मूला ठाकुर के खिलाफ भाजपा कार्यालय की दीवार तोड़कर कार्यालय के फर्नीचर चोरी कर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। जिसमें सपा नेता संजय लाठर, बसपा नेता एवं क्षेत्रीय विधायक श्याम सुन्दर समर्थकों के साथ एक पत्रकार का नाम भी शामिल है।

गौशाला के संचालन महंत गोविन्द गिरी नग्न होकर अधिकारियों एवं भाजपा नेता को खरी खोटी सुनाते हुए।

इस मामले में ‘‘विषबाण’’ द्वारा जुटाई गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 1980 में नागा बाबा द्वारा मांट तिराहे पर करीब दो एकड़ क्षेत्र में गौशाला का निर्माण कराया गया। जिसमें कुछ जमीन मांट निवासी लक्ष्मीधर भट्ट की भी शामिल बताई जाती है जिसे गौशाला हेतु दान देना भी बताया जाता है। जिसे लेकर वर्ष 1983 से न्यायालय में कानूनी लड़ाई चल रही है। बताते हैं कि राया एवं वृन्दावन रोड़ पर नागा बाबा ने गौशाला संचालन के लिये करीब 40 पक्की दुकानों का निर्माण करा दिया। जिनकी वर्तमान कीमत 20 करोड़ के लगभग है। जिसके पीछे गौशाला का संचालन होता रहा है। बताते हैं कि नागा बाबा द्वारा वृन्दावन रोड़ पर ही 15 बीघा जमीन बेगमपुर (बेलवन) लक्ष्मी जी मन्दिर पर खरीद कर गौशाला का निर्माण कराया गया। इसी तरह 16 एकड़ जमीन मांट खादर, 5 बीघा कराहरी, 15 बीघा जमीन मैरू बाबा मन्दिर के पास आदि सैकड़ों बीघा जमीन गौशाला के साथ लगी हुई है। बताते हैं कि मांट तिराहा स्थित गौशाला के कुछ हिस्से का विवाद न्यायालय में चल रहा है। जबकि शेष जमीन गैर विवादित है। जिसमें गौशाला सहित जमीन की कीमत 500 करोड़ के लगभग है। बताते हैं कि गौशाला संचालक नागा बाबा का निधन फरवरी 2019 में हो जाने के बाद गौशाला के सेवक गोविन्दगिरी, शरण गिरी, रूद्र गिरी के मध्य घमासान शुरू हो गया। जिसमें दोनों गुटों में शक्ति प्रदर्शन की होड़ मच गई।

शाला पर भाजपा कार्यालय के उद्घाटन का बोर्ड।

सूत्र बताते हैं कि एक गुट की कार्यकारणी में करीब 6 माह पूर्व तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष नागेन्द्र सिकरवार भी वरिष्ठ पदाधिकारी एवं तत्कालीन जिला उपाध्यक्ष ज्ञानेन्द्र शर्मा जिनके भाई नन्द किशोर गौशाला विवाद से जुड़े हैं भी विवाद में शामिल हो गये। बताया जाता है कि 500 करोड़ से अधिक की सम्पत्ति पर कब्जा करने के लिये कथित गौशाला सेवकों ने प्रदेश सरकार के मंत्रियों से लेकर बसपा नेता एवं क्षेत्रीय विधायक श्याम सुन्दर शर्मा सहित अनेक नेताओं को गौशाला विवाद से जोड़ लिया। बताते हैं कि गौशाला की इस जमीन पर एक किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता ने भी कथित वसीयत तैयार कर जमीन कब्जाने की पटकथा तैयार की है। जबकि दिल्ली की तुलसी नामक संस्था द्वारा भी स्वर्गीय नागाबाबा से कैंसर हाॅस्पीटल निर्माण हेतु 29 साल 11 माह का पांच वर्ष पूर्व एग्रीमेंट होने का दावा भी किया जा रहा है। जबकि गौशाला विवाद की 37 साल से कानूनी लड़ाई लड़ रहे लक्ष्मीधर भट्ट के पौत्र रविभट्ट पुत्र विनोद भट्ट हाल निवासी गौतम पाड़ा, वृन्दावन ने ‘‘विषबाण’’ से कहा कि उनके बाबा की जमीन पर गौशाला के नाम पर 40 वर्ष पूर्व कब्जा कर लिया गया था जिसका विवाद न्यायालय में लम्बित है। उन्होंने ही भाजपा कार्यालय के लिये दुकानें दी थीं। विवाद के बीच दुकानें किस आधार पर दी गई इस पर वह स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।
प्रमुख भाजपा नेता एस.के. शर्मा ने ‘‘विषबाण’’ से कहा कि 26 जनवरी को उनके द्वारा भाजपा के मण्डल कार्यालय का उद्घाटन किया था। जिसमें विरोध गुट के लोग दीवार तोड़कर लाखों का सामान चुरा ले गये जिसकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। श्री शर्मा ने पार्टी कार्यालय के नाम पर गौशाला की जमीन कब्जाने के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि उन्होंने सदैव दान किया है ना कि कभी जमीन कब्जाई हो उन्होंने कहाकि रवि भट्ट द्वारा कार्यालय के लिये दुकानें दी गई थीं जिसपर दूसरे पक्ष ने जबरन कब्जा कर लिया। जिसकी शिकायत मिलने पर वह रिपोर्ट दर्ज कराने के लिये मौके पर गये थे। भाजपा जिलाध्यक्ष मधुशर्मा ने कहा कि- ना तो उन्होंने कार्यालय का उद्घाटन किया और ना ही वह विवाद के दौरान कार्यालय पर गईं। उन्होंने बोर्ड पर नाम लिखे होने की जानकारी होने से इंकार करते हुए कहा कि पार्टी कार्यालय के नाम पर कोई जमीन नहीं कब्जाने दी जायेगी और जल्द ही मामले का निस्तारण किया जायेगा। भाजपा के निवर्तमान जिलाध्यक्ष नागेन्द्र सिकरवार का कहना है कि गौशाला की जमीन को कब्जाने की शिकायत को लेकर करीब 6 माह पूर्व ग्रामीण और संत सहयोग के लिये आये थे और गौशाला पर कोई कब्जा ना करे इसलिये समिति में मुझे शामिल किया गया था। श्री सिकरवार ने कहा कि वह गौशाला पर कब्जा करने वालों के खिलाफ खड़े हैं। मेरी या पार्टी की नीयत कभी भी गौशाला कब्जाने की नहीं रही है। चाहे वह कितनी भी कीमती क्यों ना हो। बसपा नेता एवं क्षेत्रीय विधायक श्याम सुन्दर शर्मा का कहना है कि करीब 6 माह पूर्व दोनों गुटों के सन्त गौशाला विवाद को लेकर सहयोग के लिये आये थे। मैंने दोनों पक्षों के विवाद में पड़ने से इंकार कर दिया था। मुकद्मे में उनके समर्थकों की नामजदगी पर श्री शर्मा ने कहा कि प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करनी चाहिए चाहे वह किसी भी दल-पार्टी का क्यों ना हो। इस सम्बंध में एसडीएम मांट कृष्णानन्द तिवारी ने बताया कि गौशाला का पुराना जमीनी विवाद है जिसे लेकर दोनो पक्षों में विवाद हुआ था जिसमें दोनों पक्षों की तरफ से रिपार्ट दर्ज कराई गई है। लेकिन अभी कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि विवाद न्यायालय में विचाराधीन है न्यायालय के निर्णयानुसरा आगे की कार्यवाही की जायेगी। थानाध्यक्ष मांट धर्मेन्द्र धहिया का कहना है कि मौके पर शान्ति व्यवस्था हेतु पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। उन्होंने सत्ताधारी पार्टी के नाम पर दुकानों पर कब्जा दिलाने के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि कानून व्यवस्था के साथ किसी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जायेगा, जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही होगी।

गौशाला की दुकानों पर कब्जे के बाद एकत्रित पुलिस-प्रशासन एवं भाजपा नेता

दूसरी तरफ राजनैतिक नेताओं, भू माफियाओं-दबंगों द्वारा गौशाला की जमीन एवं दुकानों पर कब्जा होते देख अलग-अलग गुटों में बंटे बाबा सन्त महन्त आपसी लड़ाई को भूलकर एकजुट हो गये हैं बल्कि सपा, बसपा, कांगे्रस सहित सभी सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता ही नहीं सत्ताधारी भाजपा के विरोधी गुट के नेता भी पर्दे के पीछे भी सन्तों के साथ खड़े होने से सत्ता की लाठी के सहारे पार्टी कार्यालय के नाम पर 500 करोड़ की सम्पत्ति पर कब्जा कर विदेशों की तर्ज पर भव्य माॅल बनाने का स्वप्न संजोये नेता जहां बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। बल्कि पुलिस-प्रशासन ने भी खामोशी ओढ़ ली है। जिसमें रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी नामजदों को सत्ता की धमक में किसी को गिरफ्तार करने की हिम्मत नहीं जुटा सकी है। बताते हैं कि भाजपा कार्यालय के नाम पर कब्जाई करोड़ों की चारों दुकानों की दीवार तोड़कर कार्यालय में गायों का भूसा भर दिया गया है। बल्कि गौशाला के सन्त गोविन्द गिरी द्वारा पुलिस-प्रशासन, भाजपा नेताओं के सामने निर्वस्त्र होकर गाली-गलौज, गौशाला कब्जाने के आरोपों के साथ भूसा भरने के आरोपों के कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहे हैं। इसे लेकर सत्ताधारी पार्टी में हाईकमान तक हड़कम्प मचा हुआ है। भाजपा नेताओं-माफियाओं के गौशाला कब्जाने का सपना आखिर पूरा होगा भी या नहीं लेकिन सांठ-गांठ कर गौशाला की 100 करोड़ की सम्पत्ति पर कब्जा कर भव्य माॅल खड़ा करने का सपना देख रहे दिग्गजों के सपने साकार होते नजर नहीं आ रहे हैं। बल्कि ‘‘बड़े बे-आबरू होकर हम तेरे कूंचे से बाहर निकल’’ की पंक्तियां सटीक साबित हो रही हैं। बल्कि ‘‘हमें तो अपनों ने लूटा गैरों में कहां दम था, मेरी कश्ती वहां डूबी जहां पानी कम था’’ गुनगुनाते हुए अब अपनों पर ही तीर छोड़ने में लगे हैं। देखना होगा कि इस मामले पर पार्टी हाईकमान आखें मूदता है या फिर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही करता है।

मांट गौशाला के अन्दर गाय