‘खेलो इंडिया’ कैम्पेन से बन रहा है ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’

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वृन्दावन। वात्सल्य ग्राम में आयोजित राष्ट्रीय मल्लखम्ब प्रतियोगिता (जोन 2) में खिलाड़ियों ने मल्लखम्ब पर अपने हैरतअंगेज करतबों से दर्शकों को अचंभित कर दिया । प्रतियागिता के दूसरे दिन सुबह सभी खिलाड़ियों का क्वालिफाइंग कम्पटीशन हुआ । मल्लखम्ब फेडरेशन आॅफ इण्डिया के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने विभिन्न राज्यों से आये खिलाड़ियों से परिचय किया ।

शनिवार को टीम चैम्पियनशिप के लिये दो-दो राज्यों की जोड़ी टीमें बनायीं गयीं । इन पेयर टीमों के पुरूष खिलाड़ियों ने पिरामिड, पोल व हैंगिंग मल्लखम्ब पर अपना प्रदर्शन किया वहीं महिला खिलाड़ियों ने रोप मल्लखम्ब पर अपनी प्रतिभा दिखायी । इनमें से अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों का चयन उपकरण (पोल, रोप व हैंगिग) कम्पटीशन के लिये किया गया । रविवार को आॅल राउण्ड कम्पटीशन होगा । जिसमें विेजेता टीम की घोषणा होगी ।

इस अवसर पर मल्लखम्ब फेडरेशन आॅफ इण्डिया के अध्यक्ष रमेश कुमार इंदौलिया नेे कहा कि मल्लखम्ब शरीर के सभी अंगो का व्यायाम है । यह भारत का योग पर आधारित प्राचीन खेल है जिसमें ऐढ़ी से लेकर चोटी तक शरीर के अंग-प्रत्यंग का प्रयोग होता है । सरकार ने पूरे भारत में 100 मल्लखम्ब प्रशिक्षण सेन्टर बनाये हैं जिनमें वालियंटर प्रशिक्षकों के माध्यम से इस खेल के प्रति जनजागृति फैलायी जा रही है । प्रति सेन्टर एवं खिलाड़ियों को खेल सम्बन्धित उपकरणों के लिये 3.5 लाख की राशि भारत सरकार द्वारा प्रदान की जा रही है ।

वात्सल्य ग्राम में खुलेगा ‘मल्लखम्ब प्रषिक्षण केन्द्र’

फेडरेशन अध्यक्ष ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 4 मल्लखम्ब प्रशिक्षण सेन्टर हैं जिनमें 1 आगरा, 1 मथुरा एवं 2 झाॅसी में हैं । इसमें बालकों के साथ बालिकाओं के लिये भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है । जल्द ही पूरे देश में 186 नये सेन्टर खोले जाने हैं । इस कड़ी में वात्सल्य ग्राम में भी एक प्रशिक्षण केन्द्र खोला जायेगा । जिससे यहाँ अध्यय्न कर रही बेटियों को भी इस खेल के ंमाध्यम से शारीरिक विकास और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें । गौरतलब है कि मथुरा में 1 सेन्टर जिला ओलम्पिक संघ सचिव कन्हैया गुर्जर के निर्देशन में संचालित है ।

दो-दो राज्यों की बनायी टीम, मिलकर करेंगे प्रदर्षन

प्रतियोगिता में उत्तर प्रदेश और अरूणाचल प्रदेश, दिल्ली और सिक्किम, केरला और हिमाचल प्रदेश तथा मध्य प्रदेश, मेघालय और नागालैण्ड की टीमें बनायी गयीं हंै । यह टीम मिलकर प्रदर्शन करेगीं । रविवार को आॅल राउण्ड मुकाबला होगा जिसमें प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय टीम का चुनाव होगा । प्रत्येक टीम से 6-6 खिलाड़ी प्रतियोगिता के अन्तिम फायनल जोन के लिये जायेंगे । वहीं पूरी प्रतियोगिता में एकल प्रदर्शन के खिलाड़ी भी पुरूष्कृत होंगे । शनिवार को यूपी-अरूणाचल की टीम आगे चल रही थी ।

इस अवसर पर यूपी मल्लखम्ब फेडरेशन अध्यक्ष सजींव सर्राफ, महेन्द्र प्रताप, सी.पी. सारस्वत, विभोर कुमार, दिलीप गवाने आदि उपस्थित रहे। ब्रजेश द्विवेदी, रवि प्रकाश, योगेश मालवीय, एन. जयचन्द्र, यशपाल खींची, विशाल पाटिल आदि जज पैनल में शामिल थे ।

अलग राज्य, अलग संस्कृति, खिलाड़ियों का वृन्दावन में संगम

मल्लखम्ब प्रतियोगिता में 9 राज्यों से भाग लेने आये प्रतिभागियों की संस्कृति और भाषा अलग-अलग है । केरला से आये बच्चों को हिंदी नहीं आती । सिक्किम की टीम के लिये मल्लखम्ब बिल्कुल नया खेल है, लेकिन जोड़ी टीम में दिल्ली के खिलाड़ी उन्हें प्रेरित करते हैं । प्रतियोगिता के दूसरे ही दिन सभी प्रतिभागियों को यह खेल के साथ-साथ एक दूसरे के रहन-सहन और बोली का खूब अंदाजा हो गया है । खिलाड़ियों की टीम में 8 साल की नाव्या से लेकर 21 साल के कपिल तक शामिल हैं । सभी एक साथ ठहरे हैं ।

खेल के बाद सभी खिलाड़ी एक टीम में बदल जाते हैं जहाँ केवल भारत की बात होती है । इन्हें देखकर लगता है कि विभिन्न राज्यों की संस्कृति का वृन्दावन में संगम हो गया है । फेडरेशन के पूर्व सचिव सुजित शेरडे कहते हैं कि मोदी सरकार द्वारा लाॅच की गयी ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ योजना का यही लक्ष्य है । इसमें अलग-अलग राज्यों के युवाओं को ‘खेलों इंडिया’ कैम्पेन के माध्यम से एक मंच पर लाकर उनकी कला, सस्ंकृति की एक-दूसरे से साझा करने की कोशिश होती है । यही कारण है कि विपरीत संस्कृति के राज्यों की टीमें बनायीं गयी हैं ।