कटघरे में खाकी : डाॅ. अपहरण काण्ड – जयगुरूदेव के मामले में फंसे पुलिस अफसर!

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मथुरा। ‘‘सुरक्षा आपकी, संकल्प हमारा’’ यूपी पुलिस का ये स्लोगन भले ही आम जनता के लिये बनाया गया हो लेकिन मथुरा में यह नारा उल्टा दिखाई देता है। जहां प्रमुख चिकित्सक के अपहरण कर्ताओं एवं जयगुरूदेव की हजारों करोड़ की सम्पत्ति के हेर-फेर में फंसे पंकज यादव और उनके परिजनों को बचाने के खेल ने जता दिया है कि अब पुलिस जनता के लिये नहीं अपराधियों की सुरक्षा के प्रति सजग है। इन दोनों मामलों की यूपी से लेकर केन्द्र सरकार तक शिकायत होने के बाद भले ही हंगामा मचा हो। लेकिन राजनैतिक संरक्षण के चलते दोनों मामलों पर पर्दा डालने का खेल खेला जा रहा है।

‘‘परित्राणाय साधूनाम् विनाशाय च दुष्कृताम’’ अर्थात अच्छे का संरक्षण बुरे का विनाश का ये वाक्य आपको यूपी के हर थानों में घुसते ही पढ़ने को मिलेगा। पिछले माह हुए दो मामलों को लेकर मथुरा पुलिस की कार्यशैली ही कटघरे में हैं। जिसके कारण मथुरा से लेकर लखनऊ तक हंगामा मचा हुआ है। पहला मामला गौ लोकवासी सन्त तुलसीदास उर्फ बाबा जयगुरूदेव की 5 हजार करोड़ से अधिक सम्पत्ति को अभिलेखों में कूट रचना कर हड़पे जाने का है। जिसकी रिपोर्ट 4 जनवरी 2020 को जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ट ट्रस्टी राम प्रताप सिंह ने पंकज यादव सहित उनके परिजनों एवं सहयोगियों के विरूद्ध थाना हाइवे में दर्ज कराई गई थी।

बताते हैं कि तीन माह की जांच पड़ताल के बाद पुलिस अफसरों के आदेश के बाद दर्ज कराई रिपोर्ट में 27/28 जनवरी 2020 की रात्रि को थाना हाइवे में आनन-फानन में पंकज यादव सहित अन्य आरोपियों को क्लीन चिट देकर वरिष्ट पुलिस अधिकारियों द्वारा एफआर लगवा दी गई। जिसकी भनक तत्काल ही वादी राम प्रताप सिंह को हो गई और उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर मोटी रकम लेकर एफआर लगाने का आरोप लगाते हुए 28 जनवरी को पीएमओ, सीएम, डीजीपी, ग्रहमंत्री सहित अन्य उच्च अधिकारियों को ई-मेल एवं ट्वीटर के माध्यम से शिकायत की। बल्कि 29 जनवरी को व्यक्तिगत रूप से अपर पुलिस महानिदेशक आगरा जौन अजय आनन्द से मुलाकात कर पुलिस अधिकारियों पर करोड़ों की राशि वसूलकर एफआर लगाने की जांच की मांग की। एडीजी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अपने स्टाॅफ आॅफिसर मनीषा सिंह को मथुरा जांच के लिये भेजा। जिसमें जांच अधिकारी ने मथुरा के अधिकारियों के ब्यान दर्ज कर अपनी रिपोर्ट में पुलिस अधिकारी की भूमिका को संदिग्ध माना। जिसके आधार पर आईजी आगरा रेंज ए सतीश गणेश ने 30 जनवरी 2020 को थाना हाइवे द्वारा लगाई गई एफआर को निरस्त कर पुलिस अधिकारियों को तलब कर लिया। बल्कि अग्रिम विवेचना को आगरा के लिये ट्रांसफर कर दिया गया।

जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष राम प्रताप सिंह द्वारा पीएमओ सहित अन्य उच्च अधिकारियों को ट्वीटर पर की शिकायत

सूत्र बताते हैं हजारों करोड़ की सम्पत्ति को कब्जाने के आरोपों में फंसे पंकज यादव एवं अन्य को बचाने के लिये मोटा खेल खेला गया। जिसमें जयगुरूदेव सम्पत्ति विवाद से जुड़े सूत्रों का कहना है कि एक बड़े पुलिस अधिकारी को एफआर लगाने के बदले 11 बीघा जमीन जयगुरूदेव मन्दिर के पीछे सलेमपुर रोड़ पर दिलाई गई जोकि नजदीकी लोगों के नाम पर रजिस्ट्ररी की गई है। इसी तरह वृन्दावन में भी उक्त पुलिस अधिकारी द्वारा अपने नजदीकी लोगों के नाम भी करोड़ों की जमीन खरीदी गई है। उक्त मामले की जानकारी भी लखनऊ से लेकर दिल्ली तथा उच्च अधिकारियों को दी गई है। जिसकी गोपनीय जांच-पड़ताल भी चल रही है।

जयगुरूदेव विवाद: मथुरा पुलिस ने लगाई एफआर, आईजी ने की निरस्त, आगरा में होगी विवेचना

बाबा जयगुरूदेव प्रकरण मे फंसे पुलिस अधिकारी अपने बचाव में जुटे हुए थे कि इसी दौरान जनवरी के पहले सप्ताह में महोली रोड़ स्थित प्रमुख हड्डी रोग डाॅ. का बदमाशों ने अपहरण कर करीब 55 लाख की फिरौती वसूल कर ली। इसके बाद वसूली करने के लिये बदमाशों द्वारा चिकित्सक पर पुनः दबाव बनाये जाने पर चिकित्सक ने अपने एक सहपाठी से चर्चा की तो इसकी शिकायत पुलिस से की गई जिसपर पुलिस ने मेरठ के बदमाश की निशानदेही पर तीन अन्य बदमाशों को हिरासत मे लेकर चिकित्सक से वसूली गई रकम करीब 55 लाख की रकम को बरामद कर बदमाशों को छोड़ दिया गया।

सूत्र बताते हैं कि अपहरण के बाद दहशत में आये प्रमुख चिकित्सक ने तीन-चार दिन तक अपना क्लीनिक बन्द रखा। बल्कि दरेसी रोड़ पर एक संस्था द्वारा संचालित चिकित्सालय भी जाना बन्द कर दिया गया था। एक तरफ जहां पुलिस सूत्र चिकित्सक से करीब 55 लाख की फिरौती में वसूलने का दावा कर रहे हैं। जिसमें पुलिस द्वारा बदमाशों से बरामद 55 लाख की राशि में से 15 लाख की राशि चिकित्सक को लौटाने एवं 40 लाख की राशि पुलिस द्वारा हड़पे जाने की चर्चाऐं मथुरा से लेकर लखनऊ तक हो रही हैं। जबकि बदमाशों को छोड़ने के बदले भी मोटी रकम वसूलने की चर्चाऐं हैं।

जानकार सूत्र बताते हैं कि चिकित्सक अपहरण में पुलिस अफसरों की भूमिका की शिकायत एडीजीपी आगरा से किये जाने पर मथुरा पुलिस की जांच कराई गई जिसमें घटना की पुष्टि एवं पुलिस अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की रिपोर्ट प्रेषित की गई।

बताते हैं कि चिकित्सक अपहरण मामले की गूंज शासन स्तर पर होने के बाद पूरे प्रकरण की जांच आईजी आगरा रेंज ए सतीश गणेश को सौंपी गई है। जिसमें आईजी आगरा ने एसएसपी, एसपी सिटी, सीओ रिफाइनरी, एसओ हाइवे, एसओ छाता सहित एक दर्जन करीब पुलिस अधिकारियों को ब्यान हेतु तलब किये जाने पर जहां पुलिस प्रशासन में हड़कम्प मचा हुआ है। वहीं अपहत चिकित्सक खामोशी ओढ़े हुए है। इस सम्बन्ध में चिकित्सक से ‘‘विषबाण’’ टीम द्वारा उनके महोली रोड़ स्थित क्लीनिक पर सम्पर्क करने की कोशिश की गई लेकिन क्लीनिक बन्द पड़ा हुआ था। इस सम्बन्ध में अन्य चिकित्सकों से भी सम्पर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि अपहृत चिकित्सक द्वारा ना तो आईएमए को अवगत कराया गया है और ना ही अन्य चिकित्सकों को ही घटना की जानकारी दी गई है जिससे मामले की जानकारी होने से अन्य चिकत्सक इंकार कर रहे हैं।

जय गुरूदेव एवं चिकित्सक अपहरण मामले की गूंज शासन स्तर पर होने के बाद अधिकारियों पर जल्द गाज गिरने की उम्मीद जताई जा रही है। पुलिस विभाग में चर्चा है कि जब एक लाख रुपये गबन-धोखाधड़ी आदि की रिपोर्ट बगैर उच्च अधिकारियों के आदेश के थाने में दर्ज नहीं हो सकती है तब चिकित्सक अपहरण मामले में स्थानीय पुलिस वरिष्ट अधिकारियों की मर्जी के बिना कैसे बड़ा कदम उठा सकती है।

उमेश माहेश्वरी अपहरण काण्ड में सीओ को भेजा था जेल

शहर के प्रमुख हड्डी रोग चिकित्सक के अपहरण मामले में पुलिस अफसरों की कार्यशैली एक बार फिर कटघरे में है। इससे पूर्व डाॅ. उमेश चन्द माहेश्वरी अपहरण मामले में भी वसूली गई 11.30 लाख की राशि के साथ सीओ को जेल भेजा जा चुका है।

वर्ष 2003 में शहर के प्रमुख चिकित्सक उमेश चन्द माहेश्वरी का भी बदमाशों ने अपहरण कर 60 लाख की फिरोती वसूली थी। उसके बाद उनसे 15 लाख की और मांग की जा रही थी। इस अपहरण काण्ड उस समय त्रिदीप सिंह नामक सीओ भी सांठ-गांठ अपहरण कर्ताओं से पाये जाने पर उनके कब्जे से 11.30 रकम बरामद करते हुए पुलिस ने जेल भेज दिया गया था। हालांकि बाद में वह न्यायालय से बरी हो गये थे और बरामद रकम भी उन्हें दे दी गई थी।

सूत्र बताते हैं कि डाॅ. माहेश्वरी अपहरण काण्ड मे ंपुलिस ने कई अन्य प्रमुख लोगों को फंसाने की कोशिश की थी। जिन्हें बचाने के बदले 8 लाख की मांग एक प्रमुख चिकित्सक से की गई थी। मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस-प्रशासन को बैकपुट पर आना पड़ा तब जाकर मामला ठण्डा हो सका था। सूत्रों का कहना है दोनों चिकित्सकों का मामला एक ही तरह का है। दोनों से पहले एक समान फिरौती वसूली गई फिर 15 लाख की वसूली के खेल के चलते दोनों मामलों का खुलासा हो गया। लेकिन डाॅ. माहेश्वरी प्रकरण में खुलकर चिकित्सक सामने आ गये थे। लेकिन वर्तमान प्रकरण में अपहत चिकित्सक सहित अन्य चिकित्सक खामोशी ओढ़े हुए हैं।

अपहरण से पूर्व हो चुकी है 2 चिकित्सकों से चौथ वसूली

हड्डी रोग चिकत्सक के अपहरण मामले में जहां चिकित्सक खामोशी ओढ़े हुए है वहीं दूसरी तरफ बदमाशों द्वारा दो अन्य चिकित्सकों से भी 50 लाख से अधिक की अवैध वसूली की चर्चाऐं दबी जुबान से चल रही हैं। जिससे चिकित्सकों में दहशत का माहौल साफ देखा जा सकता है।

भरोसे मन्द सूत्रों के मुताबिक हड्डी चिकित्सक के अपहरण से पूर्व दो अन्य प्रमख चिकित्सकों से भी बदमाशों द्वारा 50 लाख से अधिक की वसूली अपहरण-हत्या के नाम पर की गई थी। लेकिन दहशत के चलते वह खामोशी ओढ़ गये। सूत्रों का कहना है कि अगर उक्त चिकित्सक पुलिस में शिकायत दर्ज करा देते हैं तो हड्डी रोग चिकित्सक का अपहरण नहीं हो पाता। सूत्र बताते हैं कि चिकित्सक द्वारा चौथ में आनाकानी करने पर बदमाशों द्वारा अपहरण की घटना को अंजाम दिया गया। चिकित्सा से जुड़े सूत्रों का कहना है कि चिकित्सक अपहरण में पुलिस की भूमिका ने जता दिया है कि अब उससे भी सुरखा की उम्मीद करना बेमानी है। अब चिकित्सकों को अपनी सुरक्षा के लिये स्वयं कदम उठाने होंगे।

जयगुरूदेव प्रकरण में पंकज यादव गुट को मिला कोर्ट से झटका

जयगुरूदेव की हजारों करोड़ की सम्पत्ति को लेकर सड़क से लेकर न्यायालय तक छिड़ी जंग में चल रहे सहमात के खेल में सिविल न्यायालय ने पंकज यादव समर्थकों को झटका देते हुए मुकद्मे में वादी पक्षकार बनाने के दावे को खारिज कर दिया बल्कि प्रतिद्वंदी ग्रुप के तीन सदस्यों को पक्षकार बनाने का आदेश दिया है।

सिविल जज छाया शर्मा के न्यायालय में जय गुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था बनाम पंकज यादव के मुकद्मा संख्या 595/2012 में वादी बनने के पंकज यादव के चाचा हरदयाल उर्फ वीर सिंह यादव ने याचिका दायर की थी, जब पंकज यादव के नजदीकी सुरेन्द्र सिंह यादव एवं अजय सिंह यादव तथा जयगुरूदेव के शिष्य शैलेन्द्र सिंह चौहान, अनेक सिंह, नाथूराम शर्मा ने पक्षकार बनाने का दावा किया। जिसमें न्यायालय ने हर दयाल उर्फ वीर सिंह के वादी तथा सुरेन्द्र सिंह, अजय सिंह के पक्षकार बनने के दावे को निरस्त कर दिया। जबकि प्रतिद्वंदी के शैलेन्द्र सिंह चौहान, अनेक सिंह नाथूराम शर्मा को पक्षकार बनाना स्वीकार कर लिया।

बताते हैं कि पंकज यादव के चाचा हरदयाल यादव जहां राम प्रताप सिंह द्वारा दर्ज कराई गई रिपेार्ट में नाम जद हैं। वहीं अजय, सुरेन्द्र भी नजदीकी हैं। नयायालय से झटका लगने एवं थाने हाइवे में एफआर निरस्त होने से जहां पंकज यादव घिरते नजर आ रहे हैं वहीं दूसरी तरफ जय गुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष राम प्रताप सिंह जयगुरूदेव आश्रम सहित हजारों करोड़ की सम्पत्ति पर रिसीवर नियुक्त करने की तैयारी में जुटे हैं। जबकि दूसरी तरफ पंकज यादव सहित अन्य परिजनों की गिरफ्तार पर रोक लगाने के लिये पंकज यादव के भाई नरीज यादव की याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लम्बित है। जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

जयगुरूदेव विवाद : कानून के चक्रव्यूह में फंसा पंकज यादव का कुनबा, क्या जा पायेगा जेल…