यूपी, एमपी, छत्तीसगढ़, राजस्थान कुलपति नियुक्ति में हुआ घोटाला, पीएमओ-राज्यपाल कार्यालय तक हंगामा

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नई दिल्ली। ’’अंधा बांटे रेवड़ी, फिर फिर अपने कूं दे’’ कि कहावत उ.प्र., राजस्थान, छत्तीसगढ़ मध्यप्रदेश के विश्व विद्यालयों के कुलपति चयन में सटीक चरितार्थ साबित हुई हैं। जहां नियम-कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए राज्यपालों द्वारा मनमानी तरीके से कुलपतियों का चयन कर दिया गया। जिसका खुलासा आरटीआई में होने के बाद पीएमओ, राष्ट्रपति से शिकायत कर सभी नियुक्तियों को निरस्त कर उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है। इस मामले पर पीएमओ से लेकर राज्यपाल भवन तक हड़कम्प मचा हुआ है।

डॉ. आर.के. बघेरवाल

केन्द्र की मोदी सरकार के तमाम दावों के बावजूद भीमें भ्रष्टाचार-घोटाले के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिसमें पं. दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान मथुरा, कामधेनु विश्व विद्यालय दुर्ग छत्तीसगढ़, नानाजी देशमुख वेटरनरी यूनिवर्सिटी जबलपुर, मध्यप्रदेश एवं राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्व विद्यालय बीकानेर के कुलपति चयन में सभी नियम कानूनों को ताक पर रखा गया बल्कि मुर्दों को जिन्दा दर्शाकर चयन प्रक्रिया को राज्यपालों द्वारा अंजाम दिया गया। जिसका खुलासा पशुपालन महाविद्यालय महू (मध्यप्रदेश) के प्रधानाध्यापक डॉ. आर.के. बघेरवाल द्वारा मांगी गई आरटीआई में हुआ है। जिसमें उ.प्र. के तत्कालीन राज्यपाल रामनाइक के कार्यकाल में मथुरा पशु चिकित्सा विश्व विद्यालय के तत्कालीन कुलपति प्रो. के.एम.एल पाठक का कार्यकाल 3 मार्च 2019 को समाप्त होने से पूर्व ही नये कुलपति के रूप में गोविन्द बल्लभ पन्त के डीन डॉ. गिरजेश कुमार सिंह को 27 फरवरी 2019 को मथुरा विश्व विद्यालय के कुलपति के रूप में नियुक्ति के आदेश जारी कर दिये गये।

मथुरा विश्व विद्यालय के कुलपति पद के लिये 18 आवेदनों में से 5 नामों का चयन समिति द्वारा किया गया जिसमें डॉ. चन्द्रवीर सिंह काकरा पन्तनगर, डॉ. दीपक शर्मा बरेली, डॉ. गिरजेश कुमार सिंह पन्तनगर, ले.ज. जगविन्दर सिंह, डॉ. सीता प्रसाद तिवारी के नामों का पैनल राज्यपाल कार्यालय को भेजना दर्शाया गया। जबकि 5 आवेदन कर्ताओं में से डॉ. दीपक शर्मा एवं ले.ज. जगविन्दर सिंह की आवेदन से सालों पूर्व ही मौत हो चुकी थी। कुलपति की नियुक्ति में फर्जीवाड़े का अन्दाजा इसी से लगाया जा सकता है सविंदा कर्मी से लेकर चपरासी की भर्ती के लिये तो सरकारी विज्ञप्ति/विज्ञापन जारी किये जाते हैं लेकिन कुलपति चयन प्रक्रिया में इसका पालन ही नहीं किया गया। आरटीआई में जब चयन समिति द्वारा पैनल में भेजे गये 5 नामों के आवेदकों का विवरण मांगा गया तो उनमें से मात्र दो कुलपति गिरजेश कुमार और सीता प्रसाद तिवारी का विवरण ही उपलब्ध कराया गया। जबकि तीन अन्य आवेदकों का विवरण उपलब्ध ही नहीं हो सका।

पं. दीनदयाल उपाध्याय वेटरनरी विश्व विद्यालय मथुरा के कुलपति नियुक्ति में फर्जीवाड़े के खेल पर पर्दा डालने का खेल राज्यपाल कार्यालय द्वारा खुलकर खेला गया जिसमें आरटीआई की जानकारी में बताया गया कि कुलपति नियुक्ति पूरी प्रक्रिया उ.प्र. के पशुधन विभाग द्वारा की गई है। जबकि दूसरी तरफ पशुधन विभाग द्वारा आरटीआई में दी गई जानकारी में बताया गया कि उसके द्वारा कोई भी प्रक्रिया कुलपति चयन के लिये नहीं अपनाई गई पूरी प्रक्रिया राज्यपाल द्वारा की गई है। कोई भी प्रक्रिया अपनाने से इंकार करते हुए राज्यपाल द्वारा कुलपति नियुक्त की प्रक्रिया अपनाने का जबाब देता रहा। जिसमें राष्ट्रपति एवं पीएमओ कार्यालय शिकायत होने के बाद उ.प्र. राज्यपाल कार्यालय द्वारा कुलपति की चयन प्रक्रिया को स्वीकार किया गया। लेकिन कुलपति चयन को निरस्त करने की जगह घोटाले पर पर्दा डालने का खेल अभी भी जारी है। उ.प्र. मे कुलपति नियुक्ति में घोटाले का मामला पहला हो ऐसा नहीं है। इसी तरह इससे पूर्व छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग की कुलपति नियुक्ति में भी घोटाला सामने आया जहां राज्यपाल द्वारा डॉ. एन.पी. दक्षिणकर को नियम विरूद्ध तरीके से कुलपति पद पर नियुक्ति कर दी गई। बल्कि दक्षिणकर को नानाजी देशमुख वेटरनरी यूनिवर्सिटी जबलपुर के कुलपति चयन जो फरवरी 2020 में होना है की चयन प्रक्रिया में नामित कर दिया गया है। इससे पूर्व 2016 में इसी विश्वविद्यालय में कुलपति चयन पैनल में डॉ. एससी दुवे, डॉ. त्रिवेणी दत्त, डॉ. प्रयाग दत्त जुआल को शामिल किया गया। जिसमें त्रिवेणीदत्त के वेटनरियन ना होने की शिकायत पर उनके नाम को पैनल से तो हटा दिया गया लेकिन उनके स्थान पर किसी नये नाम को शामिल नहीं किया गया और प्रयाग दत्त जुआल को ही कुलपति नियुक्त कर दिया गया जबकि कम से कम 3 सदस्यी पैनल में से कुलपति चयन होना अनिवार्य है लेकिन उसका भी पालन नहीं किया गया।

डॉ. बाघेरवाल का कहना है कि छत्तीसगढ़ कामधेनु विश्व विद्यालय दुर्ग के कुलपति चयन के लिये नामित किये गये पन्तनगर यूनिवर्सिटी के तत्कालीन कुलपति डाॅ.  ए.के. मिश्रा के चयन को उच्च न्यायालय बिलासपुर में याचिका संख्या 2606/17 के माध्यम से चुनौती दी गई। जिसे उच्च न्यायालय ने स्वीकार करते हुए डॉ. ए.के. मिश्रा के चयन को अवैधानिक मानते हुए छत्तीसगढ़ चयन कुलपति प्रक्रिया को ही निरस्त कर दिया था। जबकि उसी डॉ. ए.के. मिश्रा को नियम विरूद्ध तरीके से केन्द्रीय सचिवालय द्वारा ए.सी.आर.बी का चेयरमैन पद पर नियुक्ति कर दिया गया। जिसकी जानकारी आरटीआई में मांगे जाने पर केन्द्रीय सचिवालय जानकारी देने से इंकार कर रहा है। जिसकी शिकायत केन्द्रीय सूचना आयुक्त उनके द्वारा की गई है। श्री बघेरवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की है कि देश की समस्त वेटरनरी विश्व विद्यालय में कुलपति के चयन में परिदर्शिता एवं नियमों के अनुसार राजभवन द्वारा चयन प्रक्रिया निष्पादित नहीं की जा रही है। जिनकी जांच कराकर सम्बंधित राज्यों को राज्यपालों/कुलाधिपतियों को उचित निर्देश देकर कार्यवाही करने की मांग की गई है।

डॉ. बघेरवाल ने बताया कि उ.प्र. एवं छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश की तरह राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्व विद्यालय बीकानेर के कुलपति चयन समिति एवं पैनल में भेजे गये नामों, अपनाई गई चयन प्रक्रिया की प्रमाणित प्रति आरटीआई में पिछले एक साल से अधिक समय से राज्यपाल सचिवालय जयपुर से जानकारी मांगी जा रही है। लेकिन वहां भी कुलपति की नियुक्ति में घोटाला होने के कारण राज्यपाल कार्यालय द्वारा सूचना उपलब्ध ना कराये जाने पर राजस्थान सूचना आयोग में शिकायत की गई है।

डॉ. बघेरवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की है कि देश की समस्त वेटरनरी विश्व विद्यालय में कुलपति के चयन में परिदर्शिता एवं नियमों के अनुसार राजभवन द्वारा चयन प्रक्रिया निष्पादित नहीं की जा रही है। जिनकी जांच कराकर सम्बंधित राज्यों को राज्यपालों/कुलाधिपतियों को उचित निर्देश देकर कार्यवाही करने की मांग की गई है।
डॉ. बघेरवाल की शिकायतों के बाद केन्द्रीय सचिवालय से लेकर राजभवनों तक हड़कम्प मचा हुआ है और मामले पर पर्दा डालने का प्रयास किया जा रहा है।

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