जयगुरूदेव विवाद : कानून के चक्रव्यूह में फंसा पंकज यादव का कुनबा, क्या जा पायेगा जेल…

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मथुरा. अपने भक्तों को कलयुग में सतयुग का सपना दिखाने वाले गौलोक वासी सन्त तुलसीदास उर्फ बाबा जय गुरूदेव की यह भविष्यवाणी उनके जीते जी तो साकार नही हो सकी हो लेकिन बाबा का निधन होते ही 5 हजार करोड़ से अधिक की चल-अचल सम्पत्ति पर कलयुग का असर साफ दिखाई देने लगा है जिसमें किसी कलयुगी भक्त ने फर्जीवाड़ा कर करोंड़ों की जमीनों को अपने नाम करा लिया है तो कोई हजारों करोड़ की चल सम्पत्ति को ले उडा। इस दौलत की लड़ाई में जयगुरूदेव के चालक पंकज यादव अपने कुनबे के साथ जहां कानून के चक्रव्यूह में फंसते नजर आ रहे है वहीं कानूनी के चक्रव्यूह से बचने के लिये वह हाईकोर्ट की शरण में पहुँच गये है । जबकि दूसरा गुट पंकज यादव के कुनवे की गिरफ्तारी के लिये सक्रिय हो उठा है।

मथुरा स्थित होटल में पत्रकारों को जानकारी देते जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ ट्रस्टी रामप्रताप सिंह, अधिवक्ता प्रदीप राजपूत आदि।

मथुरा में आगरा-दिल्ली हाईवे स्थित सैकड़ों एकड़ क्षेत्र में फैले आलीशान जयगुरूदेव मन्दिर की हजारों करोड़ की चल-अचल संपत्ति पर कब्जा करने की लड़ाई उस समय ही शुरू हो गई थी जब 18 मई 2012 को तुलसीदास उर्फ बाबा जयगुरूदेव का रहस्यमय स्थिति में निधन हो गया था। जिसमें उनके अन्तिम संस्कार को लेकर भक्तों के बीच विवाद शुरू हो गया था बल्कि उनके उत्तराधिकारी की जंग भी खुलकर सामने आ गई थी। जिसमे आनन-फानन में कथित रूपसे उनके चालक पंकज यादव को उत्तराधिकरी घोषित कर दिया गया था। जिसको दूसरे उत्तराधिकारी के दावेदार उमाकान्त तिवारी एवं तीसरे गुट के वरिष्ट ट्रस्टी एवं जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष राम प्रताप सिंह द्वारा भी सड़क से लेकर उच्च न्यायालय तक चुनौती दी गई। जिसमें उमाकान्त तिवारी गुट ने उत्तराधिकार की लड़ाई से अपने कदम पीछे खींचते हुए कानूनी लड़ाई पर ब्रेक लगा दिया।

बाबा जयगुरूदेव के निधन के साथ ही मथुरा, उज्जैन, खितौरा (इटावा) में फैली 500 एकड़ से अधिक बेसकीमती जमीन को हथियाने एवं हजारों करोड़ो की नगदी, सोना को कब्जाने का खेल कथित उत्तराधिकारियो के मध्य शुरू हो गया जिसमें जय गुरूदेव के ही कथित शिष्य दिनेश भायल पुत्र माधव भायल निवासी उज्जैन मध्य प्रदेश जिन्होने जय गुरूदेव के निधन से पूर्व उज्जैन में सगंत प्रमुख के रूप में जय गुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था मथुरा के नाम से अलग-अलग क्रेताओं से जमीनों की खरीद-फरोख्त की थी को स्वयं मालिक बनकर जय गुरूदेव के निधन के बाद स्वयं ही क्रेता-विक्रेता बनकर अपने नाम करा लिया गया। जब कि दूसरी तरफ जयगुरूदेव धर्म प्रचारक ट्रस्ट मथुरा के 5 ट्रस्टीगणों आर.के श्रीवास्तव, राम प्रताप सिंह, शुशीला भवंर, मनु भाई पटेल, आशा देवी में से मात्र 2 ट्रस्टी मनु भाई पटेल एवं आशा देवी ने पंकज यादव को जय गुरूदेव का उत्तराधिकारी घोषित कर उपनिबन्धक फर्म्स सोसाइटी एवं चिट्रस आगरा के यहां पत्रावली दाखिल कर दी गई। जिसमें पंकज यादव को ट्रस्ट का अध्यक्ष घोषित कर सम्पूर्ण अधिकार दिये जाने की सन्तुति कर हाइवे स्थित आश्रम एवं मन्दिर पर एकाधिकार कर लिया गया।

दूसरी तरफ ट्रस्ट के तीन ट्रस्टीगण राम प्रताप सिंह, आर. के. श्रीवास्तव शुशीला भंवर द्वारा पंकज यादव की अध्यक्ष पद की नियुक्ति को अवैध बताते हुऐ शासन-प्रशासन-न्यायालय, बैंकों में में शिकायतें की गई जिसपर बैंक खातों के संचालन पर रोक लगा दी गई।

जय गुरूदेव संस्था से जुडे़ सूत्रों का कहना है कि जिस समय बाबा जयगुरूदेव का निधन हुआ था उस समय बैंकों में ही 270 करोंड से अधिक की एफ.डी.आर थीं जब कि करीब 800 करोंड़ की नगदी मन्दिर के अलावा मन्दिर के कलश निर्माण हेतु एकत्रित किये गये करीब साढ़े नौ कुन्टल सोने के साथ ही हीरे-जवाहरातों को हड़प कर लिया गया था जब कि बैंकों में जमा एफडीआर की रकम को निकालने में सफल नही हो सके थे। संस्था से जुडे लोगों का कहना है कि बैकों द्वारा जय गुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था एवं ट्रस्ट के खातों पर रोक लगने के बाद अन्य बैकों में संस्था एवं ट्रस्ट के नामों से नये खाते खुलकर गैर कानूनी ढंग से लेन-देन किये गये।

जयगुरूदेव समाधि स्थल

बाबा जय गुरूदेव की चल- अचल सम्पत्ति का विवाद अब थम ही नही रहा था कि पंकज यादव द्वारा जय गुरूदेव मन्दिर के पीछे समाधि स्थल का निर्माण कार्य जोर शोर से शुरू कर दिया गया जिस पर दूसरे गुट की याचिका पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गयी जिसका निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

बाबा जय गुरूदेव की हजारों करोड़ की चल-अचल एवं उत्तराधिकार की लड़ाई मथुरा से लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायलय में चल रही है। वहीं दूसरी तरफ जय गुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ ट्रस्टी राम प्रताप सिंह ने उ.प्र. सरकार एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मथुरा से पंकज यादव, दिनेश भायल आदि के विरूद्ध 11 अक्टूबर 2019 को शिकायत कि उपरोक्त लोगों ने बाबा जयगुरूदेव की फर्जी वसीयत तैयार कर स्वंय को संस्था एवं ट्रस्ट का पदाधिकारी दर्शाते हुए बैकों में कई खाते खोलकर बाबा के भक्तों से करोंड़ो रूपये जमकर हड़प रहे है बल्कि संस्था की जमीनों को भी खुर्द-बुर्द कर रहे है । इस शिकायत की जांच उच्च अधिकारियों द्वारा कराई गयी जिसमें करीब तीन माह की गहन जांच-पड़ताल के बाद 4 जनवरी 2020 को थाना हाईवे मथुरा में राम प्रताप सिंह पुत्र स्व. ब्रिगेडियर घासीराम निवासी- नदिया फर्म मथुरागेट भरतपुर राजस्थान की शिकायत पर कथित उत्तराधिकारी पंकज यादव, नीरज यादव (भाई) चरन सिंह यादव (पिता) आशा देवी (माँ) अरूण यादव (मामा) हरदयाल यादव उर्फ वीर सिंह यादव (चाचा) के अलावा राम कृष्ण यादव, विजय प्रकाश श्रीवास्तव, मनु भाई पटेल, सन्तराम चौधरी, बाबूराम यादव, फूल कुमार यादव, दिनेश भायल सहित अन्य अज्ञात के विरूद्ध आईपीसी की धारा 420, 467, 0468, 471, 427, के अन्तर्गत मुकदमा दर्ज करा दिया गया।

मथुरा पुलिस द्वारा जांच पड़ताल के बाद दर्ज किये गये मुकदमे के बाद हजारों करोड़ की सम्पत्ति का रातों-रात मालिक बन बैठे पंकज यादव का पूरा कुनबा एवं सहयोगी कानून के शिकजें से बचने के लिये जहां थाने से लेकर लखनऊ-दिल्ली तक दौड़ लगा रहे हैं वहीं दूसरी तरफ अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिये इलाहाबाद हाईकोर्ट के दरवाजे पर भी पहुँच गये हैं। जिसे चुनौती देने के लिये दूसरा गुट भी सक्रिय नजर आ रहा है । वहीं पुलिस-प्रशासन ने भी अपनी जाँच पड़़ताल तेज कर दी है।

देखना होगा कि बाबा जयगुरूदेव के कथित उत्तराधिकारी पंकज यादव कुनबा एवं समर्थकों के साथ कानून के शिकजें से बचने में सफल रहते हैं या फिर वह जेल के सीखचों के अन्दर परिवार एवं समर्थकों के साथ अपने दिन गिनने पर मजबूर होता है। इस पर मथुरा की जनता की ही नहीं बल्कि पूरे देश में फैले बाबा जयगुरूदेव के भक्तों की भी नजरें टिकी हुई हैं।

दो ट्रस्टियों से हजारों करोड़ की सम्पत्ति का मालिका बन बैठा पंकज यादव

“जिसकी लाठी उसकी भैंस” की कहावत बाबा जय गुरूदेव की विरासत पर सटीक साबित हुई है 18 मई 2012 को जब बाबा जयगुरूदेव का निधन हुआ तो उनके अन्तिम दर्शनों एवं अन्तिम संस्कार में सपा सरकार के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, वरिष्ट मंत्री शिवपाल यादव सहित अन्य वरिष्ट नेतागण आये थे जिनसे पंकज यादव परिवार के नजदीकी सम्बन्ध बताये जाते हैं। उस समय भक्तों ने जहाँ जयगुरूदेव की बॉडी पर प्रश्न चिन्ह लगाकर हाइवे जाम करने की कोशिश बल्कि मुखाग्नि को लेकर भी विवाद हुआ था लेकिन सपा सरकार सरंक्षण मिलने के कारण पंकज यादव जहां मुखाग्नि देने में सफल रहे बल्कि 5 ट्रस्टियों में तीन के बगैर स्वीकृति के मात्र आशा देवी जो पंकज यादव की माँ है एवं दूसरे ट्रस्टी मनु भाई पटेल के हस्ताक्षर मात्र से कथित उत्तराधिकारी बनकर हजारों करोड़ की सम्पत्ति पर कब्जा करने मे सफल हो गये बल्कि बैंक खातों में भी जमा-निकासी करने में सफल रहे। वहीं इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा समाधि निर्माण पर रोक लगाये जाने के बाबजूद भी सत्ता के इशारे पर काफी समय तक प्रशासन आखें मूँदे रहा जब हाईकोर्ट की अवमानना की तलवार लटकी तो प्रशासन ने निर्माण कार्य पर रोक तो लगा दी लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य कराने का प्रयास किया।

उ.प्र. में सत्ता परिवर्तन होने एवं योगी सरकार आने के बाद पंकज यादव का विरोधी गुट सक्रिय हुआ और अपनी राजनैतिक पहुँच के कारण पंकज यादव और उसके परिवार के विरूद्ध रिपोर्ट दर्ज कराने में सफल रहा जिसमे गिरफ्तारी से बचने के लिये पंकज यादव परिवार ने अपनी ताकत भी लगाई लेकिन सफतला मिलते ना देख अब हाईकोर्ट की तरफ कूचं कर गये है जिस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

जयगुरूदेव के उत्तराधिकारी बन बैठै अनेक शिष्य

बाबा जयगुरूदेव की हजारों करोंड की चल-अचल सम्पत्ति को लेकर ही विवाद नही है बल्कि उनके भक्तो के बीच स्थापित होने को लेकर भी वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है । जिसमे अनेक धर्म प्रचारक भक्तों के बीच जय गुरूदेव का उत्तराधिकारी साबित करने में लगे हुऐ है।

बाबा जय गुरूदेव अपने जीते जी किसी शिष्य को अपना उत्तराधिकारी घोषित ना करने के कारण उनके निधन के बाद अनेक शिष्य अपने को उत्तराधिकारी घोषित करने में जुट गये। एक तरफ मथुरा की हजारों करोड़ की चल- अचल सम्पति पर पंकज यादव का कब्जा है तो दूसरी ओर उज्जैन में जय गुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के नाम पर खरीदी गई जमीन को इन्ही के शिष्य दिनेश भायल ने उमाकान्त तिवारी के जय गुरूदेव धर्म प्रचार विकास संस्था का गठन कर जमीन को उसके नाम कर दिया बल्कि लाखों शिष्यों के बीच उमाकान्त तिवारी जय गुरूदेव के उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित हो चुके है। इसी तरह कानपुर के रतन बाबा जिन्हें जय गुरूदेव द्वारा अपने आश्रम एवं संगत से निकाले जाने का भक्त दावा करते है उन्होने भी कानपुर क्षेत्र में जय गुरूदेव की अपने अन्दर आत्मा प्रविष्ठ का दावा कर लाखों भक्तों पर अपनी पकड़ बना रखी है।

सूत्र बाते है कि जय गुरूदेव ट्रस्ट के पूर्व महामंत्री शुशील कुमार लुल्ला जो जय गुरूदेव के समय ही पद और ट्रस्ट से त्याग पत्र दे चुके थे ने भी ग्वालियर में अपना आश्रम स्थापित कर लिया है और वह भी भक्तों को सन्देश देने में लगे हुऐ है। इस सम्बन्ध में लुल्ला ने “विषबाण” से कहा कि बाबा जयगुरूदेव की सम्पत्ति विवाद से उनका कोई लेना-देना नही है। इसी तरह खितौरा स्थित आश्रम की जमीन पंकज यादव के चाचा हरदयाल उर्फ वीर सिंह यादव द्वारा आश्रम बनाकर कब्जा करने का आरोप है। इस सम्बंध में उमाकान्त तिवारी, रतन बाबा से सम्पर्क स्थापित नहीं हो सका।

जबकि जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष राम प्रताप सिंह ने “विषबाण” से बातचीत में कहा कि उनकी लडाई जय गुरूदेव की विरासत को कब्जाने की नही बल्कि उसे दबंगों से बचाने के लिये है जिसे वह अन्तिम सांस तक लड़ेगे।

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अब जयगुरूदेव आश्रम पर नजर नहीं आता भक्तों का सैलाब

(Jai Gurudev file Photo)

एक तरफ बाबा जयगुरूदेव की हजारों करोड़ की चल-अचल सम्पत्ति का विवाद गहराता जा रहा है वहीं दूसरी तरफ बाबा जयगुरूदेव के कथित उत्तराधिकारी मान बैठे पंकज यादव अभी तक जय गुरूदेव भक्तो के दिलों में जगह बनाते दिखाई नहीं दे रहे हैं। मई 2012 तक जयगुरूदेव मेले में उमड़ने वाली लाखों-करोडों भक्तों की भीड़ अब मेले में दूर- दूर तक नजर नहीं आती है जो भक्त आते भी है तो वह प्रवचनों से दूरी बनाते हुए मन्दिर एवं समाधि स्थल पर माथा टेक कर वापिस लौट जाते है। जब कि पूर्व में जय गुरूदेव मेले के लिये सरकारों द्वारा स्पेशल ट्रेन-बसें भी चलाई जाती थीं और सैकड़ों एकड़ में फैले मेला क्षेत्र में अपार जन-समूह नजर आता था, शहर की प्रत्येक सड़क-बाजार में भक्तों के समूह नजर आते थे लेकिन अब मेला स्थल से लेकर बाजारों-सडकों पर भक्तों की भीड़ कहीं नजर नही आती है। जय गुरूदेव आश्रम से जुडे़ दुकानदारों एवं भक्तों ने “विषबाण” से बातचीत में कहा कि पंकज यादव आये दिन सत्संग-यात्रा प्रवास करने के लिये पूरे भारत वर्ष में घूमते रहते है लेकिन फिर भी भक्तों के बीच सन्त के रूप में अपना स्थान नही बना पा रहे हैं।

पंकज यादव और परिवार व सहयोगियों के विरूद्ध धोखाधड़ी सहित अन्य संगीन धारओं में मुकदमा दर्ज कराने वाले जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था के उपाध्यक्ष राम प्रताप सिंह ने “विषबाण” से बातचीत में कहा कि बाबा ने 2006 में मध्यप्रदेश के सागर में काफिले के दौरान अपने नजदीकी चिकित्सक डॉ0 मिश्रा से डायरी में नोट कराया था कि उन्हें कभी भी उपचार के लिये न तो बडे अस्पताल में भर्ती कराया जाये और ना ही कभी इन्जैक्शन लगाया जाये और ना ही कभी किसी अन्य का खून चढ़ाया जाये। लेकिन जब इन्हें मामूली तकलीफ हुई तो वह 7 मई 2012 को गुड़गाँव के डॉ0 सेठी के पास उपचार कराने गये थे जहां करीब 4 घण्टे उपचार के बाद राहत मिलने पर वह गुरूग्राम स्थित सेक्टर-4 पर अपने शिष्य राम उजागर सिंह के आवास पर पहुंचे तो इसी दौरान अहमदाबाद से उपचार कराकर लौटे वरिष्ठ ट्रस्टी मनुभाई पटेल मुलाकात करने के लिये पहुंचे जहां उन्होंने महाराज जी को अहमदाबाद उपचार कराने के हेतु अपने साथ चलने के लिये कहा जिसपर बाबा जयगुरूदेव ने भी अपनी सहमति दे दी थी। लेकिन चरण सिंह यादव सहित अन्य करीब 8 लोग महाराज जी को मेदान्ता हॉस्पीटल में उपचार के लिये दाखिल करा दिया गया। जिसका महाराज जी ने जमकर विरोध करते हुए चेतावनी दी कि अगर उन्हें इंजैक्शन या खून चढ़ाया गया तो वह शरीर त्याग देंगे। लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें वेल्टीनेटर पर ले जाया गया और इंजेक्शन लगाकर शरीर की चीर-फाड़ कर दी गई। रामप्रताप सिंह का कहना है कि वहां डॉ एस कुमार ने जब इमरजेंसी में घुसने का प्रयास किया तो उन्हें रोक दिया गया। बाद में वह इमरजेंसी में घुस सके। लेकिन तबतक उन्हें वेल्टीनेटर पर डालकर बेहोश कर दिया गया था। जिससे बाद में उनकी मौत हो गई। जब कि अस्पताल की आजतक कोई जाँच रिपोर्ट सामने नही आयी है इससे प्रतीत होता है कि उनकी मौत बीमारी से नहीं बल्कि साजिश के तहत उन्हें मौत की नींद सुलाया गया था। जिसकी उच्च स्तरीय जांच होने पर पूरा सच सामने आ जायेगा और दोषी लोग कानून के शिकजें में होगें।

रामप्रताप का कहना है कि डॉ. एस कुमार द्वारा 19 मई को मथुरा आश्रम पर बाबा के अन्तिम दर्शन के बाद नीचे उतर रहे थे तो उन्होंने कहा था कि महाराज जी की हत्या की गई है और वह अब कभी मथुरा नहीं आयेंगे। इसके बाद महाराज के घम में जुलाई 2012 में डॉ. एस कुमार का निधन हो गया। राम प्रताप सिंह ने सम्पत्ति कब्जाने के आरोपों पर कहा कि वह जयगुरूदेव धर्म प्रचारक संस्था एवं ट्रस्ट को विधवित रूप से संचालन करने के लिये कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

सभी आरोप गलत, झूठा मुकद्मा दर्ज कराया – सन्तराम चौधरी

जय गुरूदेव आश्रम मथुरा के प्रबंधक एवं धोखाधड़ी के मामले में नामजद आरोपी सन्तराम चौधरी ने “विषबाण” से बातचीत में धोखाधड़ी से चल-अचल सम्पत्ति हथियाने के आरोपों को बे-बुनियाद बताते हुऐ दर्ज रिपोर्ट पर कहा कि पहले से कई मामले न्यायालय में लम्बित है जो उत्तराधिकार के मामले में निर्णय दे सकते है फिर भी मुकद्मा दर्ज करा दिया गया। लेकिन मुकदमा दर्ज कराने से कोई दोषी नही हो जाता है। इसके लिये वह किसी भी जाँच का सामना करने को तैयार हैं।

श्री चौधरी ने कहा कि मेदान्ता में स्वामी जी को जबरन भर्ती कराने के आरोप भी गलत है उन्होंने पंकज यादव सहित अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिये हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के सम्बन्ध में कोई भी जानकारी होने से इन्कार किया है ।

पंकज यादव परिवार से मेरा कोई लेना-देना नहीं -वीर सिंह

भाई-भतीजे के साथ कानूनी चक्रव्यूह में फंसे पंकज यादव के चाचा हरदयाल उर्फ वीर सिंह यादव ने “विषबाण” से कहा कि उन्हें स्वयं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज होने की कोई जानकारी नही है। उन्होने कहा कि बाबा गुरूदेव के शरीर छोड़ने के बाद बाबा जय गुरूदेव के देश भर में फैले करीब 250 आश्रमों पर कब्जा कर लिया गया है जबकि पंकज यादव गुट ने ही उनके विरूद्ध थाना हाइवे में मई 2012 में 307 का झूठा मामला दर्ज करा कर उन्हें थाने में बन्द करा दिया गया। जिसमें जांच के दौरान निर्दोष साबित हुए थे। लेकिन उस मामले में बार- बार विवेचना कराकर फंसाने की साजिश रची जा रही है उन्होने पंकज यादव एवं राम प्रताप गुट पर ही सम्पत्ति कब्जाने का आरोप लगाते हुऐ कहा कि खितौरा में 2004 मे सात बीघा जमीन उन्होंने जय गुरूदेव मन्दिर के लिये अपने ही पैसे से खरीदी थी जिस पर आज भी उनका कब्जा है जबकि अन्य सम्पत्ति पर उनके ही भाई चरण सिंह यादव से इटावा न्यायालय में उनका विवाद चल रहा है। जबकि उन्होंने मथुरा न्यायालय में भी पक्षकार बनाने के लिये रिट दाखिल की है। जिसपर सुनवाई उनका पंकज यादव परिवार से कोई लेना देना नही है।