योगीराज: श्मशान घाट में गौशाला, सड़क पर मुर्दो का संस्कार

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मथुरा। सड़क मार्ग पर खुलेआम झूम रही गाय कहीं किसानों की फसल को चैपट कर रही हैं। तो कहीं दुर्घटनाओं का सबब साबित हो रही हैं। जिन्दा इंसानों के लिये अभिषाप और कथित गौशाला संचालकों के लिये वरदान साबित हो रही है गाय अब मुर्दा इंसानों के लिये भी जी का जंजाल साबित हो रही हैं। जिसमें प्रशासन ने राधाकुण्ड के अहोई अष्टमी मेले को सम्पन्न कराने के लिये अवारा पशुओं को अड़ींग के श्मशान स्थल में बन्द कर बाहर से ताला डाल दिया तो मुर्दो को ग्रामीण सड़क पर ही फूकने पर मजबूर हो गये।

उ.प्र. की योगी सरकार का गौ रक्षा का संकल्प किसान, आम जन मानस के लिये अभिषाप साबित हो रहा है तो कहीं सड़क पर खुला घूमने वाले अवारा गाय-सांड़ कथित गो सेवक-गौशाला संचालक एवं प्रशासन के लिये सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी साबित हो रहे हैं। सरकार द्वारा जहां अवारा पशुओं के लिये प्रति पशु प्रतिदिन का 30 रुपये भुगतान किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ अनेक गौशाला संचालक गौसेवा के नाम पर मोटा चन्दा वसूलते हैं। बताते हैं कि जनपद में सरकारी के साथ-साथ बड़ी संख्या में सन्त-महन्तों की गौशाला होने के बाद भी पूरे बृज में हजारों की संख्या में खुलेआम आवारा गाय-सांड हाइवे, सड़क मार्ग, प्रमुख बाजारों, खेत-खलिहानों में हर समय देखे जा सकते हैं। जनपद में पीएम-सीएम के दोरे पर आने के दौरान रातों-रात उन्हें पकड़कर बाहरी जनपदों में छुड़वा देता है या फिर अस्थाई गौशाला बनाकर उनमें कैद कर देता है जैसे ही वीआईपी का कार्यक्रम सम्पन्न होता है फिर से उन्हें खुला छोड़ दिया जाता है।

इसी तरह अहोई अष्टमी के पर्व पर राधा कुण्ड गोवर्धन में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने अवारा पशुओं को पकड़वाकर किसी सरकारी अनुदानित गौशाला या एनजीओ की किसी गौशाला के स्थान पर मथुरा-गोवर्धन मार्ग पर स्थित गांव अड़ींग के श्मशान स्थल में कैद कर बाहर से ताला डलवा दिया जाता है। जब अड़ींग निवासी पप्पू यादव के शव को अन्तिम संस्कार के लिये श्मशान स्थल पर पहुंचे तो वहां गायों को उसके अन्दर देखकर बाहर ताला लगा हुआ देखा तो ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान प्रतिनिधि नितिन रावत से सम्पर्क कर श्मशान स्थल पर ताला खोलने के लिये कहा तो प्रधान प्रतिनिधि ने कहा कि प्रशासन ने श्मशान स्थल पर गौशाला संचालन के आदेश दिये हैं और ताला खोलने से साफ इंकार कर दिया। इस पर ग्रामीणों ने रात्रि में सड़क किनारे ही पप्पू यादव के शव का अन्तिम संस्कार कर दिया।

ग्रामीणों का कहना है कि किसानों के साथ आम आदमी के लिये परेशानी का सबब बने आवारा पशु अब मुर्दों के लिये भी अभिषाप हो रहे हैं। जबकि प्रशासन तथा सरकारी गौशाला संचालकों के लिये मुनाफे का सौदा साबित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने मुख्य मंत्रियों से दोषियों के खिलाफ कार्यवाही तथा श्मशान स्थल को मुक्त कराने की मांग की है।

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