मां के साथ मजदूरी कर गांव के लड़के ने बनाई आधुनिक मिसाइल

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मथुरा। “आंखों में मंजिलें थीं, गिरते और संभलते रहे, आंधियों में क्या दम था, चिराग हवा में भी जलते रहे” कि पक्तियां गांव के एक छात्र पर सटीक साबित हो रही है जिसने पिता की मौत के बाद भी अपने सपने को पूरा करने के लिये अपनी सारी जमीन जमीन बेचने के बाद 22 लाख की लागत से  मिसाइल का डैमो तैयार कर मिसाइल मैन बनने का सपना साकार करने में जुटा हुआ है।

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“कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो” दुष्यंत कुमार का ये शेर मथुरा जनपद के नौहझील क्षेत्र के गांव जटपुरा निवासी 19 वर्षीय युवक गौतम चौधरी पर सटीक साबित हो रहा है। जिसके पिता चौधरी बिजेन्द्र सिंह की मौत 2010 में हार्ट अटैक से उस समय हो गई जब वह मात्र 10 वर्ष का था। पिता की मौत से पूरा घर सदमे में डूब गया। परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी गौतम की मां कुन्ती देवी पर आ गई जिसने बच्चों के पालन पोषण के लिये अपनी 4 बीघा जमीन भी कोड़ियों के भाव बेच दी।

कुन्ती देवी ने बड़े बेटे अजय कुमार को इण्टर तक शिक्षा ग्रहण कराई तो दूसरे छोटे बेटे गौतम चौधरी को इण्टर तक की पढ़ाई निकटवर्ती गांव शंकरगढ़ी के एनवी इण्टर कॉलेज से कराने के बाद वर्ष 2015 में आईआईटी की कोचिंग कराने के लिये कोटा राजस्थान भेज दिया जहां उसने दिन रात कोचिंग में पढ़ाई तो की लेकिन वह आईआईटी में पास ना हो सका। लेकिन इस बीच उसने मिसाइल का मिनी डेमो तैयार कर लिया। जगह का आभाव होने पर वह 2017 में अपने गांव लौट आया और फिर मिसाइल मैन के सपने को साकार करने में जुट गया। जिसमें 3 साल की कड़ी मेहनत से मिसाइल का डेमो बनाने में सफल रहा। इस दौरान जहां परिवार के पालन-पोषण के लिये बड़ा भाई अजय चौधरी गुड़गांव में गार्ड की प्राइवेट नौकरी करने लगा वहीं गौतम अपनी मां के साथ अन्य किसानों के खेतों में मजदूरी कर अपने मिशन में जुटा रहा। जिसमें बेची जमीन की राशि उसकी कोचिंग पर खर्च हुई बल्कि 22-22 लाख की राशि मिसाइल के निर्माण पर खर्च हो गई।

गरीबी की मार से जूझ रही विधवा मां ने वर्ष 2018 में जैसे-तैसे बेटी के हाथ पीले किये और बेटे के सपनों को साकार करने में जुट गई। जिसमें बेटे गौतम को मिसाइल परीक्षण के लिये इंजन आदि उपकरण खरीदकर दिलवाये। गौतम चौधरी ने ‘‘विषबाण’’ से बातचीत में कहा कि उसका लक्ष्य देश के लिये बेहतर मिसाइल का डैमो तैयार कर परीक्षण की तैयारी है उसका उद्देश्य देश सेवा करना है। इसके लिये उसका पूरा परिवार गहरे आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इसके बाबजूद भी उसका मिशन लगातार आगे बढ़ रहा है गौतम ने कहा कि अगर सरकार ने उसे मौका दिया तो वह देश के लिये आधुनिक हाथियार बनाने में एक दिन अवश्य सफल होगा।

 

दुश्मन देश के छक्के उड़ा देगी मिसाइल -गौतम

गौतम चौधरी मिसाइल मैन बन पायेगा या नहीं ये भविष्य के गर्भ में है लेकिन उसके बुलन्द हौसले भविष्य की नयी पटकथा लिख रहे हैं, गौतम चौधरी कहते है कि उन्होंने मिसाइल तैयार की है उसके अन्दर इस तरह का डाटा फीड किया गया है कि उसकी लॉचिंग के बाद वह निश्चित स्थान पर प्रहार कर पुनः अपने स्थान पर सकुशल लौट आयेगी। इसके अलावा इसमें अनेक खूबियां हैं जो दुश्मन देशों के छक्के छुड़ा सकती है।

बेटे के खातिर मां ने बेच दी जमीन, भाई ने झोंक दिया वेतन

‘‘पूत के पैर पालने में ही दिखाई देने लगते हैं’’ की कहावत गौतम चौधरी पर भी सटीक साबित हुई है एक तरफ पिता का साया हटने पर बच्चों की जिन्दगी अन्धकार में डूब गई वहीं कुन्ती देवी का जीवन भी भवंर में फंस गया लेकिन उसने बेटों का भविष्य बनाने के लिये अपनी 4 बीघा जमीन को बेचकर बच्चों को पढ़ाई के लिये हॉस्टल में दाखिला करा दिया जिसमें बड़ा बेटा अजय कुमार तो इण्टर के बाद नहीं पढ़ सका। लेकिन छोटे बेटे के वैज्ञानिक बनने के जनून को देखते हुए आईआईटी की कोचिंग के लिये कोटा भेज दिया। जहां गौतम चौधरी पढ़ाई के साथ मिसाइल की तैयारी में लग गया। जब इसकी जानकारी मां कुन्ती देवी को हुई तो उसने हाथ खड़े करते हुए बेटे को गांव चलने के लिये कहा लेकिन बेटे की जिद के सामने मां को झुकना पड़ा। आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में जब गौतम को सफलता नहीं मिली तो वह गांव जटपुरा लौट आया फिर मिसाइल मैन बनने की तैयारी में जुट गया जहां ढ़ाई साल का समय मिसाइल के उपकरण एकत्रित करने में लग गया इसके बाद 6 माह की मेहनत के बाद वह मिसाइल बनाने में सफल रहा। इस दौरान उसने अपने टूटे-फूटे घर को प्रयोग शाला बना दिया। गौतम की मां कुन्ती देवी कहती हैं कि बेटे के जुनून के कारण आज उसका घर भी कर्ज में डूब गया है वह अपनी बहिन से कर्जा लेकर बेटे के अरमानों को पूरा करने में लगी हुई हैं। जबकि उसका बड़ा बेटा जो गार्ड की नोकरी कर रहा है के बदले मिलने वाले वेतन को भी अपने छोटे भाई के उज्जवल भविष्य के लिये खर्च कर रहा है।