गोवर्धन NGT विवाद: याचिका कर्ता की अवैध गोशाला पर चलेगा कानून का हथोड़ा

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मथुरा। पर्यावरण, गोवर्धन श्राइन बोर्ड सहित अन्य कानूनी लड़ाई लड़ने वाले बाबा आनन्द गोपाल को राजस्थान उच्च न्यायालय ने गौशाला के नाम पर जमीन कब्जाने के दोषी मानते हुए वन विभाग को जमीन खाली करने के आदेश दिये हैं। जिस पर क्षेत्रीय वन अधिकारी डीग रेंज ने 18 अक्टूबर तक जमीन खाली करने का नोटिस दिया है। जबकि बाबा आनन्द गोपाल ने साजिश आरोप लगाते हुए जमीन कब्जाने के आरोपों को निराधार बताते हुए गौशाला से अपना कोई सम्बन्ध ना होना बातया है। तथा छवि धूमिल करने पर मानहानी का मामला दर्ज करने की चेतावनी दी है।

सुप्रीम कोर्ट एनजीटी में गोवर्धन श्राइन बोर्ड, पर्यावरण सुरक्षा को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ने वाले बाबा आनन्द गोपाल के खिलाफ गोवर्धन के ही सामाजिक कार्यकर्ता पं. मुकेश शर्मा द्वारा गोशला के नाम पर अवैध रूप से सरकारी जमीन कब्जाने को लेकर राजस्थान उच्च न्यायलय में याचिका दायर की थी। जिसमें न्यायालय ने वन विभाग को सरकारी जमीन खाली करने के आदेश दिये। उच्च न्यायालय के आदेश पर कार्यालय क्षेत्रीय वन अधिकारी डीग भरतपुर रैंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी द्वारा बाबा आनन्द दास गण्ेाश्वर जी संचालक देवी मन्दिर गोशाला से डींग भरतपुर को खसरा नम्बर 35 के रकवा 1.75 हेक्टेयर अवैध अतिक्रमण को तुरन्त बे-दखल करने का नोटिस दिया है। नोटिस में कहा है कि अगर 18 अक्टूबर तक जमीन को खाली नहीं किया तो गौशाला को ध्वस्त कर दिया जायेगा।

याचिका कर्ता मुकेश शर्मा ने जारी बयान में कहा है कि आनन्द दास वन भूमि बेचने वाला व्यापारी है जिसने हर बार रमेश बाबा, नारायण महाराज, गुरू शरणानन्द जैसे कई बड़े सन्तों को नाम बदल कर ठगा है। बल्कि कई स्थानों पर भूमाफियाओं से सांठ-गांठ कर गौशालाऐं खोली गई और फिर जमीन को बेच दिया गया। इस सम्बन्ध में ‘‘विषबाण’’ द्वारा बाबा आनन्द गोपाल से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि आजतक किसी जमीन पर कब्जा नहीं किया है। उनके पास एक इंच जमीन नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग जमीन कब्जाने का आरोप लगा रहे हैं उन्होंने ही गौशाला-कुण्डों के नाम करोड़ो की कमाई की है। जिनके खिलाफ वह लड़ाई लड़ रहे हैं।

आनन्द गोपाल ने कहा कि जब गोशाला से उनका कोई लेना-देना नहीं है तो फिर उन्हें नोटिस देना गैर कानूनी है इसके लिये वह वन अधिकारी पर मानहानि का दावा दायर करेंगे।