गोवर्धन परिक्रमा मार्गः एनजीटी से डीएम ने मांगी माफी

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दिल्ली। मथुरा जिला प्रशासन द्वारा मनमानी तरीके से गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में ई-रिक्शा एवं भण्डारों पर रोक लगाने तथा इसके विरोध में व्यापारियों द्वारा बाजार बन्द के दौरान हुए हंगामे को लेकर एनजीटी के सख्त रूख पर जिलाधिकारी मथुरा में माफी मांगते हुए भविष्य में इस तरह की घटना ना होने का आश्वासन दिया जबकि पीडब्ल्यूडी सचिव को हर तारीख पर उपस्थित रहने के निर्देश दिये हैं।
एनजीटी के सख्त रूख के चलते जिला प्रशासन द्वारा मनमाने तरीके से गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में ई-रिक्शा, भण्डारे आदि पर रोक लगाने को लेकर व्यापारियों ने बाजार बंद कर आंदोलन किया था जिसपर कुछ अप्रिय घटना भी घटित हो गई थीं। जिसे लेकर एनजीटी ने पिछले दिनों शासन-प्रशासन को जमकर लताड़ लगाई थी। बुधवार को गोवर्धन में गिरिराज पर्वत से जुड़े मामले पर एनजीटी में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश रघुवेन्द्र सिंह राठौर व सत्यवान सिंह गर्ब्याल की पीठ के समक्ष उपस्थित जिला अधिकारी मथुरा सर्वज्ञ राम मिश्रा ने माफी मांगते हुए कहा कि मैं 26 व 27 अगस्त की घटना के लिये न्यायालय से माफी मांगता हूं और इस बात का आश्वासन देता हूं कि

भविष्य में इस प्रकार की कोई भी गलती नहीं होगी ।
पीडब्लूडी विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के सचिव समीर वर्मा को न्यायालय ने सख्त हिदायत देते हुए कहा कि सर्विस रोड के कार्य मे किसी भी प्रकार की देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी, न्यायालय को अवगत कराते हुए सचिव समीर वर्मा ने बताया कि राधाकुंड बाईपास का कार्य अक्तूबर 2019 तक पूरा कर लिया जाएगा तथा डीग-बरसाना बाई पास का काम अगले तीन माह में शुरू हो जाएगा। सर्विस रोड के विषय में उन्होंने कहा कि अभी एक सर्वे और होना बाकी है जिसके तुरन्त बाद कार्य शुरू हो जाएगा ।
उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से सभी बिंदुओं पर न्यायालय में दाखिल रिपोर्ट पर सबसे पहले सुनवाई करते हुए न्यायालय ने ई-रिक्शा के संबंध में सरकार की अधिवक्ता पिंकी आनंद से पूछा की आपके हिसाब से दाखिल रिपोर्ट के अनुसार कितने ई-रिक्शा को परिक्रमा मार्ग में आप के द्वारा अनुमति दी जा रही है, जिस पर सरकार की ओर से 400 ई रिक्शा को परिक्रमा मार्ग में चलाने की अनुमति देने की बात कही गई। याचिकाकर्ता आनंद गोपाल दास व सत्य प्रकाश मंगल के अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने भी यह मांग उठाई की परिक्रमा मार्ग में चल रहे ई-रिक्शा के लिये पार्किंग की व्यवस्था भी होनी बेहद जरूरी है जिससे कि वो परिक्रमा मार्ग में कहीं भी खड़े ना हों, इसके बाद भंडारों को लेकर न्यायालय ने दोनों पक्षों को बैठ कर यह तय करने को कहा कि परिक्रमा मार्ग में एक दिन में कितने भंडारे लगाए जाएं तथा उनको कितनी जगह आवंटित की जाए जिस से की वो साफ सफाई की भी व्यवस्था का विशेष ध्यान रखें, न्यायालय ने उप जिलाधिकारी गोवर्धन को यह साफ निर्देश दिए कि भंडारों के उपरांत साफ सफाई पर ध्यान रखा जाए और अगर भंडारे लगाने वाले इसका ध्यान ना रखें तो उन पर भी उचित कार्यवाही की जाए ।
अधिवक्ता सार्थक चतुर्वेदी ने कहा कि राजस्थान सरकार न्यायालय के दिशा-निर्देशों के पालन में हीलाहवाली कर रही है। जिस पर न्यायालय ने राजस्थान सरकार की तरफ से मौजूद अधिकारियों को यह कहा कि सभी बिंदुओं पर प्रगति आख्या न्यायालय के समक्ष अगली तारीख पर प्रस्तुत करें। मामले की अगली सुनवाई 18 अक्टूबर के लिये तय की गई है ।