मथुरा में किसान संगठनों की बाढ़, फिर भी किसानों को नहीं राहत

0
355

मथुरा। जनपद में बड़े पैमाने पर फल फूल रहे संगठन जहां किसान, मजदूर और व्यापारी हितों के नाम पर आए दिन आंदोलन करते नजर आते हैं। वहीं दूसरी तरफ संगठन के कथित पदाधिकारी परदे के पीछे गलत कार्याें को भी अंजाम देने से बाज नहीं आ रहे हैं।
जनपद में बीते दिनों किसान हितों के नाम पर किसान यूनियनों के कार्यक्रमों की बाढ़ सी आयी हुई है। जबकि जनपद में बाढ़ के प्रकोप से खादर में खेती कर रहे किसान त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि किसानों के नाम पर तथाकथित नेता जहां बडे़ अपराधियों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। वहीं टोल टैक्स पर झगड़े के मामले भी आए दिन सामने आ रहे हैं। बताते हैं कि एसटीएफ द्वारा कुछ वर्ष पूर्व यमुना एक्सप्रेस वे पर लूटपाट एवं अपहरण में शामिल एक कुख्यात अपराधी को गिरफ्तार किया गया था। इसकी काॅल डिटेल निकालने पर उक्त अपराधी से बातचीत की डिटेल मांट क्षेत्र के एक वरिष्ठ किसान नेता के साथ बड़ी संख्या में निकल कर सामने आई थी। इसके साथ ही उक्त किसान नेता पर कई बार अपने प्रतिद्वंदियों को फर्जी मामले में जेल भेजने के आरोप लगते रहे हैं। बताते हैं कि उक्त अपराधी को छुड़ाने के लिए किसान नेता ने पुलिस के उच्चाधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की थी लेकिन नेताजी सफल नहीं हो सके। इसी तरह यमुना एक्सप्रेस वे टोल पर बिना टैक्स दिए गाड़ी निकालने को लेकर कई बार किसान संगठन हंगामा करते रहे हैं। गत दिवस भी भाकियू भानु गुट के प्रदेश अध्यक्ष और समर्थकों का फरह टोल टैक्स पर टोल कर्मियों से बिना शुल्क दिए निकलने को लेकर जमकर विवाद हुआ था। इसमें प्रदेश अध्यक्ष सहित 200 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसे लेकर बाद में भाकियू भानु गुट के समर्थकों ने जिला मुख्यालय पर हंगामा करते हुए उक्त कार्यवाही को एकतरफा करार देते हुए टोलकर्मियों पर भी कार्यवाही करने और किसान पदाधिकारियों पर दर्ज एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पर्व पर जनपद में किसान संगठनों की सक्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि एक तरफ बीएसए कालेज में भाकियू टिकैत गुट का 4 दिवसीय शिविर आयोजित किया गया। वहीं दूसरी तरफ डेंपियर नगर स्थित किसान भवन मथुरा में भाकियू लोकशक्ति के बैनर तले 2 दिवसीय चिंतन शिविर लगाया गया। इसमें किसानों की समस्याओं को लेकर प्रशासन को ज्ञापन भी दिए गए। इससे पूर्व किसान भवन में भाकियू भानु गुट द्वारा भी 2 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया था। जबकि वृंदावन में यमुना रक्षक दल द्वारा आयोजित यमुना मुक्ति आंदोलन में भी भाकियू राष्ट्रीय एकतावादी के कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रीय अध्यक्ष रामचंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रतिभाग किया गया। इससे पूर्व भाकियू अम्बावता गुट के सैकड़ों किसानों द्वारा समस्याओं को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया गया। इसमें यूनियन पदाधिकारी डीएम के बाहर आकर ज्ञापन लेने की जिद पर अड़ गए थे। इस पर डीएम बिना ज्ञापन लिए ही वहां से चले गए तो नाराज किसानों ने डीएम आॅफिस के बाहर ही धरना आरंभ कर दिया था। इस पर काफी मशक्कत के बाद सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपा गया था। इसी तरह कई अन्य किसान संगठन समय समय पर किसानों के हितों की लड़ाई का बिगुल फूंकते रहे हैं। इसी तरह गत दिनों मांट क्षेत्र के ओहावा में खनन ठेकेदार का ग्रामीणों से विवाद होने पर भाकियू लोकशक्ति ने पंचायत का आयोजन करते हुए हंगामा किया था। इसमें प्रशासन से समझौते के बाद आंदोलन समाप्त किया गया।
किसान संगठनों से जुड़े कुछ पदाधिकारियों ने नाम न खोलने की शर्त पर बताया कि इन संगठनों में ऐसे लोग भी पदाधिकारी बना दिए गए हैं जिनका खेती-किसानी से दूर दूर तक कोई नाता नहीं है। इसमें कोई प्राॅपर्टी के कारोबार से जुड़ा है तो कोई पदाधिकारी सरकारी नौकरी में होने के बाद भी किसान हित की बात कर रहा है। इन संगठनों में तमाम पदाधिकारी ऐसे भी हैं जिन पर जमीन कब्जाने के आरोप हैं और यह विवाद न्यायालय में विचाराधीन हैं। किसान संगठनों के पदाधिकारी सिर्फ टोल बचाने के लिए ही पदाधिकारी बने हुए हैं। वह खुद तो बिना टोल टैक्स दिए टोल पार करते ही हैं वरन् अपने परिजनों और रिश्तेदारों को बिना टोल टैक्स दिए टोल पार करने के लिए मैसेज भी करते हैं। मैसेज मिलते ही ऐसी गाड़ियों से बिना टोल लिए पार कराया जाता है। किसान संगठनों में पदांे को लेकर घमासान भी मचा हुआ है। भाकियू टिकैत में पदों और कार्यकारिणी गठन को लेकर हाल ही में विवाद सामने आया था। किसानों का कहना है कि यह कथित पदाधिकारी किसानों के हित की लड़ाई कम, प्रशासन पर अपना दबदबा कायम कर अपने हितों को साधने का काम कर रहे हैं। जिन किसान नेताओं को बाढ़ पीड़ित किसानों की मदद करनी चाहिए। वह आंदोलन के नाम पर अपना चेहरा चमकाने में लगे हुए हैं। किसानों का कहना है कि जो किसान नेता वीआईपी गाड़ियों में चलता हो वह कैसे किसानों की समस्याओं को समझ सकता है और लड़ाई लड़ सकता है। जनपद में इस समय लगभग एक दर्जन से अधिक किसान संगठन सक्रिय हैं। इन संगठनों से किसानों को क्या लाभ होगा यह स्वयं किसान भी नहीं समझ पा रहे हैं।