डिप्टी कलक्टर की जांच में कैडिटी कम्प्यूटर सेंटर को मिली क्लीन चिट

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मथुरा। शहर के बीचों बीच स्थित दो कम्प्यूटर सेंटर के मध्य छिड़ी जंग में एक बार फिर डीपीएस एजुकेशनल सोसायटी डेंपियर नगर के हाथ बाजी लगी है। शिकायतकर्ता प्रदीप फौजदार की शिकायत पर डिप्टी कलक्टर द्वारा की गई जांच में शिकायत निराधार पाई गई है। डिप्टी कलक्टर ने अपनी जांच रिपोर्ट में कैडिटी कम्प्यूटर सेंटर को क्लीन चिट दे दी है।
डेंपियर नगर निवासी प्रदीप फौजदार ने डेंपियर नगर में ही संचालित हो रहे डीपीएस एजुकेशनल सोसायटी के संबंध में शिकायत की थी कि यह संस्था रिहायशी आवासों के बीच संचालित हो रहा है। यहां आग बुझाने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसी दशा में यहां कभी भी सूरत जैसा हादसा हो सकता है। इसकी जांच डिप्टी कलक्टर राजीव उपाध्याय को सौंपी गई। जांच के बाद डिप्टी कलक्टर राजीव उपाध्याय द्वारा जिलाधिकारी को जांच रिपोर्ट सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट में डिप्टी कलक्टर ने बताया है कि जांच के दौरान सोसायटी द्वारा संचालित कम्प्यूटर सेंटर पर प्रशिक्षणरत प्रशिक्षुओं के बयान दर्ज किए गए। सभी प्रशिक्षुओं ने अपने बयान में बताया कि यहां उच्च कोटि का प्रशिक्षण दिया जाता है। केंद्र से उन्हें कोई शिकायत नहीं है। केंद्र पर 4 होजरी एवं 7 सिलेंडर की भी आकस्मिक आपदा से निबटने के लिए व्यवस्था है। यह यंत्र आगजनी की घटना से निपटने के लिए काफी हैं। इनसे आकस्मिक आपदा की स्थिति में नजदीक के घरों की भी आग बुझाई जा सकती है। संस्थान राष्ट्रीय इलैक्ट्रोनिकी एवं सूचना प्रोद्योगिकी संस्थान से मान्यता प्राप्त है। डिप्टी कलक्टर द्वारा यह भी कहा गया है कि शिकायकर्ता प्रदीप फौजदार स्वयं एक कम्प्यूटर सेंटर का मालिक है। जिस पर सीसीसी परीक्षा में नकल कराए जाने का आरोप है। इसकी जांच सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा की जा रही है। प्रदीप फौजदार के संस्थान पर पूर्व में समाज कल्याण विभाग की 4 लाख से अधिक धनराशि के गबन का भी दोषी पाया गया है। अतः प्रदीप फौजदार द्वारा डीपीएस एजुकेशनल सोसायटी के खिलाफ की गई शिकायत निराधार एवं कपोल कल्पित होने के कारण निक्षेपित किए जाने के योग्य है।