थूकने की जगह

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बीरबल को तम्बाकू चबाने की आदत थी। एक बार वह तम्बाकू चबाते हुए, राजमहल के रास्ते से कहीं जा रहे थे। तम्बाकू चबाते-चबाते उन्होंने तम्बाकू थूका, जिसका निशान राजमहल की दीवार पर पड़ गया। अब्दुल करीम नामक एक दरबारी, जो बीरबल से बहुत चिढ़ता था, यह सब देख रहा था। अब्दुल करीम एक आँख से काना था, काना होना उसकी कुरूपता और धूर्तता को और अधिक बढ़ाता था। अब्दुल करीम दौड़कर बादशाह अकबर के पास पहुँचा और उसने शिकायत की “महाराज, मैंने बीरबल को महल की दीवार पर तम्बाकू थूकते हुए देखा है। इससे राजमहल की दीवार पर भद्दे दाग पड़ गए हैं। क्या आपकी नजरों में यह उचित है?” बादशाह अकबर यह सुनकर बहुत क्रोधित हो गए और उन्होंने तुरंत ही एक सेवक बीरबल को बुलाने के लिए भेजा। जैसे ही बीरबल बादशाह के सामने पहुँचा तो बादशाह ने कहा ‘बीरबल, तुम एक बुद्धिमान् व्यक्ति हो। तम्बाकू चबाना गलत नहीं है, परंतु तुम्हें उसे खाली अथवा बेकार स्थान पर थूकना चाहिए। तुमने राजमहल की दीवार पर थूक कर उसकी शोभा बिगाड़ी है, क्या यह तुम्हारी दृष्टि में ठीक है?” बीरबल ने अपनी गलती के लिए क्षमा माँगी और वायदा किया कि आइन्दा वह उनके कहे अनुसार ही करेगा।

अगले दिन बीरबल दरबार में आया। अभी-भी वह तम्बाकू चबा रहा था। करीम, बीरबल पर नजर रखे हुए था। उसे पूरा यकीन था कि आज भी बीरबल राजमहल की दीवार पर थूकेगा। परंतु बीरबल घूमा और उसने अब्दुल करीम की दाँई आँख पर थूक दिया। अब्दुल करीम गुस्से में चिल्लाते हुए अकबर के पास पहुँचा और बोला “महाराज, यह देखिए बीरबल ने क्या किया उसने मेरी बायीं आँख पर थूक दिया।” “बीरबल तुमने ऐसा क्यों किया?” अकबर ने पूछा। “महाराज, आप ही ने तो कहा था कि सदैव खाली अथवा बेकार जगह पर थूकना चाहिए। आप तो जानते हैं कि अब्दुल करीम दाँई आँख से काना है, अत: वह जगह खाली और बेकार है। इसलिए आप की आज्ञा का पालन करते हुए मैंने ऐसा किया। ” बीरबल ने कहा। बीरबल का जवाब सुनकर अकबर खिल-खिलाकर हँस पड़े। दरबारीगण भी मुस्कुरा उठे। अब्दुल करीम समझ गया, कि बीस्बल की शिकायत करने का उसे उचित जवाब दिया गया हो.