सबसे चतुर ‘बनिये’

0
1054

एक बार अकबर बादशाह ने बीरबल से पूछा-‘‘बीरबल। मनुष्यों में सबसे चतुर किस जाति के लोग होते हैं?’’
बीरबल ने बताया-‘‘हुजूर! बनिये सबसे चतुर होते हैं।’’
बादशाह को बिना प्रत्यक्ष प्रमाण के विश्वास न होता था, अतः बीरबल से उन्होंने इसके लिए प्रमाण मांगा। बीरबल ने तत्काल नौकर को बुलाकर बाजार से उड़द की दाल मंगवाई। इसके बाद नगर के प्रतिष्ठित बनियों को बुलवाया। बनिये लोग बीरबल का संदेश सुनकर पहले तो कुछ घबराए, लेकिन उनकी अवज्ञा न कर महल में पहुंचे। बादशाह के सामने बीरबल ने उपस्थित बनियों के सामने दाल डालकर उनसे कहा-‘‘इस अनाज का नाम बताओ?’’
सब बनिये मन में सोचने लगे-‘यह तो ऐसी वस्तु है जिसे प्रायः सभी लोग जानते हैं, इसकी पैदावर भी सर्वत्र होती है। आखिर बीरबल ने हम लोगों से यह पूछा है तो अवश्य ही दाल में कुछ काला है। इसलिए समझ-बूझकर उत्तर देने में ही भलाई होगी, नहीं तो पछतावे के सिवा कुछ हाथ न लगेगा।’
बनियों के मुखिया ने हाथ जोड़कर बीरबल से निवेदन किया-‘‘हुजूर! हम सब आपस में इसका निश्चय करके बताएंगे।’’
बीरबल ने उनकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। बादशाह यह सब देख रहे थे। सब बनियों ने मिलकर आपस में तर्क-वितर्क किया और सोचा कि यदि वह कहते हैं कि यह दाल उड़द की है तो बादशाह खुश न होंगे, क्योंकि यह तो वह भी जानते होंगे। बनिये अभी तक किसी एक निश्चय पर नहीं पहुंचे थे। बीरबल ने पुनः उनसे कहा-‘‘क्यों, अभी तक आप लोगों की राय एक नहीं हुई।’’
इस पर बनियों का मुखिया बोला-‘‘हुजूर! यह मूंग की दाल है।’’
दूसरे बनिये की ओर जब बीरबल ने बताने के लिए इशारा किया तो उसने अर्ज किया-‘‘आलमपनाह! यह अनाज मटर से तो कुछ छोटा है पर इसका नाम अच्छी तरह याद नहीं आता।’’
तीसरे ने कहा-‘‘जहांपनाह! यह तो मिर्च मालूम होती है।’’
बादशाह बनियों की इन बेसिर पैर की बातों को सुनकर बड़े झुंझलाए और बोले-‘‘क्या तुम अपनी बुद्धि को कहीं गिरवी रख आए हो? यह तो उड़द की दाल है।’’
बनियों ने एक स्वर में बादशाह का समर्थन करते हुए कहा-‘‘अन्नदाता! आप ठीक कह रहे हैं। वही है, बिल्कुल वही।’’
बीरबल ने पुनः प्रश्न किया-‘‘वही-वही क्या कहते हो, इसका नाम बताओ।’’
बनिये बोले-‘‘हुजूर! वही है जिसका नाम अभी-अभी अन्नदाता ने लिया।’’
बीरबल ने भी अपने बाल धूप में नहीं पकाए थे, बनियों की चालभरी बातों को सुनकर बोले-‘‘अन्नदाता ने जो कुछ कहा मुझे वह याद नहीं है, आपको बताने में क्या आपत्ति है?’’
बनिये बोले-‘‘सरकार! हम लोग भी कुछ भूल रहे हैं।’’
यह सुनकर बादशाह सलामत से चुप न रहा गया। वे बोले-‘‘मैंने उड़द की दाल कहा है।’’
बनियों ने एक स्वर में कहा-‘‘हां, गरीबपरवर वही।’’
यह सब होते हुए भी बनियों ने अपने मुंह से उड़द की दाल का नाम नहीं लिया। बादशाह ने उनको चले जाने का आदेश दिया। जब बनिये चले गए तब बीरबल ने बादशाह से कहा-‘‘देखी आलीजहां! आपने बनियों की चतुराई। उन्होंने खुद कुछ न कहकर आपसे ही कहलवा लिया।’’
बादशाह ने बीरबल की अक्ल की दाद दी और वे बीरबल से प्रसन्न हुए।