पुलिस और भूमाफियाओं ने ‘धर्म प्रचारक’ को बना दिया कुख्यात अपराधी, कब्जाया आश्रम

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मथुरा। धर्म नगरी वृंदावन भूमाफियाओं-अफसरों और राजनेताओं के गठजोड़ का तिलिस्म योगी सरकार के तमाम दावां के बाद भी टूटने का नाम नहीं ले रहा है। इसके चलते वृंदावन में बेशकीमती जमीनों पर अफसरों की मिलीभगत के चलते सोनभद्र जैसी घटना की वृंदावन में पुनरावृत्ति होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। ताजा मामले में भूमाफियाओं द्वारा पुलिस से गठजोड़ कर जमीन मालिक को ही फर्जी मुकदमों में फंसा कर इनामी अपराधी घोषित कर दिया। इसके बाद उसे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया। ताकि उसकी करोड़ों रुपए की जमीन पर भूमाफिया का कब्जा बरकरार रह सके।
विगत दिनों सोनभद्र में जमीन कब्जाने को लेकर 10 लोगों की होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के आदेश के बाद भी मथुरा-वृंदावन में भूमाफियाओं के हौंसले बुलंद हैं। जिस तरह सोनभद्र की घटना में एक आईएएस का नाम जमीनी विवाद में सामने आया था। उसी तरह वृंदावन में सुनरख रोड पर एक बेशकीमती जमीन को कब्जाने में भूमाफियाओं के साथ अफसरों का गठजोड़ सामने आ रहा है। इसमें भूमाफियाओं के साथ गठजोड़ कर जमीन मालिक एवं देश विदेश में धार्मिक प्रवचन करने वाले फरीदाबाद निवासी विकास अरोड़ा के खिलाफ करीब एक दर्जन फर्जी मामले दर्ज कराकर जेल भेज दिया गया है।


घटना के संबंध में ‘विषबाण’ को उपलब्ध कराए गए अभिलेखों के मुताबिक फरीदाबाद निवासी कथा वक्ता विकास अरोड़ा ने 9 नवंबर 2000 को आश्रम के लिए 2384 वर्ग गज जमीन सुनरख रोड वृंदावन में प्राचीन भारत वैदिक संस्था के गठन करते हुए अपने नाम से 12.50 लाख में खरीदी थी। कुछ दिन बाद कथा वक्ता विकास अरोड़ा ने आश्रम को अपने निकट सहयोगी अपर्णा जोशी पत्नी अरविंद जोशी, अरविंद जोशी पुत्र देशराज जोशी निवासी ई 163 नारायण विहार नई दिल्ली एवं विदेशी शिष्या मारिया डेल पिलर निवासी दोसरिओस एसकेजु कांस्टारिया सेंट्रल अमेरिका सहित कुछ लोगों को संचालन के लिए सौंप दिया और स्वयं धार्मिक प्रवचन करने के लिए अमेरिका सहित अन्य देशों की यात्रा पर चले गए। करीब 3 वर्ष बाद जब वह वापस लौटे तो उनकी निकट सहयोगी अपर्णा जोशी ने प्राचीन भारतीय वैदिक समिति का नया गठन करते हुए स्वयं को अध्यक्ष घोषित करते हुए उक्त जमीन पर भूमाफियाओं के सहयोग से न सिर्फ कब्जा कर लिया वरन् विकास अरोड़ा पर फर्जी मुकदमे लगाते हुए उसे जेल भिजवा दिया। इसके बाद वर्ष 2012 में मुनीश कुमार गौतम ने 19 मई 2012 को प्राचीन भारतीय वैदिक समिति का गठन कर रजिस्टर्ड कराकर विकास अरोड़ा के जेल में निरुद्ध होने के दौरान आश्रम को अपने कब्जे में लेते हुए कथित संतों को वहां से हटा दिया। इस दौरान धार्मिक गुरु विकास अरोड़ा पर धोखाधड़ी के 11 मामले दर्ज कराए गए। जैसे ही विकास अरोड़ा एक मामले में जेल से बाहर निकल कर आता, वैसे ही उसे पुनः जेल भेज दिया जाता। जो आज भी मथुरा जेल में निरुद्ध है। उसे 12 हजार का ईनामी अपराधी घोषित करते हुए हाल ही में 24 मार्च 2019 को एक बार फिर जेल भेज दिया गया है।

विकास अरोड़ा

इस संबंध में विकास अरोड़ा ने वर्ष 2015 में पुलिस-प्रशासन-भूमाफियाओं की गठजोड़ की शिकायत पुलिस महानिदेशक लखनऊ से की गई। इसकी उच्चस्तरीय जांच पुलिस महानिरीक्षक लोक शिकायत अशोक मुथा जैन द्वारा की गई। जांच रिपोर्ट में विकास अरोड़ा के खिलाफ दर्ज तीन मामलों को संदिग्ध मानते हुए अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन से विवेचना कराने की संस्तुति की गई।
इससे पूर्व पीड़ित की शिकायत पर वर्ष 2013 में जिलाधिकारी मथुरा द्वारा 4 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई थी। इसमें तत्कालीन अपर जिलाधिकारी अवधेश कुमार तिवारी, अपर पुलिस अधीक्षक राजू बाबू सिंह, क्षेत्राधिकारी सदर अतुल श्रीवास्तव ने अपनी संयुक्त जांच रिपोर्ट में विकास अरोड़ा को जमीन का वैध मालिक मानते हुए मुनीश गौतम के कब्जे को अवैध मानते हुए बेशकीमती जमीन को लेकर अशांति उत्पन्न होने की आशंका व्यक्त की थी। पीड़ित के खिलाफ दर्ज 3 मामलों की जांच भ्रष्टाचार निवारण संगठन झांसी द्वारा की गई। तीनों ही मामलों में पुलिस द्वारा दाखिल की गई चार्जशीट को गलत माना गया। बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह लगाते हुए न्यायालय में अनुपूरक केस डायरी मूल रुप में किए जाने की संस्तुति की गई लेकिन पीड़ित को फिर भी न्याय नहीं मिल सका वरन्् उस पर पुलिस द्वारा 12 हजार का पुरस्कार भी घोषित कर दिया गया।
पुलिस प्रशासन एवं भूमाफियाओं के गठजोड़ से त्रस्त विकास अरोड़ा ने थक हारकर मौके पर शेष बची 1400 वर्ग गज जमीन का 27 अगस्त 2014 को मथुरा के पूर्व सांसद एवं स्वतंत्रता सेनानी स्व. ठाकुर चकलेश्वर सिंह के पौत्र ठा. चंद्रशेखर सिंह निवासी डैंपियर नगर मथुरा सहित अन्य साथियों के नाम 1.5 करोड़ में बैनामा कर दिया लेकिन इसके बाद भूमाफियाओं ने पुलिस से सेटिंग गेटिंग कर विकास अरोड़ा के साथ चंद्रशेखर सहित अन्य खरीदारों के खिलाफ भी धोखाधड़ी के मुकदमे दर्ज करा दिए।
इस संबंध में जमीन के खरीदार एवं पूर्व सांसद के पौत्र ठा. चंद्रशेखर सिंह ने गत दिवस पुलिस महानिदेशक से मुलाकात कर दिए शिकायती पत्र में सपा सरकार के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक धर्मवीर यादव, आईजी आगरा जोन दुर्गाचरण मिश्रा, मुनीश कुमार गौतम, अपर्णा जोशी के गठजोड़ की शिकायत करते हुए 29 अपै्रल 2019 की वृंदावन पुलिस द्वारा उसके कब्जे से जमीन को मुक्त कराकर भूमाफियाओं को कब्जा दिला कर उसे जेल भेजे जाने की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। वृंदावन कोतवाल से इस संबंध में वार्ता करने का प्रयास किया गया लेकिन उनका फोन आउट ऑफ नेटवर्क बताता रहा।