……ये है कान्हा की नगरिया तू देख बबुआ…

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मथुरा। हे कान्हा देख तेरी नगरी का क्या हाल है, अफसर-नेता मालामाल, जनता बेहाल है। यह लाइनें मथुरा जनपद में बिलकुल सटीक बैठती हैं। कहने को मथुरा स्मार्ट सिटी में शुमार है। नगर पालिका से स्वरुप नगर निगम में परिवर्तित हो चुका है। वर्तमान प्रदेश् सरकार में जनपद के दो विधायक कद्दावर मंत्री हैं। मथुरा के 4 विधायक सत्ताधारी पार्टी भाजपा के हैं। पीएम नरेंद्र मोदी से सीधे बिना रोकटोक मिल सकने वाली और सेलेब्रिटी हेमामालिनी मथुरा से सांसद हैं। लेकिन इसके बाद भी मथुरा की दो समस्याएं वर्षां से जस की तस बनी हुई हैं। इनमें एक समस्या शहर में लगने वाला जाम और दूसरी समस्या थोड़ी ही बरसात के बाद पूरे शहर में जलभराव है। इन दोनों ही समस्याओं से शहरवासी वर्षां से लगातार जूझ रहे हैं लेकिन कोई भी सरकार इस नासूर से मथुरा की जनता को निजात नहीं दिला सकी है।
रविवार की सुबह से ही काफी तेज धूप थी। दोपहर में अचानक से तेज बरसात आ गई। इस तेज बरसात ने नगर निगम और प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल कर रख दी। शहर के हर हिस्से में जलभराव हो गया। नए बस स्टेंड के रेलवे पुल, भूतेश्वर रेलवे पुल, पुराने बस स्टेंड के निकट रेलवे पुल समेत कई स्थानों पर इतना पानी भर गया कि वहां से लोगों का निकलना दूभर हो गया। बारिश थमने के बाद विषबाण की टीम शहर के जलभराव वाले स्थानों का जायजा लेने पहुंची तो जलभराव की समस्या काफी विकट दिखी।
टीम नए बस स्टेंड पुल के निकट पहुंची। यहां रेलवे पुल के नीचे से एक ओर रोडवेज वर्कशॉप तक तो दूसरी ओर ब्रजवासी मिठाई वाला तक पानी भरा हुआ था। पुल के नीचे भरे पानी में रोडवेज की एक बस फंस हुई थी। सवारियों से भरा एक रिक्शा टीम के सामने ही पानी में पलट गया। यह रिक्शा पूरी तरह पानी में डूब गया, इसके चलते चालक रिक्शा को संभाल नहीं पाया और सवारियां पानी में ही गिर गईं। इसी दौरान अचानक पानी में एक सांप आ गया। इससे हड़कंप मच गया। लोगों ने शोर मचाना शुरु कर दिया और पानी के अंदर मौजूद लोगों में भगदड़ मच गई। गनीमत रही कि सांप ने किसी भी व्यक्ति पर हमला नहीं किया। यहां भरा हुआ पानी इस तरह हिलोरें ले रहा था जैसे कि कोई छोटी नहर अथवा रजवाहा हो। रेलवे पुल पर पानी भरा होने के कारण पैदल राहगीरों को रेलवे पुल को पार करने के लिए रेलवे लाईन के ऊपर से निकलना पड़ रहा था। इसमें छोटे-छोटे बच्चों को काफी दिक्कतें हो रही थीं। कई बार अचानक ट्रेन के आ जाने से भी भगदड़ की स्थिति उत्पन्न हो गई। यहां से गुजरने वाली रोडवेज बसें और अन्य वाहन वापस लौट रहे थे।
भूतेश्वर बस स्टेंड रेलवे पुल पर भी कमोबेश नए बस स्टेंड रेलवे पुल जैसा ही नजारा था। स्कूटी और बाइक फंसी हुई थी। लोगों को पैदल ही भरे हुए गंदे पानी में से ही निकलना पड़ रहा था। यहां भी सवारियों से भरा हुआ एक रिक्शा पलट गया। इससे सवारियां पानी में गिर गइंर्। पुराने बस स्टेंड रेलवे पुल के नीचे भी पानी भरा हुआ था। यहां से भी वाहन नहीं निकल पा रहे थे। इससे लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। कई लोग पानी के निकलने का इंतजार करते नजर आए ताकि पुल को पार कर अपने गंतव्य स्थान के लिए रवाना हो सकें। जलभराव की लगभग यही स्थिति कंकाली मंदिर के सामने स्थित मुख्य भूतेश्वर रोड पर भी नजर आई। यहां भी इतना जलभराव हो गया था कि लोगों का निकलना मुहाल हो गया। शहर में नयी बसी कालोनियों में पानी की समुचित निकासी की व्यवस्था न होने के चलते यहां भी काफी विकट स्थिति बन गई। लोगों के घरों में भी पानी भर गया। घर के लोग लोटा-बाल्टी लेकर घर से पानी निकालते हुए नजर आए।
विश्व विख्यात कृष्ण नगरी में यह स्थिति तो तब है जब यहां विकास के नाम पर केंद्र और प्रदेश सरकारें करोड़ों रुपए व्यय कर चुकी हैं। इनमें से प्रमुख योजना जेनर्म अभी तक लोगों को याद है।

जेनर्म के नाम पर मथुरा जनपद के विकास के लिए करोड़ों रुपए अवमुक्त किए गए। इस राशि से मथुरा में नाले और सीवर निर्माण होना था। नालों का निर्माण हुआ और सीवर निर्माण भी लगभग पूरा हो गया लेकिन जलभराव की समस्या नासूर की तरह अभी तक बरकरार है। नगर निगम द्वारा गत दिवस कई क्षेत्रों में नालों की सफाई अब कराई गई है। नालों की सफाई कर सिल्ट सड़क पर ही डाल दी थी। रविवार सुबह कृष्णानगर क्षेत्र में सिल्ट सड़कों पर पड़ी हुई थी। इससे वाहन निकल नहीं पा रहे थे और जाम की स्थिति बन रही थी। दोपहर बाद आई बारिश से यह सिल्ट सड़कों पर ही बहने लगी तो कुछ कीचड़ वापस नाले में ही चली गई। अभी तो यह इस मौसम की पहली तेज बरसात थी तब मथुरा में यह स्थिति है। देखना होगा कि आगे आनी वाली बरसात से नगर निगम और प्रशासन स्थानीय लोगों को जलभराव की समस्या से निजात दिला पाने में सफल होगा अथवा मथुरावासी इस नासूर को इसी तरह झेलने पर विवश होते रहेंगे।