हाईवे किनारे फिर सजा धर्म का कारोबार

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मथुरा। रहिमन धंधा धर्म का, कभी न मंदा होय, यह धंधा फूले-फले, जब बाकी धंधे रोएं। यह पंक्तियां एक बार फिर हाईवे किनारे स्थित आश्रम पर सटीक साबित हो रही हैं। जहां तंत्र-मंत्र से गंभीर बीमारियों को ठीक करने के दावे के साथ करोड़ों के व्यापार को अंजाम दिया जा रहा है। शनिवार से शुरु हुए इस दो दिवसीय समागम में बाहर से आने वाले हजारों लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है।
आगरा-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित चौमुंहा के निकट गत वर्षां की भांति एक बार फिर दो दिवसीय धर्म का कारोबार अपनी चरम सीमा पर है। ब्रहर्षि कुमारस्वामी द्वारा आयोजित किए जा रहे इस समागम में कैंसर, हार्ट अटैक सहित अन्य कई गंभीर बीमारियों का तंत्र मंत्र से ठीक करने का दावा जोर शोर से किया जा रहा है। बीज मंत्र देने के नाम पर हजारों रुपए की राशि वसूली जाती है। भक्तों को गुरुमंत्र के साथ हवन सामग्री, अगरबत्ती, पानी की बोतल आदि दी जाती है। श्रीयंत्र के नाम पर एक छोटी पुस्तक भी दी जाती है। इस समागम में स्थानीय लोगों की अपेक्षा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड की गाड़ियां नजर आती हैं। यहां वीआईपी भक्तों को ठहराने के लिए अलग से कॉटेज की व्यवस्था की गई है। इसके बदले भी मोटी रकम वसूली जाती है। कुमारस्वामी द्वारा प्रतिवर्ष समागम से पूर्व लाखों-करोड़ों रुपए विज्ञापन में व्यय किए जाते हैं। पूर्व में इस महंत द्वारा कैंसर रोग को भी सही करने के दावे विज्ञापन के माध्यम से किए जाते रहे हैं। हालांकि इस पर विवाद होने के कारण इस बार जारी किए गए विज्ञापन में कैंसर रोग को ठीक करने का दावा नहीं किया गया है। हालांकि बीमारियों को सही करने के दावे भी यहां आए लोगों से बात करने के बाद फेल होते दिखाई देते हैं। सीतापुर से आए रविप्रकाश ने बताया कि उन्हें शुगर की बीमारी है। उन्होंने विज्ञापन में देखा था कि यहां समागम में आने से बीमारियां सही हो जाती हैं। वह गत वर्ष यहां समागम में आए थे लेकिन अब तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिला है। इसके चलते ही वह एक बार फिर यहां आए हैं।
अजमेर किशन गढ़ से आई महिला सीमा ने बताया कि उन्हें थायराइड की समस्या थी। सही किए जाने के दावे किए गए लेकिन अभी तक उन्हें कोई लाभ नहीं मिला है। हालांकि समागम में यहां कई ऐसे लोग मिले हैं जिन्होंने अपनी बीमारी सही होने का दावा किया है लेकिन उनकी बीमारी अभी सही नहीं हो सकी है।
यह संत वर्ष 2014 में मथुरा में अचानक उस समय चर्चा में आए थे जब इन्होंने चौमुहां में करीब 2 हजार किलो सोने और करीब 500 करोड़ रुपए की लागत से राधा कृष्ण का मंदिर बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए बकायदा संत ने मथुरा जनपद के साथ अन्य जनपदों में भी होर्डिंग्स आदि के साथ अन्य माध्यमों से प्रचार किया था। लेकिन 5 वर्ष बीतने के बाद भी आज तक यहां मंदिर की आधार शिला तक नहीं रखी गई है।
लोगों पर अपना प्रभाव बनाने के लिए कुमारस्वामी द्वारा अखबारों में प्रभावशाली हस्तियों के साथ अपने फोटो को विज्ञापन में लगवाए जाते हैं। इनमें पीएम मोदी, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, उप्र राज्यपाल राम नाईक सहित विदेशी सांसद भी शामिल हैं। साथ ही विज्ञापन में कई ऐसे लोगों के अनुभव भी छापे जाते हैं जिनमें उक्त लोग अपनी गंभीर बीमारियां के सही होने का दावा करते हैं। यह सब आम लोगों के जेहन में अपना प्रभाव छोड़ने के लिए किया जाता है। इन विज्ञापनों के माध्यम से ही लोगों को अपने प्रभाव में लेकर फिर चूना लगाने का काम किया जाता है। मीडिया को भी यहां अपना कैमरा चलाने की इजाजत नहीं दी जाती है कि कहीं कैमरे की आंखों में उनकी कोई कमी न कैद हो जाए। गत वर्ष जब विषबाण की टीम इनके समागम में पहुंची थी तब टीम को यहां कैमरा नहीं चलाने दिया गया। उनसे कैमरा छीनने का प्रयास किया गया। ताकि कुछ सच बाहर न आ सके। देखना होगा कि धर्म एवं आस्था के नाम पर लोगों की गंभीर बीमारियों को सही करने एवं उनकी अन्य समस्याओं को सही करने के दावे भविष्य में कितने खरे उतर पाएंगे। अथवा लोग धर्म एवं आस्था के नाम पर ऐसे ही ठगे जाते रहेंगे। इस संबंध में ब्रहर्षि कुमारस्वामी से वार्ता कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।