मिनी कुंभ में परिवर्तित हुई गोवर्धन का मुड़िया पूर्णिमा मेला परिक्रमा

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मथुरा। गोवर्धन में मुड़िया पूर्णिमा मेला परिक्रमा आरंभ हो चुकी है। चारों तरफ परिक्रमार्थियों का रेला नजर आ रहा है। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। देश के विभिन्न प्रांतों से यहां पहुंचे भक्तों के कारण यहां मिनी कुंभ का सा माहौल बन रहा है। भक्तों को गोवर्धन तक पहुंचाने के लिए रोडवेज ने करीब 1500 बसों की व्यवस्था की है लेकिन यह नाकाफी साबित हो रही है। रेलवे ने भी अपनी कई ट्रेनों का ठहराव मथुरा स्टेशन पर किया है। तो कई ट्रेनों में अतिरिक्त कोच भी लगाए गए हैं।
पूरे देश में गुरु पूर्णिमा पर्व ब्रज के गोवर्धन धाम में मुड़िया पूर्णिमा मेला के नाम से मनाया जाता है। यहां गुरु भक्ति के साथ-साथ आस्था एवं विश्वास के रुप में पर्व को मनाया जाता है। यहां सनातन गोस्वामी के गोलोकधाम पधारने पर उनके शिष्यों ने अपना सिर मुड़वा कर मानसी गंगा में स्नान कर शोभायात्रा निकालकर गोवर्धन की परिक्रमा लगाई थी। अब यह आयोजन काफी विशाल रुप धारण कर चुका है। प्रतिवर्ष यहां लगभग 80 लाख से एक करोड़ तक श्रद्धालु परिक्रमा लगाने के लिए आते हैं। मेला के कार्यक्रम इस बार 8 जुलाई से आरंभ हो चुके हैं। जबकि 16 जुलाई को गुरु पूर्णिमा है। गुरु पूर्णिमा को मुड़िया संकीर्तन शोभायात्रा के साथ श्रीराधा-श्यामसुंदर मंदिर से श्रीमधाव गौड़ेश्वर संप्रदाय के विभिन्न अनुष्ठान होते हैं। 16 जुलाई को भी शोभायात्रा श्यामसुंदर मंदिर से सुबह 9 बजे महंत रामकृष्ण दास के निर्देश में व दूसरी शोभायात्रा शाम 5 बजे से महंत गोपाल बाबा के निर्देशन में चकलेश्वर स्थित सनातन गोस्वामी महाराज के समाधि स्थल चैतन्य महाप्रभु मंदिर से निकाली जाएगी। दोनों मुड़िया शोभायात्राओं की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं।
मुड़िया पूर्णिमा वाले दिन सात कोस में फैले श्रीगिरिराज की श्रद्धालु परिक्रम लगाएंगे। यहां देशी ही नहीं विदेशी भक्त भी श्रीकृष्ण की भक्ति में सहज ही खिंचे चले आते हैं। यूं तो गोवर्धन में अब वर्ष भर श्रद्धालु गिरिराज परिक्रमा लगाते हैं लेकिन मुड़िया पूर्णिमा मेला के 5 दिनों में गोवर्धन की परिक्रमा लगाना परम पुण्य माना जाता है। बहुत सारे श्रद्धालु पूरे सात कोस की दंडवती परिक्रमा भी लगाते हैं। हालांकि इस बार प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुड़िया मेला के दौरान दंडवती परिक्रमा लगाए जाने पर रोक लगा दी है।
रोडवेज ने श्रद्धालुओं को गोवर्धन तक पहुंचाने के लिए अपनी सभी व्यवस्थाएं पहले ही पूरी कर ली थीं। रोडवेज ने इसके लिए करीब 1500 बसों की तैयारी की थी। इसके लिए पूरे प्रदेश से बसों का बेड़ा मंगाया गया। हालांकि यह व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। भक्तगणों को बसों की छत पर बैठकर गोवर्धन तक जाना पड़ रहा है। वहीं डग्गेमार वाहन इसका लाभ उठाकर श्रद्धालुओं को ढो रहे हैं। हालांकि इन वाहनों में यात्रा करना भक्तों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।