सपना जीत गयीं, ब्रज हार गया….

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जगदीश वर्मा ‘समन्दर’
मथुरा । हरियाणा की डाँसर और रागिनी गायक सपना चैधरी का ब्रज आगमन निश्चित हो गया । वह 7 जुलाई को मथुरा के कोसीकलां में उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयेाजित ‘बरखा-बहार’ कार्यक्रम में अपने नृत्य-गीत की प्रस्तुति देंगी । इससे पहले भी दो बार उनका वृन्दावन और मथुरा में कार्यक्रम निश्चित हुआ था, जिसकी प्रैस काॅफ्रेंस हुई, दूसरे की टिकिट भी बिक गयीं लेकिन ब्रज के सुधी वाशिंदों और यहाँ के कलाकारों ने ब्रज-वृन्दावन में सपना के कार्यक्रम पर कड़ा एतराज जताया । प्रशासन तक इस एतराज की शिकायत हुई और सामाजिक संस्थाओं के साथ प्रमुख राजनीतिक दलों के लोगों ने भी सपना के कार्यक्रम को ब्रज संस्कृति के खिलाफ बताया । मथुरा में सपना का कार्यक्रम करवा रही मुम्बई-आगरा की कम्पनियों के पास जिला प्रशासन से कार्यक्रम की अनुमति पत्र थे लेकिन इसके बावजूद जन विरोध को देखते हुये प्रशासन ने बाद में सपना का कार्यक्रम निरस्त करवा दिया । हरियाणा की डाॅंसर का जलवा कृष्ण नगरी में देखने की तमन्ना पाले भी कुछ लोग थे लेकिन व्यापक जनविरोध और राजनैतिक मजबूरी की वजह से वे खुलकर सपना के साथ खड़े नहीं हो सके । सपना के विरोध में महिलायें भी थीं और सामाजिक-धार्मिक संस्थाओं के प्रतिनिधि भी । दलील थी कि सपना आयटम डाॅंसर है फूहड़ नृत्य-संगीत से वह युवा पीढ़ी के लिये रोलमाॅडल नहीं है । इसके साथ ही भगवान श्रीकृष्ण की नगरी और यहाँ की संस्कृति के अनुसार सपना के कार्यक्रम का कोई मेल नहीं है, बल्कि वह इसके बिल्कुल उलट है । ब्रज की अपनी समृद्ध संस्कृति और कला है । ब्रज की विभिन्न विधाओं के कलाकार यहाँ मौजूद हैं जो विश्वभर में राधा-कृष्ण नाम के सुनहरे गीत-संगीत-नृत्य और अन्य कला प्रस्तुतियों से ब्रज की विरासत का डंका बजाते हैं । लेकिन ब्रज की इस वृहद विरासत का असल मोल शायद राजनीति नहीं जानती है । शायद यही कारण है कि ब्रज संस्कृति के नाम पर सरकार कार्यक्रम तो आयोजित करवा रही है लेकिन ब्रज के कलाकारों और सांस्कृतिक पहरेदारों के मान और पहचान से उसे कोई मतलब नहीं है ।
जिस सपना चैधरी के कार्यक्रम के लिये संत समाज से लेकर सामाजिक संस्थाओं एवं लोककलाकारों ने पूर्व में आपत्ति जतायीं, धार्मिक शहर में जनविरोध के चलते प्रशासन ने कार्यक्रम स्थगित किया, अब उसी कार्यक्रम के लिये प्रशासन तैयारियाँ करने में जुटा हुआ है । क्योंकि यह कार्यक्रम उ0प्र0 सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित करवाया जा रहा है । इस पर वह लोग भी मूक हैं जो सपना के पूर्व के कार्यक्रम पर मुखर विरोधी थे । बीते लोकसभा चुनावों में सपना के काॅग्रेस की टिकट पर मथुरा से चुनाव लड़ने की खबरों पर भाजपा समर्थकों ने सपना को अश्लील डाॅंसर बताते हुये उन्हें टिकट देने पर काॅग्रेस को खूब बुरा-भला कहा था । हालांकि बाद में यह अटकलें समाप्त हुईं और सपना मनोज तिवारी के साथ बीजेपी के पक्ष में प्रचार करती दिखायीं दीं ।

पूर्व में सपना को कोसने वाले ऐसे राजनीतिक विरोधी अब खामोश हैं क्योंकि अब सपना के पास उ0प्र0 सरकार और उनके मंत्रियों का अनापत्ति प्रमाण पत्र है । लेकिन ब्रज में सपना के मौजूदा कार्यक्रम को लेकर अब भी पूर्ण शांति नहीं है । कुछ सामाजिक संस्थाओं और लोककलाकारों का दल शनिवार को अपनी आपत्ति के साथ जिलाधिकारी से मिला है । सपना के विरोध में शामिल लोगों को सबसे ज्यादा मलाल इस बात का है कि कार्यक्रम आयोजित कराने वाले विभाग के मंत्री ब्रज से ही हैं और वही ब्रजवासियों की भावनाओं को नहीं समझ पा रहे हैं । ब्रज के कुछ कलाकारों का कथन है कि ब्रज के जनप्रतिनिधि के रूप में उन्हें ब्रज की संस्कृति, महत्व और ब्रजवासियों की भावनाओं को ध्यान रखना चाहिये था लेकिन वह स्वंय इस कार्यक्रम के संरक्षक बन गये हैं । तो क्या ब्रजवासियों के जनप्रतिनिधियों के लिये जनता की भावनायें कुछ मायने नहीं रखती हैं ? ब्रज में एक से बढ़कर एक कलाकार हैं जो यहाँ की मर्यादा और संस्कृति के अनुरूप प्रस्तुति से मन मोह सकते हैं । इन्हें अवसर मिलना चाहिये था । संस्कृति मंत्रालय का कार्य उस स्थान विशेष की सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करना है, इससे इतर दूसरे प्रदेशों के कलाकारों को बुलाना कहाँ तक तर्कसंगत है । खासकर तब जब किसी कलाकार के पूर्व कार्यक्रमों को ब्रजसंस्कृति विरोधी मानते हुये अधिंकाश ब्रजवासी सड़क पर उतर चुके हैं । एक कलाकार के रूप में सपना चैधरी का अपना मुकाम और पहचान हो सकती है लेकिन एक धार्मिक शहर की मर्यादा में बुद्धिजीवी अगर उन्हें यहाँ की संस्कृति से जोड़कर नहीं देखते तो यह सरकार का दायित्व है कि वह ऐसे कार्यक्रम आयोजित कराने से बचे । संस्कृति विभाग की जिम्मेदारी अपने क्षेत्र की संस्कृति और कला को लेकर ज्यादा बड़ी है न कि किसी कलाकार विशेष की जिद को पूरा करने के लिये ।
सपना के समर्थकों का तर्क है कि सपना चैधरी को देखने ब्रज से भीड़ पहुॅंचेगी लेकिन मौजूदा विरोध को देखते हुये यह तय है कि इस भीड़ में ठुमकों पर थिरकते नौजवानों के चेहरे तो शामिल होगें लेकिन ब्रज की बूढ़ी सांस्कृतिक विरासत सपना की इस जीत पर किसी कौने में आँसू बहा रही होगी ……………….. ।