चुनाव में बुरी हार के बाद अध्यात्मिक शांति की खोज में आए शिवपाल

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मथुरा। पहले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव में बुरी हार के बाद चाचा शिवपाल यादव अध्यात्मिक शांति की खोज में गत दिवस मथुरा पहुंचे। यहां उन्होंने शेरगढ़ रोड स्थित एक मंदिर में आयोजित हो रही भागवत कथा में करीब 3 घंटे बिताए। हवन पूजा कर आरती में भी भाग लिया। उन्होंने किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा करने से इंकार कर दिया।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पूर्व ही समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और चाचा शिवपाल यादव के बीच तनाव की खबरें आने लगी थीं। इसी तनाव के बीच विधानसभा चुनाव हुए और सपा की बुरी हार हुई। लोकसभा चुनाव से पहले बगावती तेवर दिखाते हुए चाचा शिवपाल यादव ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया नामक राजनीतिक पार्टी का गठन करते हुए अकेले ही चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। फिरोजाबाद से अपने ही भतीजे अक्षय यादव के खिलाफ स्वयं उतरे और जीत तो नहीं सके साथ ही अपने भतीजे की हार का कारण भी बने। प्रदेश में विभिन्न सीटों पर उतरे शिवपाल यादव की पार्टी के लोकसभा उम्मीदवारों की बुरी हार हुई। चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद फिलहाल शिवपाल यादव शांत दिखाई दे रहे हैं। गत दिनों समाजवादी पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सैफई में पारिवारिक मीटिंग रखी। चर्चा रही कि लोकसभा चुनाव में सपा और प्रसपा की बुरी हार के बाद अब सबक लेते हुए संभवतः शिवपाल यादव फिर से समाजवादी पार्टी में शामिल हो सकते हैं। फिलहाल यह चर्चाएं ही हैं और अभी तक इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसी दौरान गत दिवस शिवपाल यादव मथुरा स्थित नौहझील के शेरगढ़ रोड स्थित गांव पीरपुर के पीर बाबा मंदिर पहुंचे। यहां नागड़ी बाबा की देखरेख में आयोजित हो रही भागवत कथा का श्रवण किया। करीब एक बजे पहुंचे शिवपाल यादव ने स्थानीय समर्थकों के साथ हवन किया और आरती की। बातचीत में उन्होंने कहा कि वह राजनीतिक मुद्दों पर बात नहीं करेंगे। वह यहां आध्यात्मिक दौरे पर आए हैं। अतः किसी भी तरह की राजनीतिक चर्चा नहीं करना चाहते। हवन पूजन करने के बाद शिवपाल यादव नौहझील स्थित जिला कार्यकारिणी सदस्य गोपाल चौधरी के आवास पर कुछ देर रुके। उन्होंने स्थानीय समर्थकों से उनकी कुशलक्षेम पूछी। इसके बाद वह यहां से रवाना हो गए।