सिंडीकेट बैंक ने लगाई उपभोक्ता को चपत, जुर्माना

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मथुरा। सिंडीकेट बैंक किस तरह अपने उपभोक्ताओं को चूना लगा रहा है। इसका एक ताजा उदाहरण उपभोक्ता फोरम द्वारा दिए गए फैसले में सामने आया है। बैंक ने अपने होम लोन के उपभोक्ता से तयशुदा ब्याज दर से अधिक ब्याज वसूली। साथ ही उपभोक्ता से लोन की चार किस्तें लेने के बाद भी उसे लोन खाते में जमा नहीं किया गया। जिला उपभोक्ता फोरम ने बैंक को चार किस्तों सहित वसूली गई अधिक ब्याज दर की रकम ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया है। निर्देश मिलने के बाद बैंक अधिकारियों में खलबली मच गई है।


बृजबिहारी लाल एवं उसकी पत्नी मंजू रानी ने सिंडीकेट बैंक से वर्ष 2006 में होम लोन लिया था। बैंक द्वारा होम लोन पर सबसे कम ब्याज दर होना बताया था। होम लोन की ब्याज दर 8.5 प्रतिशत दर के हिसाब से स्वीकार की गई। होम लोन 108 किस्तों में अदा करना था। जबकि बैंक द्वारा वर्ष 2011 से 11 प्रतिशत ब्याज की दर से ब्याज वसूली गई साथ ही अपै्रल 2007 से फरवरी 2008 के मध्य की 4 किस्तें जमा करने के बाद भी बैंक ने इस रकम को लोन खाते में जमा नहीं किया। उक्त दोनों समस्याओं के बारे में कई बार शिकायत करने के बाद भी बैंक प्रबंधन ने कोई सुनवाई नहीं की और न ही समस्या का निराकरण किया।

इससे परेशान होकर उपभोक्ता ने जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर दिया। फोरम ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनते हुए उपभोक्ता के पक्ष में निर्णय दिया। निर्णयानुसार सिंडीकेट बैंक को होम लोन की धनराशि पर 8.5 के स्थान पर 11 प्रतिशत ब्याज की दर से वसूली गई ब्याज की राशि 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से आदेश के 45 दिन के अंदर उपभोक्ता को वापस करनी होगी। इसी प्रकार 4 किस्तों की राशि लैप्स एकाउंट में भेजने के फलस्वरुप इस अवधि में वसूल की गई ब्याज की धनराशि भी 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज की दर से, मानसिक क्षतिपूर्ति के रुप में 5 हजार रुपए और वाद व्यय के रुप भी 5 हजार रुपए 45 दिन के अंदर ही बैंक द्वारा उपभोक्ता को देने होंगे। इस निर्णय से बैंक अधिकारियों द्वारा कारगुजारियों की कलई खुल गई है।