काले कारोबार के ‘मठाधीश’ आखिर कब होंगे ‘बे-नकाब’!

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मथुरा। न गुंडाराज, न भ्रष्टाचार का नारा देकर उत्तर प्रदेश में सरकार बनाने वाली भाजपा के नेता ही सरकार की छवि बिगाड़ने में लगे हैं। इसका खुलासा गत दिवस एक बार फिर कृष्णानगर पुलिस द्वारा आईपीएल के सट्टेबाजों पर की गई कार्यवाही से हो गया है। पुलिस द्वारा भाजपा नेता सहित 5 लोगों के पकड़े जाने के बाद सट्टेबाजी का खेल एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। मथुरा में यह कारोबार कोई नया नहीं है। इस कारोबार में सत्ताधारी नेता, उनके पुत्र सहित माफिया पुलिस अधिकारियों से मिलीभगत करोड़ों-अरबों के वारे न्यारे कर रहे हैं। इस अवैध करोबार में भाजपा नेताओं के साथ संघ नेताओं की भी भूमिका एक बार फिर सामने आ रही है। गत दिवस आईपीएल सट्टा लगाने के आरोप में पकड़े गए आरोपी तो इस कारोबार की छोटी मछली बताया जा रहा है। जबकि बड़ी मछलियां अभी पकड़ी जानी शेष हैं। शहर में आईपीएल सट्टा के साथ चुनाव सट्टा, ऑनलाइन सट्टा एवं मटका सट्टा भी बड़े पैमाने पर चल रहा है। क्या पुलिस अधिकारी इस कारोबार में लिप्त सफेद पोश लोगों पर कार्यवाही कर पाएंगे।


गत दिवस कृष्णानगर पुलिस ने भाजपा युवा मोर्चा का पूर्व जिलाध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी निवासी कृष्णानगर, कोमल सिंह निवासी राधिका विहार, सतीश चौधरी निवासी कृष्णानगर, धर्मेंद्र निवासी सुखदेव नगर और ब्रजेश निवासी नगला माना को हाइवे से एक कार में आईपीएल के मैच में सट्टा लगाते हुए पकड़ा था। पुलिस ने इनके कब्जे से 18 हजार रुपए और पांच मोबाइल बरामद किए। पुलिस सूत्रों की मानें तो इस कारोबार में कुछ बड़े नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि पुलिस अभी इन नामां पर कार्यवाही करने से बच रही है। इस खेल में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं उनमें भाजपा नेताओं के साथ आरएसएस के नेताओं के नाम भी शामिल हैं। भाजपा नेता भूपेंद्र चौधरी को छुड़ाने के लिए कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने कोतवाली में पहुंचकर पुलिस पर दबाव बनाया लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो सके। क्रिकेट मैचों के सट्टे के इस अवैध कारोबार का सरगना सत्ताधारी दल के ही एक पूर्व विधायक का पुत्र बताया जा रहा है। वह अभी भी फरार है अथवा उस पर पुलिस अधिकारियों का वरदहस्त है। यह सामने आना अभी शेष है।


इनके नाम पूर्व में पुलिस अधिकारियों द्वारा सट्टेबाजों पर की गई कार्यवाही में भी सामने आए थे। गत वर्ष अपै्रल माह में कोतवाली पुलिस ने आईपीएल मैचों की सट्टेबाजी करते हुए चार लोगां को पकड़ा था। उसमें भी एक बड़ा भाजपा नेता पूर्व जिला मंत्री विनोद शर्मा पुत्र चंद्रपाल निवासी नौहझील सहित दीपक पुत्र मुरारीलाल निवासी विकास नगर थाना हाइवे, रवि पाराशर पुत्र कंचन सिंह निवासी प्रोफेसर कालोनी कोतवाली, उन्नत उपाध्याय पुत्र दिनेश चंद्र शर्मा पकड़े गए थे। उस समय पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि इस अवैध कारोबार में संघ के एक प्रमुख पदाधिकारी का भाई सट्टा कारोबार का सरगना है। पुलिस ने सरगना के घर पर छापा मारा लेकिन वह हाथ नहीं लग सका। जबकि अंतापाड़ा से दूसरे प्रमुख सट्टा कारोबारी पुलिस के पहुंचने से पूर्व ही फरार हो गया।

उस समय पकड़े गए भाजपा नेता विनोद शर्मा को छुड़ाने के लिए भी एक मंत्री एवं कई वरिष्ठ भाजपा नेता ने पुलिस अधिकारियों पर दबाव बनाया था लेकिन पुलिस अधिकारियों ने दबाव को सिरे से खारिज करते हुए कार्यवाही की थी। संघ के पदाधिकारियों का नाम सामने आने पड़े पर उक्त पदाधिकारियां को हटा दिया गया। इस मामले में एक भाजपा नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया था कि तत्कालीन एसएसपी प्रभाकर चौधरी को इस कार्यवाही का खामियाजा अपने स्थानांतरण से भुगतना पड़ा। सूत्रों की मानें तो यदि उस समय एसएसपी प्रभाकर चौधरी का स्थानांतरण नहीं होता तो इस खेल में भाजपा एवं संघ के पदाधिकारियों के बड़े चेहरे बेनकाब हो जाते और वह सींखचों के पीछे पहुंच जाते। एक बार फिर पुलिस अधिकारियों ने भाजपा नेताओं के गिरेबान पर हाथ डाला है उसमें सटोरियों का कहना है कि जिस तरह पूर्व एसएसपी को यहां से हटवाया गया था उसी तरह जल्द ही एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को भी हटवाए जाने के प्रयास शुरु हो गए हैं। देखना होगा कि इन दावों में कितना दम है।


सूत्र बताते हैं कि कुछ समय पूर्व शहर के प्रमुख सट्टा कारोबारी के स्टेट बैंक चौराहा के निकट स्थित आवास पर एसओजी ने छापा मार कार्यवाही की थी। सट्टा कारोबारी फरार हो गया तो उसके राधा ऑर्चिड निवासी रिश्तेदार के यहां दबिश दी गई। यहां भी सटोरिया नहीं मिला तो रिश्तेदारों को पकड़कर हवालात में डाल दिया गया। इस प्रकरण में वृंदावन के एक संत ने मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए करोड़ों रुपए की रकम एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को दिलाई। उसके बाद पुलिस के चंगुल से सट्टा किंग के रिश्तेदार रात में ही रिहा हो सके। वहीं भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी पर पर्दे के पीछे से यह भी आरोप लग रहे हैं कि वह अपने निजी स्वार्थ के लिए अधिकारियों एवं नेताओं को शराब-शबाव की पार्टी दे रहा है। इससे पहले प्रदेश में सुर्खियों में रहे जनपद में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले में भी भाजपा और संघ पदाधिकारियों का नाम सामने आया था। इस प्रकरण में विधायक का चुनाव लड़ चुके एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने भर्ती घोटाले के मास्टरमाइंड को खुलेआम संरक्षण प्रदान किया था। वहीं संघ के पदाधिकारियों का चेहरा शिक्षक भर्ती घोटाले में अभी तक फरार चल रहे एक आरोपी के साथ सामने आया था। जहां भाजपा सरकार स्वयं को भ्रष्टाचार और गुंडाराज का सख्त विरोधी बताती है। वहीं स्थानीय भाजपा नेताओं की कार्यशैली भाजपा सरकार का मखौल उड़ाती हुई दिखती है। देखना होगा कि क्या पुलिस अधिकारी सट्टा कारोबार के मठाधीशों पर हाथ डालकर उन्हें सींखचों के पीछे तक पहुंचा पाते हैं अथवा इस बार भी कार्यवचाही सिर्फ प्यादों को पकड़ने तक सीमित रहेगी।