राजा महेंद्र प्रताप को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

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मथुरा। शिक्षा के उत्थान के लिए मथुरा, अलीगढ़, बुलंदशहर सहित अन्य कई जनपदों में अपनी बेशकीमती जमीन को दान करने वाले राजा महेंद्र प्रताप की 40वीं पुण्यतिथि पर प्रेम महाविद्यालय इंटर कालेज वृंदावन में हवन कर उनकी एवं मूर्ति पर माल्यार्पण कर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। इस अवसर पर चिकित्सा कैम्प लगवाकर गरीबो के स्वास्थ्य चेकअप कराकर दवाई वितरित की गई। त्यागमूर्ति राजा महेंद्र प्रताप ने सन 1909 में भारत में ही नही वरन एशिया में प्रथम और विश्व में द्वितीय तकनीकी विद्यालय की स्थापना प्रेम महाविद्यालय वृन्दावन में की। उन्हांने वृंदावन में गुरुकुल विश्वविद्यालय की स्थापना की। आज मथुरा रोड़ पर प्रेम महाविद्यालय पॉलिटेक्निक उनके द्वारा स्थापित संचालित है।


अलीगढ़ में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी, अलीगढ़ का डीएवी इंटर कॉलेज सहित लगभग सहायता प्राप्त 20 शिक्षण संस्थाएं राजा महेंद्र प्रताप द्वारा ही स्थापित संचालित है। प्रेम महाविद्यालय इंटर कालेज के प्रधानाचार्य देवप्रकाश ने बताया कि राजा महेंद्र प्रताप ने मात्र 23 वर्ष की उम्र में सारी संपत्ति शिक्षा के लिए दान कर दी थी। उन्होंने मात्र 28 वर्ष की आयु में भारत को स्वतंत्र कराने हेतु देश छोड़ दिया और 32 वर्षो तक विदेशो में रहकर कार्य किया। राजा साहब को 1915 में अस्थायी हिन्द सरकार का प्रथम राष्ट्रपति नामित किया गया। 1932 में राजा महेदं्र प्रताप को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए नामित किया गया। सयुंक्त राष्ट्र संघ की स्थापना में राजा साहब का सबसे महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। राजा महेंद्र प्रताप ने ही वर्ष 1957 में भाजपा के दिग्गज नेता और बाद में प्रधानमंत्री रहे अटल विहारी बाजपेयी को मथुरा लोकसभा से हराया। राजा महेंद्र प्रताप पर भारत सरकार ने डाक टिकट भी जारी की है।

सोमवार को श्रद्धाजंलि अर्पित करने वालो में मथुरा गठबंधन के प्रत्याशी कुँवर नरेंद्र सिंह, समाज सेविका यमुना चौधरी एडवोकेट, ट्रस्ट सचिव विनोद चौधरी, अमित सिंह, समाजसेवी हरपाल राणा, बल्लभगढ़ के कुँवर नरवीर सिंह , डॉ. जेएस जाट , गंगा बाले बाबा आनंद स्वरूप, डॉ. शिव अधार सिंह यादव, अरुण कुमार सिंह, नीलम, अजय कुमार मौर्य, राम प्रसाद, डॉ, सोमकान्त त्रिपाठी , पंकज चौधरी, सुमन रानी, सुनील कुमार वर्मा, सुरेश चंद्र लवानिया, मुकेश आदि उपस्थिति रहे।