मान्यता की हेराफेरी में फंसे पत्रकार कमलकांत, लगा डीएम के फर्जी हस्ताक्षर का आरोप

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मथुरा। जिला सूचना अधिकारी और पत्रकार कमलकांत उपमन्यु के बीच हाल ही में छिड़ा विवाद अभी थमा नहीं था कि कमलकांत उपमन्यु अपने मान्यता कार्ड नवीनीकरण के मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि वर्ष 2015 में उन्होंने तत्कालीन डीएम के फर्जी हस्ताक्षर कर अपने मान्यता कार्ड का नवीनीकरण करा लिया। इस खुलासे के बाद मीडिया जगत और प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है।


वर्ष 2014 में बलात्कार के आरोपों का सामना कर रहे उपजा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बृज प्रेस क्लब के अध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु का पिछले दिनों जिला सूचना अधिकारी सुरजीत सिंह से विवाद हो गया था। इसमें जिला सूचना अधिकारी द्वारा थाना सदर बाजार में सरकारी कार्य में बाधा सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस विवाद को सुलझाने के लिए आला अधिकारी एवं वरिष्ठ पत्रकारों के बीच बैठक हुई थी लेकिन सूचना अधिकारी द्वारा समझौते से इंकार कर दिया गया। इस विवाद एक ओर प्रशासन और वरिष्ठ पत्रकार खत्म कराने के प्रयास में जुटे हुए हैं वहीं दूसरी तरफ कमलकांत उपमन्यु एक नए विवाद में फंसते दिखाई दे रहे हैं। विषबाण द्वारा जिला सूचना अधिकारी कार्यालय से सूचना अधिकारी अधिनियम 2005 के तहत मांगी गई सूचना में बताया गया है कि वर्ष 2015 में तत्कालीन जिलाधिकारी मथुरा राजेश कुमार द्वारा कमलकांत उपमन्यु के खिलाफ बलात्कार के मामले को देखते हुए मान्यता कार्ड नवीनीकरण की पत्रावली पर हस्ताक्षर नहीं किए गए थे लेकिन आरोप है कि कमलकांत उपमन्यु ने तत्कालीन डीएम के फर्जी हस्ताक्षर कर मान्यता कार्ड का नवीनीकरण करा लिया।

बताया जाता है कि उस समय सहायक अपर जिला सूचना अधिकारी रीता शर्मा द्वारा तत्कालीन डीएम राजेश कुमार के सामने मान्यता के नवीनीकरण की पत्रावली प्रस्तुत की, इसमें डीएम ने मान्यता प्राप्ति की शर्तां से अवगत कराते हुए हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था। इसके बाद कई बार फाइल प्रस्तुत की गई लेकिन हर बार पत्रावली को वापस कर दिया गया। लेकिन इसके बाद भी 2015 में जिलाधिकारी के हस्ताक्षर से मान्यता कार्ड का नवीनीकरण हो गया। इसके बाद 2016, 17, 18 एवं 2019 में भी अधिकारी बगैर जांच पड़ताल के मान्यता का नवीनीकरण करते आ रहे हैं। बताते हैं कि इस संबंध में वर्तमान जिला सूचना अधिकारी द्वारा 2015 की मान्यता प्राप्ति की पत्रावली को खंगाला गया तो उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। इसकी जानकारी संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारियों से की तो किसी ने भी मान्यता के संबंध में पुष्टि नहीं की। जिला सूचना अधिकारी सुरजीत सिंह द्वारा विषबाण को उपलब्ध कराई गई आरटीआई के जवाब में बताया गया है कि 2015 में कमलकांत उपमन्यु की मान्यता नवीनीकरण जिला सूचना कार्यालय द्वारा नहीं किया गया है। इस संबंध में जिलाधिकारी सर्वज्ञराम मिश्रा से उनके सीयूजी नंबर पर विषबाण द्वारा संपर्क स्थापित किया गया तो बताया गया कि वह इलाहाबाद उच्च न्यायालय में आवश्यक कार्य से गए हुए हैं। नगर मजिस्ट्रेट मनोज कुमार सिंह ने कहा कि इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वह इसकी जानकारी सूचना विभाग से करेंगे।

जबकि आरोपी कमलकांत उपमन्यु से उनके मोबाइल नंबर 9837835555 पर विषबाण के मोबाइल नंबर 7055933728 द्वारा संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन अटेंड कर लिया लेकिन जैसे ही विषबाण न्यूज का परिचय तो उन्होंने फोन कट कर दिया और दूसरी बार संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन अटेंड किए बिना ही काट दिया। इसके बाद उनके व्हाट्सएप नंबर पर सवाल का मैसेज भेजा गया। जिसे पढ़ तो लिया गया लेकिन कोई जवाब नहीं दिया गया। इसी के साथ उनके समाचार पत्र की मेल आईडी पर भी सवालों का मैसेज भेज गया लेकिन इसका भी कोई जवाब नहीं दिया गया। इस संबंध में जिला सूचना अधिकारी सुरजीत सिंह से विषबाण द्वारा सरकारी सीयूजी नंबर 9453005376 पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि कार्यालय द्वारा वर्ष 2015 में कमलकांत उपमन्यु का नवीनीकरण नहीं किया गया। उनसे सवाल किया गया कि जब कार्यालय द्वारा नवीनीकरण नहीं किया गया तो उनका रिन्युअल किस आधार पर हुआ तो उनका जवाब था कि यह उनके पूर्व का मामला है अगर कोई शिकायती पत्र आता है तो उसकी जांच कर उचित कार्यवाही की जाएगी।

पूर्व जिला सूचना अधिकारी ने भी की थी उपमन्यु की संपत्ति की जांच की मांग
मथुरा। जनपद में पत्रकारों की मान्यता को लेकर अधिकारियों पर किस तरह दबाव बनाया जा रहा है। इसे लेकर 5 अपै्रल को जिला सूचना कार्यालय में जिला सूचना अधिकारी सुरजीत सिंह के साथ उपजा के प्रदेश अध्यक्ष/बृज प्रेस क्लब के अध्यक्ष कमलकांत उपमन्यु ने जमकर अभद्रता की थी। इसके बाद जिला सूचना अधिकारी द्वारा थाना सदर बाजार में कमलकांत उपमन्यु एवं सुरेश पचहरा के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा सहित मामला दर्ज कराया गया था। जिला सूचना अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई गई जन सूचना में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2013 में 6 जून को तत्कालीन जिला सूचना अधिकारी ओमप्रकाश को कमलकांत उपमन्यु ने धमकी दी थी कि जनपद के किसी भी पत्रकार की मान्यता की पत्रावली बिना उसकी सहमति के भेजी गई तो जेल भिजवा दिए जाओगे। इसमें ओमप्रकाश द्वारा उपमन्यु को काफी समझाया गया लेकिन फिर भी अभद्रता नहीं थमी। ओमप्रकाश ने तत्कालीन डीएम विशाल चौहान को लिखे पत्र में कमलकांत उपमन्यु पर आरोप लगाते हुए कहा था कि अपनी राजनीति के तहत कार्यालय के कार्य प्रभावित करने और मात्र ढाई माह सेवानिवृत्ति का समय शेष रहते मुझ पर निराधार आरोप लगाकर अपमानित करने से मैं बहुत आहत हूं।

उपमन्यु के आचरण से लगता है कि वह मुझे अपने प्रभावत में लेने के लिए शासन स्तर पर झूठी शिकायतें भी करा सकते हैं। पूर्व जिला सूचना अधिकारी ओमप्रकाश द्वारा जिलाधिकारी को लिखे पत्र में खुलासा किया गया कि लगभग 12 वर्ष पूर्व बिना मडगार्ड की टूटी साइकिल पर चलने वाले कमलकांत उपमन्यु ने कैसे बहुजन समाज पार्टी से चुनाव लड़ा। सहित उनकी वर्तमान आर्थिक संपन्नता और संभावित अवैध आर्थिक श्रोतों से अर्जित काले धन के मामलों की जांच भी कराने की मांग की थी। इस पत्र पर 13 जून 2013 को किए गए तत्कालीन जिलाधिकारी विशाल चौहान के हस्ताक्षर भी अंकित हैं। सवाल उठता है कि अफसरों के अभद्रता के बाद भी उच्चाधिकारी कमलकांत के खिलाफ सख्त कदम उठाने से क्यों कतराते रहे हैं और मामलों में समझौते का खेल खेलते रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि वर्तमान जिला सूचना अधिकारी द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट के मामले में भी वरिष्ठ पत्रकारों को मध्यस्थ बनाकर समझौते के प्रयास कराए जा रहे हैं। देखना होगा कि कमलकांत उपमन्यु पूर्व के मामलों की तरह उच्चाधिकारियों एवं कुछ प्रभावशाली स्थानीय पत्रकारों के माध्यम से सूचना अधिकारी सुरजीत सिंह के मामले को निपटाने में सफल हो पाते हैं या फिर कानून के शिकंजे में फंसते दिखाई देंगे। इससे पूर्व भी फरह थाने में न्यायालय के आदेश पर उपमन्यु सहित तीन के खिलाफ एक कथित युवती पत्रकार द्वारा बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इसमें भी प्रशासनिक अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामला रफा दफा किया गया था। जबकि 2014 के बलात्कार के मामले में पूर्व बार अध्यक्ष विजयपाल तोमर की जनहित याचिका इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित है।